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NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 8 Pad (2026-27)

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Class 9 Hindi Chapter 8 पद (रैदास)Questions and Answers FREE PDF

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 8 Pad help students understand the chapter's meaning, central idea, poetic expressions, and important messages. These simple and well-structured answers cover all textbook questions and support homework, answer-writing practice, quick revision, and effective preparation for the 2026-27 CBSE examinations. Students can also use the Class 9 Hindi Chapter 8 पद Questions and Answers FREE PDF for convenient offline study.

Class 9 Ganga Chapter 8 Question Answer – Class 9 Hindi पद (रैदास) NCERT Solutions

रचना से संवाद

मेरे उत्तर मेरे तर्क

निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं?

प्रश्न 1. “अब कैसे छूटै राम रट लागी” पंक्ति का भाव है-

(क) नाम उच्चारण की कठिनाई
(ख) नाम रटकर याद करना
(ग) आराध्य का नाम जपना
(घ) मित्रों का नाम रटना

उत्तर: (ग) आराध्य का नाम जपना।

क्योंकि संत रैदास के मन में अपने आराध्य राम के प्रति गहरी भक्ति जाग चुकी है। उन्हें राम-नाम के जप में इतना आनंद मिलता है कि अब वे इस भक्ति से अलग नहीं होना चाहते।


प्रश्न 2. “प्रभु जी तुम चंदन हम पानी” पंक्ति में आराध्य और भक्त का संबंध किस रूप में व्यक्त हुआ है?

(क) एकाकार और समरूप
(ख) तरल और तीव्र सुगंध
(ग) आश्रय और आश्रित
(घ) द्रव और ठोस

उत्तर: (क) एकाकार और समरूप।

क्योंकि जिस प्रकार पानी में चंदन की सुगंध पूरी तरह समा जाती है, उसी प्रकार भक्त भी अपने आराध्य की भक्ति में पूरी तरह लीन होकर उनके साथ एकाकार हो जाता है।


प्रश्न 3. “तुम दीपक, हम बाती” से रैदास का क्या भाव है?

(क) दीपक और बाती का कोई मेल नहीं होता है।
(ख) दीपक बिना बाती भी जल सकता है।
(ग) भक्त आराध्य से अधिक महत्वपूर्ण है।
(घ) भक्त का आराध्य से मेल जीवन को आलोकित करता है।

उत्तर: (घ) भक्त का आराध्य से मेल जीवन को आलोकित करता है।

क्योंकि दीपक और बाती के मिलन से ही प्रकाश उत्पन्न होता है। इसी प्रकार भक्त का अपने आराध्य से जुड़ना उसके जीवन को ज्ञान, प्रेम और भक्ति के प्रकाश से भर देता है।


प्रश्न 4. “जो तुम तोरौ राम मैं नहिं तोरौ” पंक्ति में रैदास का क्या आशय है?

(क) परोपकारी भक्ति भाव
(ख) आराध्य से अटूट संबंध
(ग) सांसारिक मोह
(घ) कर्मकांड पर बल

उत्तर: (ख) आराध्य से अटूट संबंध।

क्योंकि रैदास अपने आराध्य से जुड़े संबंध को कभी समाप्त नहीं करना चाहते। वे कहते हैं कि यदि प्रभु उनसे संबंध तोड़ भी दें, तब भी वे प्रभु से अपना नाता नहीं तोड़ेंगे।


प्रश्न 5. “तीरथ बरत न करूँ अंदेसा” पंक्ति से आप क्या समझते हैं?

(क) तीर्थ और व्रत आवश्यक नहीं हैं।
(ख) तीर्थ और व्रत सब आवश्यक हैं।
(ग) तीर्थ जाने से मुक्ति निश्चित है।
(घ) आराध्य के चरणों में सच्चा आश्रय है।

उत्तर: (क) तीर्थ और व्रत आवश्यक नहीं हैं।

क्योंकि रैदास के लिए तीर्थ, व्रत और अन्य बाहरी कर्मकांडों से अधिक महत्वपूर्ण प्रभु के चरणों में सच्ची आस्था और पूर्ण विश्वास है। वे अपने आराध्य को ही एकमात्र सहारा मानते हैं।


प्रश्न 6. सर्वव्यापक ईश्वर की अवधारणा किस पंक्ति में व्यक्त होती है?

(क) “जहँ जहँ जाओ तुम्हरी पूजा”
(ख) “जाकी जोति बरै दिन राती”
(ग) “तुम दीपक, हम बाती”
(घ) “तीरथ बरत न करूँ अंदेसा”

उत्तर: (क) “जहँ जहँ जाओ तुम्हरी पूजा”।

क्योंकि इस पंक्ति में कवि कहता है कि वह जहाँ भी जाता है, वहीं उसे अपने आराध्य की उपस्थिति और पूजा दिखाई देती है। इससे ईश्वर के हर स्थान पर विद्यमान होने का भाव व्यक्त होता है।

अर्थ और भाव

नीचे दी गई पंक्तियों का अर्थ समझाते हुए भाव स्पष्ट कीजिए।

(क) “प्रभु जी तुम घन बन, हम मोरा, जैसे चितवत चंद चकोरा।”

उत्तर: संत रैदास अपने आराध्य के प्रति अनन्य प्रेम व्यक्त करते हुए कहते हैं कि हे प्रभु! आप जल से भरे बादल के समान हैं और मैं आपको देखकर आनंद से नाचने वाला मोर हूँ। जिस प्रकार चकोर पक्षी लगातार चंद्रमा की ओर देखता रहता है, उसी प्रकार मैं भी अपने आराध्य के दर्शन की प्रतीक्षा करता हूँ।

इन पंक्तियों में भक्त की अपने आराध्य के प्रति गहरी आसक्ति, प्रेम और समर्पण का भाव व्यक्त हुआ है। भक्त के लिए प्रभु ही उसके जीवन का आधार और आनंद हैं।


(ख) “तीरथ बरत न करूँ अंदेसा, तुम्हरे चरन कमल एक भरोसा।”

उत्तर: संत रैदास कहते हैं कि उन्हें तीर्थयात्रा, व्रत और अन्य बाहरी धार्मिक कर्मकांडों की कोई चिंता नहीं है। उनका पूरा विश्वास केवल अपने आराध्य के चरण-कमलों में है।

इन पंक्तियों में कवि ने बाहरी आडंबरों के स्थान पर सच्ची भक्ति, आस्था और समर्पण को महत्व दिया है। रैदास के अनुसार निष्कपट मन से की गई प्रभु-भक्ति ही मुक्ति और शांति का सच्चा साधन है।

मेरी समझ मेरे विचार

नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए—

प्रश्न 1. “जो तुम तोरौ राम मैं नहिं तोरौ” पंक्ति में रैदास की अपने आराध्य में अटूट निष्ठा का भाव है। इससे आप क्या समझते हैं? विस्तार से लिखिए।

उत्तर: इस पंक्ति से रैदास की अपने आराध्य के प्रति गहरी आस्था और अटूट निष्ठा प्रकट होती है। वे प्रभु को अपने जीवन का आधार, पालक और सच्चा हितैषी मानते हैं। उनका विश्वास है कि सांसारिक संबंध टूट सकते हैं, लेकिन भक्त और भगवान का संबंध कभी समाप्त नहीं होता।

रैदास कहते हैं कि यदि प्रभु उनसे नाता तोड़ भी लें, तब भी वे प्रभु से अपना संबंध नहीं तोड़ेंगे, क्योंकि उनके अतिरिक्त संसार में ऐसा कोई नहीं है जिससे वे अपना मन जोड़ सकें। यह भावना पूर्ण समर्पण, विश्वास और निष्काम भक्ति को व्यक्त करती है।


प्रश्न 2. रैदास ने तीर्थ और व्रत के स्थान पर किस साधन को भक्ति का प्रमुख आधार माना है? आपके विचार से भक्ति के क्या आधार हो सकते हैं?

उत्तर: रैदास ने तीर्थयात्रा, व्रत और बाहरी कर्मकांडों के स्थान पर सच्ची आस्था, प्रेम, समर्पण और मन की पवित्रता को भक्ति का प्रमुख आधार माना है। उनके अनुसार भक्त का अपने आराध्य पर पूर्ण विश्वास होना चाहिए।

मेरे विचार से भक्ति के मुख्य आधार निष्कपट प्रेम, विनम्रता, सदाचार, सेवा, करुणा और सच्चा समर्पण हैं। केवल बाहरी धार्मिक कार्य करने से भक्ति पूरी नहीं होती। मन में ईश्वर के प्रति श्रद्धा और सभी जीवों के प्रति प्रेम होना भी आवश्यक है।


प्रश्न 3. दोनों पदों में भक्त और आराध्य के संबंध को किन-किन प्रतीकों/उपमाओं से व्यक्त किया गया है? लिखिए।

उत्तर: दोनों पदों में भक्त और आराध्य के अटूट संबंध को निम्नलिखित प्रतीकों और उपमाओं से व्यक्त किया गया है:


आराध्य

भक्त

चंदन

पानी

बादल और वन

मोर

चंद्रमा

चकोर

दीपक

बाती

मोती

धागा

सोना

सुहागा

स्वामी

दास

राम (ईश्वर)

भक्त (रैदास)


इन सभी उपमाओं से यह स्पष्ट होता है कि भक्त का अस्तित्व अपने आराध्य से जुड़ा हुआ है और वह उनसे अलग नहीं रह सकता।

विधा से संवाद

कविता का सौंदर्य

“प्रभु जी तुम घन बन, हम मोरा, जैसे चितवत चंद चकोरा।”

उपर्युक्त पंक्ति के रेखांकित अंश पर ध्यान दीजिए। इसमें अनुप्रास अलंकार का प्रयोग किया गया है। जिस रचना में व्यंजन । वर्णों की आवृत्ति एक से अधिक बार होती है, वहाँ अनुप्रास अलंकार होता है।


“प्रभु जी तुम मोती, हम धागा, जैसे सोने मिलत सुहागा।”

उपर्युक्त रेखांकित अंश में उपमा अलंकार है। किसी प्रसिद्ध वस्तु की समानता के आधार पर जब किसी वस्तु या व्यक्ति के रूप, गुण, धर्म का वर्णन किया जाता है तो वहाँ उपमा अलंकार होता है।


“तीरथ बरत न करूँ अंदेसा तुम्हरे चरन कमल एक भरोसा।”

उपर्युक्त रेखांकित अंश में रूपक अलंकार है। रूपक अलंकार वहाँ होता है जहाँ रूप और गुण की अत्यधिक समानता के कारण उपमेय में उपमान का आरोप कर अभेद स्थापित किया जाए।

अब आप अपनी पाठ्यपुस्तक में सम्मिलित कविताओं में अनुप्रास, उपमा और रूपक अलंकार वाली अन्य पंक्तियों को ढूँढ़कर लिखिए।


कविता की कुछ अन्य विशेषताएँ

नीचे दी गई सूची को ध्यान से देखिए। इस सूची में रैदास के दोनों पदों से कुछ विशेषताएँ चुनकर दी गई हैं। पदों में से चुनकर इन विशेषताओं को दर्शाती पंक्तियाँ लिखिए। उदाहरण के लिए पहली विशेषता के सामने पंक्ति दी गई है।


रैदास के इन दोनों पदों में बहुत से ऐसे शब्द प्रयुक्त हुए हैं जिनके स्थान पर अन्य शब्दों का प्रयोग होता है। नीचे सूची में दिए गए शब्दों को देखिए।.png


उत्तर:

विशेषताएँ

उदाहरण

अनन्य भक्ति भाव

“जो तुम तोरौ राम मैं नहिं तोरौ, तुम सौ तोरि कवन सौं जोरौ।”

सरल और लोकधर्मी भाषा

“प्रभुजी तुम चंदन हम पानी, जाकी अंग-अंग बास समानी।”

उपमा और तुलना

“प्रभुजी तुम घन बन, हम मोरा, जैसे चितवत चंद चकोरा।”

लयात्मकता और गेयता/ध्वन्यात्मकता

“प्रभुजी तुम मोती, हम धागा, जैसे सोने मिलत सुहागा।”

दृढ़ निष्ठा और आस्था

“तीरथ बरत न करूँ अंदेसा, तुम्हरे चरन कमल एक भरोसा।”


विषयों से संवाद

प्रश्न 1. तीर्थ और व्रत के स्थान पर रैदास ने आराध्य की भक्ति को प्रधान माना है। भक्तिकाल के कवि रैदास की तरह कबीर भी निराकार आराध्य की भक्ति पर बल देते हैं। तत्कालीन सामाजिक, सांस्कृतिक परिस्थितियों के आधार पर बताइए कि इसके क्या कारण हो सकते हैं?

(संकेत – आप अपने सामाजिक विज्ञान के शिक्षक की सहायता भी ले सकते हैं।)

उत्तर: रैदास के समय में भक्ति आंदोलन का व्यापक प्रभाव था। उस समय समाज में जातिगत भेदभाव, धार्मिक रूढ़ियाँ, बाहरी आडंबर, व्रत-उपवास और तीर्थ-पूजा जैसी परंपराएँ अधिक प्रचलित थीं। सामाजिक और धार्मिक तनावों के कारण सामान्य लोगों के लिए भक्ति का सरल मार्ग आवश्यक हो गया था।

ऐसी परिस्थितियों में रैदास और कबीर जैसे संत कवियों ने निराकार ईश्वर की भक्ति पर बल दिया। उनके अनुसार ईश्वर को पाने के लिए मंदिर, मूर्ति, तीर्थ या कर्मकांड आवश्यक नहीं हैं। सच्ची भक्ति मन की पवित्रता, प्रेम, समानता और समर्पण में निहित है। इस प्रकार निराकार भक्ति ने लोगों को धार्मिक आडंबरों से दूर करके सरल भक्ति, सामाजिक समरसता और भाईचारे का मार्ग दिखाया।


प्रश्न 2. “सोने मिलत सुहागा”

‘सुहागा’ एक प्राकृतिक खनिज है जिसके प्रयोग से सोने की अशुद्धियाँ दूर हो जाती हैं और उसकी चमक बढ़ जाती है। ‘सुहागा’ का रासायनिक नाम और उसकी विशेषताएँ अपने विज्ञान के शिक्षक से चर्चा करके लिखिए। 

उत्तर: विद्यार्थी अपने विज्ञान के शिक्षक की सहायता से सुहागा के रासायनिक नाम, सूत्र और विशेषताओं के विषय में जानकारी एकत्रित करके स्वयं लिखें।

भाषा से संवाद

व्याकरण की बात

शब्दों की बात

प्रश्न 1. पठित पदों में से संज्ञा और सर्वनाम के तीन-तीन उदाहरण ढूँढ़कर लिखिए।

उत्तर:

संज्ञा के उदाहरण: राम, चंदन, घन, मोरा, चंद, चकोरा, दीपक, बाती

सर्वनाम के उदाहरण: तुम, हम, मैं कवन तुम्हरे, सबन


प्रश्न 2. रैदास के इन दोनों पदों में बहुत से ऐसे शब्द प्रयुक्त हुए हैं जिनके स्थान पर अन्य शब्दों का प्रयोग होता है। नीचे सूची में दिए गए शब्दों को देखिए। आप या आपके आस-पास के लोग इन शब्दों के लिए किन अन्य शब्दों का प्रयोग करते हैं? लिखिए।


नीचे दी गई सूची को ध्यान से देखिए। इस सूची में रैदास के दोनों पदों से कुछ विशेषताएँ चुनकर दी गई हैं। पदों में से चुनकर इन विशेषताओं को दर्शाती पंक्तियाँ लिखिए। उदाहरण के लिए पहली विशेषता के सामने पंक्ति दी गई है.png


उत्तर:

पद में प्रयुक्त शब्द

प्रचलित शब्द

मोरा

मोर

चकोरा

चकोर

बाती

बत्ती/वर्तिका

राती

रात

सोने

सोना

तीरथ

तीर्थ

बरत

व्रत


सृजन

प्रश्न 1. कक्षा में समूह बनाकर इन दोनों पदों को गाकर/पाठ करके प्रस्तुत कीजिए।

उत्तर: विद्यार्थी अपनी कक्षा में छोटे-छोटे समूह बनाकर दोनों पदों का लय और उचित उच्चारण के साथ गायन अथवा पाठ करें। प्रस्तुति के दौरान पदों में व्यक्त भक्ति, प्रेम और समर्पण के भाव को भी ध्यान में रखें।


प्रश्न 2. कल्पना कीजिए कि पद में आई उपमाओं के आधार पर भक्त और आराध्य आपस में बात कर रहे हैं। इस दृश्य को आधार बनाकर संवाद-लेखन कीजिए।

उत्तर:

मोर – मेरे घनश्याम!

बादल घन – मैं तुम्हारे पास ही हूँ।

मोर – आओ, मुझ पर बरस जाओ!

घन – देखो, मैं तुम्हारे लिए ही घिरकर आया हूँ और उमड़ रहा हूँ।

मोर – घनश्याम! अब और प्रतीक्षा नहीं होती। बरसो! मेरा अंग-अंग तुम्हारे प्रेम-जल के लिए प्यासा है।

घन – धैर्य रखो, मयूर! दूरी और प्रतीक्षा का भी अपना आनंद होता है।

मोर – अब यह वियोग सहन नहीं होता। मेरे पंख फैलने के लिए व्याकुल हैं।
(तभी बादल बरसने लगते हैं और मोर अपने पंख फैलाकर नाच उठता है।)

मोर – हे प्रभु! मैं तो इसी आनंद के लिए जीवित हूँ। तुम सदैव इसी प्रकार बरसते रहो। मुझे छोड़कर कहाँ चले जाते हो?

घन – मैं तो सदा तुम्हारे मन में निवास करता हूँ। आँखें बंद करके मुझे अपने भीतर अनुभव किया करो।

मोर – इसी विश्वास से तो मैं जीवित हूँ, अन्यथा कब का जीवन छोड़ चुका होता!

घन – जीवन छोड़कर कहाँ जाते? अंत में मेरे पास ही तो आते।
(मोर शांत होकर आँखें बंद कर लेता है।)


प्रश्न 3. “जो तुम तोरौ राम मैं नहिं तोरौ” पंक्ति को आधार बनाकर अटूट मित्रता पर एक लघुकथा तैयार कीजिए।

उत्तर: बालक नरेंद्र अपने गुरु श्रीरामकृष्ण परमहंस से संबंध तोड़कर चला आया था। नरेंद्र के कुछ हितैषी मित्रों ने उससे कहा, “रामकृष्ण परमहंस ढोंगी हैं। वे माँ काली की पूजा करते हैं, उनके सामने बैठकर बातें करते हैं और उनकी आँखों से आँसू बहते रहते हैं। तुम्हारा गुरु कितना असहाय है!”

नरेंद्र एक वकील का बेटा था और तर्क करना जानता था। उसे भी कुछ समय के लिए लगा कि रामकृष्ण परमहंस सचमुच पागल हैं। इसलिए उसने दक्षिणेश्वर जाना और उनसे मिलना छोड़ दिया। कई महीने बीत गए, पर नरेंद्र उनसे मिलने नहीं गया।

रामकृष्ण परमहंस नरेंद्र से मिलने के लिए व्याकुल हो उठे। उन्हें लगा कि उनका प्यारा नरेंद्र उनसे रूठ गया है। वे गुरु थे, फिर भी अहंकार छोड़कर स्वयं उस प्रार्थना सभा में पहुँच गए, जहाँ नरेंद्र आया करता था। सभा में भाषण चल रहा था। ब्रह्म की चर्चा सुनते ही परमहंस भावविभोर होकर नाचने लगे और वहीं समाधि में लीन हो गए।

सभा के आयोजकों ने समझा कि परमहंस सभा में बाधा डालने आए हैं। उन्होंने बत्तियाँ बुझा दीं और उनका अपमान किया। यह देखकर नरेंद्र से रहा नहीं गया। उसके मन में गुरु के प्रति प्रेम उमड़ पड़ा और वह उन्हें संभालकर सभा से बाहर ले आया।

नरेंद्र बोले- गुरुजी! आप यहाँ क्यों आ गए?

परमहंस बोले, “नरेंद्र! तू मेरा ब्रह्म है, तू मेरा ईश्वर है। ईश्वर मुझसे रूठ जाए तो क्या मैं भी उससे रूठ जाऊँ? नहीं, मैं तुझे कभी नहीं भूल सकता। तू तो मेरा प्राण है!”

यह सुनकर नरेंद्र की आँखें भर आईं। उस दिन से वह फिर श्रीरामकृष्ण परमहंस का परम भक्त बन गया और उनका संबंध पहले से भी अधिक अटूट हो गया।

झरोखे से

आपने रैदास के पद पढ़े। अब आप रैदास की तरह ही महाराष्ट्र के संत कवि नामदेव के आगे दिए गए दो पद पढ़िए। निर्गुण संत काव्य परंपरा के संत कवि नामदेव का जन्म 13वीं–14वीं शताब्दी में महाराष्ट्र में हुआ। अन्य संत कवियों की भाँति नामदेव ने भी बाह्य आडंबरों, सामाजिक रूढ़ियों का विरोध कर सामाजिक समरसता, प्रेम एवं निराकार भक्ति से संबंधित पदों की रचना की है।

उत्तर:
(1)
माइ न होती बापु न होता करम न होती काया।
हम नहिं होते, तुम नहिं होते, कवन कहां ते आया।।
राम कोइ न किसी केरा। जैसे तरवर पंखि बसेरा।।
चंद न होता, सूर न होता, पानी होता मिलाया।
सास्त्र न होता बेद न होता, करमु कहां ते आया।।
खेचरि भूचरि तुलसी माला गुरपरसादी पाया।
नामा प्रणवै परम तत्त कूं सतगुर मोहि लखाया।।

(2)
मोहि लागति तालाबेली।
बछरा बिनु गाइ अकेली।।
पानी बिनु ज्यूं मीन तलफैं।
ऐसे रामनाम बिनु नामा कलपै।।
जैसे गाइ का बाछा छूटला।
थन चोखता माखन घूटला।।
नामदेउ नारायन पाया।
गुर भेटत ही अलख लखाया।।
जैसे विषै हेत हेत परनारी।
ऐसे नामे प्रीति मुरारी॥
जैसे ताप ते निरमल घामा।
तैसे रामनाम बिनु बापुरो नामा॥


Improve Your Preparation with Class 9 Hindi Chapter 8 Pad

Vedantu’s NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 8 Pad explain the meaning and भाव of both poems in simple language. Students can understand Raidas’s devotion, his opposition to external religious rituals, and the symbols used to describe the relationship between the devotee and the आराध्य, such as चंदन-पानी, दीपक-बाती, मोती-धागा, and बादल-मोर.


Students should first read both पद from the Ganga textbook and try to answer the questions independently. They can then compare their responses with these solutions to improve their understanding, answer structure, and preparation for school examinations.


CBSE Class 9 Hindi Chapter 8 Pad Other Study Materials

S.No

Important Links for Chapter 8 Class 9 Hindi

1

Class 9 Pad Important Questions

2

Class 9 Pad Revision Notes



Chapter-Specific NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga

Given below are the chapter-wise NCERT Solutions for Class 9 Hindi. Go through these chapter-wise solutions to be thoroughly familiar with the concepts.


S.No

NCERT Solutions Class 9 Chapter-wise Hindi PDF

1

Chapter 1 - Do Bailon Ki Katha Solutions

2

Chapter 2 - Kya Likhun? Solutions

3

Chapter 3 - Samvaadheen Solutions

4

Chapter 4 -  Aisi Bhi Baatein Hoti Hein Solutions

5

Chapter 5 - Aakhri Chataan Tak Solutions

6

Chapter 6 - Reed Ki Haddi Solutions

7

Chapter 7 – Main Aur Mera Desh Solutions

8

Chapter 9 - Ram-Lakshman-Parshuram-Sanvaad Solutions

9

Chapter 10 - Bharati Jay Vijaykare! Solutions

10

Chapter 11 - Jhansi Ki Rani Solutions

11

Chapter 12 - Ghar Ki Yaad Solutions



Additional Study Materials for Class 9 Hindi

FAQs on NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 8 Pad (2026-27)

1. Where can I download NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 8 Pad PDF?

Students can download the FREE PDF of NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 8 Pad from Vedantu. It contains simple and exam-ready answers to all textbook questions for the 2026-27 academic session.

2. Who is the poet of Class 9 Hindi Chapter 8 Pad?

The poems in Class 9 Hindi Ganga Chapter 8 Pad were composed by Sant Raidas, also known as Sant Ravidas. He was a prominent Bhakti-period saint and poet.

3. What is the main theme of Raidas ke Pad?

The main theme of Raidas ke Pad is complete devotion and surrender to God. The poems explain that a true devotee cannot separate from the आराध्य and does not depend on external rituals.

4. What relationship between the devotee and God is shown in Class 9 Hindi Chapter 8?

Raidas compares the relationship between the devotee and God with चंदन-पानी, बादल-मोर, चंद्रमा-चकोर, दीपक-बाती, मोती-धागा and स्वामी-दास. These comparisons show their inseparable bond.

5. What does “अब कैसे छूटै राम रट लागी” mean?

The line means that the poet has become completely devoted to chanting the name of Ram. His attachment to God is now so deep that it cannot be broken.

6. Why does Raidas not give importance to तीर्थ and व्रत?

Raidas believes that true devotion depends on pure faith, love, and surrender rather than pilgrimages, fasting, or external religious rituals. He considers God’s चरण-कमल his only support.

7. Which अलंकार are used in Class 9 Hindi Ganga Chapter 8 Pad?

The poems include अनुप्रास, उपमा and रूपक अलंकार. Examples include “चंद चकोरा,” “जैसे सोने मिलत सुहागा” and “चरण कमल.”

8. What values do students learn from Raidas ke Pad?

Students learn devotion, faith, equality, humility, inner purity, and freedom from religious show and social discrimination. The poems also promote love and brotherhood.

9. How do NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 8 help in examination preparation?

The solutions explain every answer in a clear and organised manner. They help students understand the poems, practise value-based questions, and improve their answer-writing skills.

10. How should students prepare for Class 9 Hindi Ganga Chapter 8 Pad?

Students should read both poems carefully, understand the meanings of difficult words, and revise the भाव, themes, symbols, and अलंकार. They should then practise all textbook questions using the NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 8 Pad.