Class 9 Hindi Chapter 1 दो बैलों की कथा Questions and Answers FREE PDF
NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 1 Do Bailon Ki Katha help students understand Munshi Premchand’s meaningful story about friendship, loyalty, courage, freedom, and compassion.
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Class 9 Ganga Chapter 1 Question Answer – Class 9 Hindi दो बैलों की कथा NCERT Solutions
अभ्यास (पृष्ठ 16-27)
रचना से संवाद
मेरे उत्तर मेरे तर्क
निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं?
प्रश्न 1. कहानी में हीरा और मोती का आपसी संबंध किस गुण को मुख्य रूप से दर्शाता है?
(क) प्रतिस्पर्धा और प्रतिद्वंद्विता
(ख) एकता और सहयोग
(ग) गर्व और दंभ
(घ) विद्रोह और क्रोध
उत्तर: (ख) एकता और सहयोग
क्योंकि हीरा और मोती हर परिस्थिति में एक-दूसरे का साथ देते हैं। वे काम करते समय भी एक-दूसरे का भार कम करने का प्रयास करते हैं और कठिन समय में मिलकर संघर्ष करते हैं।
प्रश्न 2. हीरा मोती ने नया स्थान स्वीकार क्यों नहीं किया?
(क) उन्हें भरपेट भोजन दिया गया।
(ख) उन्हें बहुत मोटी रस्सी से बाँधा गया।
(ग) मालिक ने बेचा, यह सोचकर उन्हें अपमान लगा।
(घ) उन्हें अलग-अलग बाँधा गया।
उत्तर: (ग) मालिक ने बेचा, यह सोचकर उन्हें अपमान लगा।
हीरा और मोती झूरी से बहुत प्रेम करते थे। उन्हें लगा कि उनके मालिक ने उन्हें बेच दिया है। इस कारण उनके स्वाभिमान और अपनत्व की भावना को ठेस पहुँची और उन्होंने नए स्थान को स्वीकार नहीं किया।
प्रश्न 3. बैलों ने रस्सी तोड़कर घर लौटने का निर्णय क्यों लिया?
(क) कष्टों से बचने के लिए
(ख) स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए
(ग) अभिमान की रक्षा के लिए
(घ) अपनापन पाने के लिए
उत्तर: (घ) अपनापन पाने के लिए
हीरा और मोती को झूरी के घर से गहरा लगाव था। वे केवल बंधन से मुक्त नहीं होना चाहते थे, बल्कि उस स्थान पर लौटना चाहते थे जहाँ उन्हें प्रेम, सम्मान और अपनापन मिलता था।
प्रश्न 4. गया द्वारा डंडे से मारने पर मोती का आक्रोश किस मानवीय मनोवृत्ति का द्योतक है?
(क) स्वाभिमान
(ख) अहिंसा
(ग) पराधीनता
(घ) अन्याय की रक्षा
उत्तर: (क) स्वाभिमान
गया के अन्यायपूर्ण व्यवहार और मारपीट से मोती का आत्मसम्मान आहत हुआ। उसका आक्रोश अन्याय का विरोध करने और अपने स्वाभिमान की रक्षा करने की भावना को दर्शाता है।
प्रश्न 5. कहानी में बैलों की ‘मूक- भाषा’ का प्रयोग लेखक ने किसलिए किया?
(क) कहानी को रोचक बनाने के लिए
(ख) मनुष्य जैसी चेतना दिखाने के लिए
(ग) संवादों को छोटा रखने के लिए
(घ) कथा में हास्य उत्पन्न करने के लिए
उत्तर: (ख) मनुष्य जैसी चेतना दिखाने के लिए
लेखक ने मूक-भाषा के माध्यम से यह दिखाया है कि पशुओं में भी प्रेम, पीड़ा, मित्रता, स्वाभिमान और स्वतंत्रता जैसी भावनाएँ होती हैं। इससे कहानी का प्रतीकात्मक अर्थ भी अधिक प्रभावशाली बनता है।
प्रश्न 6. ‘दो बैलों की कथा’ को यदि स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ें, तो हीरा और मोती किसके प्रतीक हो सकते हैं?
(क) भारत पर अंग्रेजों के क्रूर और अन्यायपूर्ण शासन के
(ख) स्वतंत्रता संग्राम में पशुओं के योगदान के
(ग) सत्याग्रह और अहिंसा के आंदोलन के
(घ) स्वतंत्रता के लिए भारतीय जनता के संघर्ष के
उत्तर: (घ) स्वतंत्रता के लिए भारतीय जनता के संघर्ष के
हीरा और मोती अन्याय, बंधन और अत्याचार के सामने हार नहीं मानते। वे लगातार मुक्ति और सम्मान के लिए संघर्ष करते हैं। इसलिए वे स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने वाली भारतीय जनता के प्रतीक माने जा सकते हैं।
मेरी समझ मेरे विचार
नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए-
प्रश्न 1. “दूसरे दिन गया ने बैलों को हल में जोता, पर इन दोनों ने जैसे पाँव न उठाने की कसम खा ली थी।” जब बैल नए मालिक के यहाँ गए, तो उन्होंने काम करने से इनकार क्यों कर दिया था?
उत्तर: हीरा और मोती अपने मालिक झूरी के प्रति अत्यंत वफादार थे। उन्हें लगा कि झूरी ने उन्हें गया के हाथ बेच दिया है। इस बात से वे दुखी और अपमानित महसूस कर रहे थे। नए स्थान पर उन्हें प्रेम और अपनापन भी नहीं मिला। इसी कारण उन्होंने गया के लिए काम करने और हल खींचने से इनकार कर दिया।
प्रश्न 2. “गाँव के इतिहास में यह घटना अभूतपूर्व न होने पर भी महत्वपूर्ण थी।” बैलों का घर लौट आना कोई साधारण घटना नहीं है। कैसे?
(संकेत – वे क्यों लौट आए, उनके और झूरी के मन में कौन-कौन से भाव रहे होंगे, क्या वास्तविक जीवन में भी ऐसा होता है आदि।)
उत्तर: हीरा और मोती गया के घर से रस्सियाँ तोड़कर लंबी दूरी तय करते हुए झूरी के पास लौट आए। इससे उनके प्रेम, निष्ठा और अपने घर के प्रति गहरे लगाव का पता चलता है। झूरी ने भी उन्हें वापस देखकर प्रसन्नता और अपनापन अनुभव किया होगा। वास्तविक जीवन में भी कई पालतू पशु अपने मालिक और घर को पहचानते हैं तथा अवसर मिलने पर वापस लौट आते हैं। इसलिए बैलों का लौटना साधारण घटना नहीं, बल्कि उनके भावनात्मक संबंध का प्रमाण है।
प्रश्न 3. “मोती ने मूक-भाषा में कहा-अब तो नहीं सहा जाता, हीरा!”
‘कभी-कभी संघर्ष करना आवश्यक हो जाता है’ इस कथन को कहानी के उदाहरणों से सिद्ध कीजिए।
उत्तर: हीरा और मोती शांत स्वभाव के थे, पर गया उनके साथ कठोर व्यवहार करता था। वह उन्हें डंडे से मारता, मोटी रस्सियों से बाँधता और खाने के लिए सूखा भूसा देता था। वे लंबे समय तक अन्याय सहते रहे, लेकिन जब अत्याचार सीमा से बढ़ गया, तो मोती ने विरोध करने का निर्णय लिया। काँजीहौस में भी उन्होंने दीवार तोड़कर अन्य पशुओं को मुक्त करने का प्रयास किया। इन घटनाओं से स्पष्ट होता है कि जब समझाने और सहने के बाद भी अन्याय समाप्त न हो, तो उसके विरुद्ध संघर्ष करना आवश्यक हो जाता है।
प्रश्न 4. “जब पेट भर गया और दोनों ने आजादी का अनुभव किया…” हीरा एवं मोती ‘स्वतंत्रता’ और ‘अपनापन’ दोनों में से किस भावना से अधिक प्रेरित थे? कारण सहित लिखिए।
उत्तर: हीरा और मोती स्वतंत्रता की अपेक्षा अपनापन की भावना से अधिक प्रेरित थे। झूरी और छोटी लड़की से मिले प्रेम के कारण वे उनके प्रति निष्ठावान बने रहे। उन्हें प्रेम से जुड़ा बंधन स्वीकार था, पर कठोरता, अपमान और अत्याचार सहन नहीं था। जहाँ उन्हें अपनापन मिला, वहाँ वे स्वेच्छा से रहे और काम किया। प्रेम समाप्त होते ही वे स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने लगे।
प्रश्न 5. “बैलों ने जैसे पाँव न उठाने की कसम खा ली थी।”
‘अत्याचार सहना भी अन्याय में भागीदारी है’ – क्या आप इस कथन से सहमत हैं? अपने उत्तर के कारण भी बताइए।
उत्तर: हाँ, मैं इस कथन से सहमत हूँ। बिना विरोध किए लगातार अत्याचार सहने से अत्याचारी का साहस बढ़ता है। वह समझने लगता है कि उसके गलत व्यवहार को कोई चुनौती नहीं देगा। हीरा और मोती का काम करने से इनकार करना अन्याय के विरुद्ध शांत विरोध था। प्रत्येक व्यक्ति को अपने अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए उचित तरीके से आवाज उठानी चाहिए।
प्रश्न 6. “बहुत दिनों साथ रहते-रहते दोनों में भाईचारा हो गया था।” हीरा और मोती अभिन्न मित्र थे। कहानी की किन-किन घटनाओं के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है? कम-से-कम तीन बिंदु लिखिए।
उत्तर: हीरा और मोती की गहरी मित्रता निम्नलिखित घटनाओं से स्पष्ट होती है—
गाड़ी खींचते समय दोनों प्रयास करते थे कि अधिक भार दूसरे पर न पड़े और वे स्वयं अधिक भार उठा लें।
गया ने हीरा को डंडे से मारा, तो मोती क्रोधित हो गया और अपने मित्र को बचाने के लिए हल तथा रस्सियों सहित भागने लगा।
खेलते समय जब मोती को लगा कि हीरा नाराज हो गया है, तो उसने तुरंत पीछे हटकर झगड़ा बढ़ने से रोक दिया।
विशाल साँड़ से मुकाबला करते समय दोनों ने मिलकर योजना बनाई और एक-दूसरे की सहायता से उसे पराजित किया।
संकट के समय दोनों ने एक-दूसरे को छोड़ने से इनकार किया और साथ मिलकर कठिनाइयों का सामना किया।
प्रश्न 7. “उसी समय मालकिन ने आकर दोनों के माथे चूम लिए।” कहानी में मालकिन और छोटी लड़की, दोनों के व्यवहार की तुलना कीजिए।
उत्तर: कहानी में मालकिन और छोटी लड़की का प्रारंभिक व्यवहार एक-दूसरे से बिल्कुल अलग है। मालकिन गया का पक्ष लेती है और हीरा-मोती के लौट आने पर नाराज होती है। वह उन्हें दंड देने और सूखा भूसा खिलाने की बात करती है। इसके विपरीत छोटी लड़की संवेदनशील और दयालु है। वह बैलों की पीड़ा समझती है, उन्हें रोटियाँ खिलाती है और खतरा उठाकर उनकी रस्सियाँ खोल देती है। अंत में मालकिन का हृदय भी बदलता है और वह दोनों बैलों के माथे चूमकर स्नेह प्रकट करती है।
मेरी कल्पना मेरे अनुमान
प्रश्न 1. “उसने उनके माथे सहलाए और बोली- खोले देती हूँ। चुपके से भाग जाओ…” यदि आप वह छोटी लड़की होते, तो बैलों की मदद किस प्रकार करते?
उत्तर: यदि मैं उस छोटी लड़की की जगह होता, तो सबसे पहले हीरा और मोती को भोजन और पानी देता। उनके घावों की देखभाल करता और घर के बड़े सदस्यों को समझाने का प्रयास करता कि पशुओं के साथ क्रूरता नहीं करनी चाहिए। यदि उनकी जान को खतरा होता, तो किसी जिम्मेदार व्यक्ति की सहायता लेकर उन्हें सुरक्षित स्थान तक पहुँचाने का प्रयास करता।
प्रश्न 2. “दोनों गधे अभी तक ज्यों-के-त्यों खड़े थे।” भय और संकोच इन्सान को अवसर मिलने पर भी जकड़े रखता है। क्या आप इस कथन से सहमत हैं? इस वाक्य के संबंध में कहानी और अपने अनुभवों से उदाहरण लेते हुए अपने विचार लिखिए।
उत्तर: हाँ, मैं इस कथन से सहमत हूँ। काँजीहौस की दीवार टूटने के बाद भी गधे बाहर नहीं निकले, क्योंकि लंबे समय की पराधीनता ने उनके भीतर भय पैदा कर दिया था। इसी प्रकार मनुष्य भी कई बार असफलता, आलोचना या दंड के डर से उचित अवसर का लाभ नहीं उठा पाता। मैंने भी देखा है कि कुछ विद्यार्थी उत्तर जानते हुए भी संकोच के कारण कक्षा में बोल नहीं पाते। आत्मविश्वास और साहस से ही भय तथा झिझक पर विजय पाई जा सकती है।
मेरे अनुभव मेरे विचार
प्रश्न 1. “दोस्तों में घनिष्ठता होते ही धौल धप्पा होने लगता है। इसके बिना दोस्ती कुछ फुसफुसी, कुछ हल्की-सी रहती है, जिस पर ज्यादा विश्वास नहीं किया जा सकता।” क्या आप इस बात से सहमत हैं? आपको ऐसा क्यों लगता है? अपने अनुभवों के आधार पर बताइए।
उत्तर: मैं इस बात से काफी हद तक सहमत हूँ। सच्चे मित्र एक-दूसरे के सामने सहज रहते हैं। वे साथ हँसते हैं, मजाक करते हैं और बिना औपचारिकता के अपने मन की बात कह देते हैं। हालाँकि मजाक हमेशा मर्यादा और सम्मान के भीतर होना चाहिए। मेरे अनुभव में सच्ची मित्रता की पहचान केवल हँसी-मजाक नहीं, बल्कि कठिन समय में साथ देना, गलतियों को समझाना और एक-दूसरे पर विश्वास करना भी है।
प्रश्न 2. “हीरा ने तिरस्कार किया- गिरे हुए बैरी पर सींग न चलाना चाहिए।”
“यह सब ढोंग है। बैरी को ऐसा मारना चाहिए कि फिर न उठे।”
आपका इस संबंध में क्या विचार है? आप किसके साथ हैं- हीरा के या मोती के या दोनों के? क्यों?
उत्तर: मैं इस स्थिति में हीरा के विचार से अधिक सहमत हूँ। किसी शत्रु को पराजित करने के बाद उस पर दोबारा हमला करना उचित नहीं है। इससे वीरता नहीं, बल्कि क्रूरता दिखाई देती है। अन्याय का विरोध करना आवश्यक है, लेकिन प्रतिशोध की भावना में मर्यादा भूल जाना गलत है। मोती का आक्रोश स्वाभाविक है, पर हीरा की संयम, दया और नैतिकता से भरी सोच अधिक उचित है।
प्रश्न 3. “हम और तुम इतने दिनों एक साथ रहे। आज तुम विपत्ति में पड़ गए तो मैं तुम्हें छोड़कर अलग हो जाऊँ?” क्या कभी आपने किसी विपत्ति या चुनौती का सामना अपने किसी मित्र या परिजन के साथ मिलकर किया है? उस घटना के विषय में बताइए।
उत्तर: एक बार विद्यालय से लौटते समय मेरे मित्र की साइकिल दुर्घटनाग्रस्त हो गई और उसे चोट लग गई। मुझे घर पहुँचने में देर हो रही थी, फिर भी मैंने उसे अकेला नहीं छोड़ा। मैंने आसपास के लोगों की सहायता ली, उसके परिवार को सूचना दी और उसे पास के अस्पताल पहुँचाया। उस दिन मैंने अनुभव किया कि सच्ची मित्रता का अर्थ केवल अच्छे समय में साथ रहना नहीं, बल्कि संकट के समय जिम्मेदारी निभाना भी है।
विधा से संवाद
कहानी की पड़ताल
कहानी ऐसी रचना है जिसमें जीवन के किसी एक अंग या किसी एक मनोभाव को प्रदर्शित करना ही लेखक का उद्देश्य रहता है। उसके चरित्र, उसकी शैली, उसका कथा – विन्यास सभी उसी एक भाव को पुष्ट करते हैं।
कोई कहानी वास्तविक या काल्पनिक घटनाओं पर आधारित हो सकती है और इसमें वास्तविक या काल्पनिक पात्र भी शामिल हो सकते हैं। आप कहानी लेखन की इस प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए एक कहानी का शीर्षक चुनिए और दिए गए मुख्य बिंदुओं को पूरा कीजिए-
उत्तर:
शीर्षक – सेवा का सच्चा सम्मान
लेखक – विद्यार्थी स्वयं
विषय – परोपकार, सेवा और मानवीय संवेदना
क्रिया/कार्य – एक डॉक्टर महामारी के समय कई दिनों तक अस्पताल में रहकर रोगियों की सेवा करता है। जब वह अपने किराए के घर लौटता है, तो संक्रमण के भय से मकान-मालिक उसे प्रवेश देने से मना कर देता है। डॉक्टर इस व्यवहार से निराश हो जाता है। तभी पड़ोस के दो युवक आगे आते हैं और उसे अपने घर में रहने का आग्रह करते हैं। वे कहते हैं कि जो व्यक्ति दूसरों की जान बचाता है, उसे अकेला छोड़ना अमानवीय है।
परिवेश/देशकाल – महामारी का समय, जब भय के कारण सामाजिक संबंधों और मानवीय संवेदनाओं की परीक्षा हो रही थी।
मुख्य विचार – भय मनुष्य को स्वार्थी बना सकता है, लेकिन करुणा और साहस समाज में आशा बनाए रखते हैं।
चरित्र/पात्र – सेवाभावी डॉक्टर, भयभीत मकान-मालिक और संवेदनशील पड़ोसी युवक।
परिणाम – डॉक्टर को मकान-मालिक के व्यवहार से निराशा होती है, पर पड़ोसियों की मानवता देखकर उसका विश्वास फिर जाग उठता है। मकान-मालिक को भी अपनी गलती का एहसास होता है।
कहानी का सौंदर्य
प्रश्न 1. “दोनों सिर झुकाकर उसका हाथ चाटने लगे। दोनों की पूँछें खड़ी हो गई।”
इस वाक्य को पढ़कर आँखों के सामने एक दृश्य – सा बन जाता है। आप जानते हैं कि भाषा की इस विशेषता को चित्रात्मकता कहते हैं। ‘दो बैलों की कथा’ कहानी में ऐसी अनेक विशेषताएँ हैं जो इसे अद्भुत और प्रभावपूर्ण बनाती हैं।
नीचे इस कहानी में आए कुछ विशेष बिंदुओं को उदाहरण के साथ दिया गया है। आप भी एक-एक उदाहरण खोजकर तालिका में लिखिए-
उत्तर:
कहानी की विशेषता | उदाहरण |
चित्रात्मकता | “दोनों सिर झुकाकर उसका हाथ चाटने लगे। दोनों की पूँछें खड़ी हो गईं।” |
मानवीकरण | हीरा और मोती का मूक-भाषा में विचार करना और आपस में निर्णय लेना। |
संवाद शैली | “अब तो नहीं सहा जाता, हीरा!” |
भावात्मकता | हीरा और मोती का झूरी के घर लौटना तथा झूरी का उन्हें प्रेम से गले लगाना। |
हास्य-व्यंग्य | गधे और बैल के स्वभाव की तुलना करते हुए लेखक का व्यंग्यपूर्ण वर्णन। |
प्रतीकात्मकता | हीरा और मोती का अन्याय और पराधीनता के विरुद्ध संघर्ष करना। |
मुहावरेदार भाषा | “जान हथेली पर लेना”, “नौ-दो ग्यारह होना” और “दाँतों तले उँगली दबाना” जैसे प्रयोग। |
रोमांचक घटना | हीरा और मोती का विशाल साँड़ से योजनापूर्वक मुकाबला करना। |
कहानी की रचना
प्राय: कहानी के प्रारंभ में ही कहानी के मुख्य चरित्र, कहानी का समय, कहानी की भाषा, घटनाओं आदि के कुछ संकेत मिलने लगते हैं। प्रेमचंद की इस कहानी में भी ऐसे संकेत हैं। आप कहानी के ऐसे संकेत / बिंदुओं को ढूँढ़कर लिखिए।
उत्तर: कहानी के आरंभ में ही लेखक बैल और गधे के स्वभाव की चर्चा करके यह संकेत देता है कि कथा केवल पशुओं की नहीं, बल्कि मानवीय गुणों और सामाजिक परिस्थितियों की भी है। हीरा और मोती का परिचय उनके सीधेपन, परिश्रम, मित्रता और स्वामिभक्ति के माध्यम से दिया गया है।
अमेरिका, अफ्रीका और यूरोप के उदाहरणों से लेखक यह संकेत करता है कि किसी समुदाय को सम्मान उसकी शक्ति, साहस और संघर्षशीलता के आधार पर मिलता है। कहानी में पशुओं के माध्यम से पराधीन भारत की जनता की पीड़ा, आत्मसम्मान और स्वतंत्रता की इच्छा को व्यक्त किया गया है। प्रारंभिक संकेत ही कहानी के प्रतीकात्मक और सामाजिक उद्देश्य को स्पष्ट कर देते हैं।
विषयों से संवाद
कहानी का समय और समाज
‘दो बैलों की कथा’ कहानी जिस समय लिखी गई थी, उस समय भारत पर अंग्रेजों का दमनकारी शासन चल रहा था। उस समय भारतवासी भी अपने-अपने ढंग से इस अंग्रेजी शासन का विरोध कर रहे थे। इस कार्य में लेखक भी किसी से पीछे नहीं थे। वे अपनी रचनाओं के माध्यम से लोगों को स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने हेतु प्रेरित कर रहे थे।
इस कहानी में से कुछ वाक्य चुनकर नीचे दिए गए हैं। इन वाक्यों का मिलान स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े उपयुक्त वाक्यों के साथ कीजिए-
उत्तर:
कहानी में से वाक्य | स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ाव |
1. जोर तो मारता ही जाऊँगा, चाहे कितने ही बंधन पड़ते जाएँ। | 6. स्वतंत्रता सेनानी बार-बार जेल गए, फाँसी पर चढ़े, पर संघर्ष छोड़ने को तैयार नहीं हुए। |
2. मर जाऊँगा, पर उसके काम तो न आऊँगा। | 5. स्वतंत्रता के लिए प्राण देना स्वीकार्य था, पर अंग्रेजों की सेवा में लगना अस्वीकार्य। |
3. हमारी जान को कोई जान ही नहीं समझता। | 4. दासता के काल में भारतीयों के प्राण, सम्मान और अधिकारों की कोई महत्ता नहीं थी। |
4. दोनों मित्रों की आँखों में, रोम-रोम में विद्रोह भरा हुआ था। | 2. भारतीय जनता के मन में ब्रिटिश शासन के प्रति विद्रोह धीरे-धीरे गहराता गया। |
5. इतना तो हो ही गया कि नौ-दस प्राणियों की जान बच गई। वे सब तो आशीर्वाद देंगे। | 1. भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद जैसे क्रांतिकारियों ने बलिदान दिया, जिससे लाखों भारतीयों में आजादी की प्रेरणा जागी। |
6. साँड़ पूरा हाथी है… पर दोनों मित्र जान हथेलियों पर लेकर लपके। | 3. ब्रिटिश साम्राज्य बहुत शक्तिशाली था, फिर भी स्वतंत्रता सेनानियों ने साहसपूर्वक उसका सामना किया। |
सही मिलान:
1 → 6
2 → 5
3 → 4
4 → 2
5 → 1
6 → 3
पशुओं के लिए कानून
नीचे दिए गए संवाद पढ़िए और प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
“मैं तो समझता हूँ, चुराए लिए आते हो । चुपके से चले जाओ। मेरे बैल हैं। मैं बेचूँगा, तो बिकेंगे। किसी को मेरे बैल नीलाम करने का क्या अख़्तियार है!”
“जाकर थाने में रपट कर दूँगा।”
“मेरे बैल हैं। इसका सबूत यह है कि मेरे द्वार पर खड़े हैं।”
प्रश्न 1. बैलों का काँजीहाउस में बंद होना न्याय और अन्याय दोनों को दर्शाता है। कैसे?
उत्तर: बैलों का काँजीहाउस में बंद होना न्याय और अन्याय, दोनों पक्षों को सामने लाता है।
न्याय इस अर्थ में है कि आवारा और बेसहारा पशुओं को सड़कों पर भटकने, दुर्घटनाओं का शिकार होने और भूखे रहने से बचाने के लिए सुरक्षित आश्रय दिया जाना आवश्यक है। वहाँ उनके भोजन, पानी, उपचार और सुरक्षा की उचित व्यवस्था होनी चाहिए।
लेकिन जब काँजीहाउस में पशुओं को भूखा-प्यासा रखा जाए, उनके साथ क्रूरता की जाए या उन्हें केवल धन कमाने के उद्देश्य से नीलाम कर दिया जाए, तो यह स्पष्ट अन्याय है। आश्रय का उद्देश्य पशुओं की रक्षा होना चाहिए, न कि उनका शोषण।
प्रश्न 2. यदि आपको अवसर मिले तो आप बैलों की ओर से कौन-कौन से कानूनी अधिकार माँगेंगे?
उत्तर: मैं बैलों और अन्य पशुओं के लिए निम्नलिखित कानूनी अधिकारों की माँग करूँगा—
पर्याप्त भोजन और स्वच्छ पानी का अधिकार।
सुरक्षित तथा स्वच्छ आश्रय का अधिकार।
बीमारी या चोट की स्थिति में समय पर चिकित्सा का अधिकार।
मारपीट, अत्यधिक श्रम और क्रूर व्यवहार से सुरक्षा।
खुले स्थान में घूमने और आराम करने की उचित व्यवस्था।
पशुओं की खरीद-बिक्री और नीलामी में मानवीय नियमों का पालन।
वृद्ध और काम करने में असमर्थ पशुओं के संरक्षण की व्यवस्था।
पशु क्रूरता करने वालों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई।
प्रश्न 3. मान लीजिए कि हीरामोती अपने साथ हुए अन्याय की शिकायत करना चाहते हैं। उनकी ओर से उनकी शिकायत थानाध्यक्ष को करते हुए एक पत्र लिखिए। (संकेत- “थानाध्यक्ष महोदय, हमारा नाम… है। हमारे साथ अन्याय हुआ है… ।”)
उत्तर:
सेवा में,
थानाध्यक्ष महोदय,
स्थानीय पुलिस थाना
विषय – पशुओं के साथ हुए अन्याय के संबंध में शिकायत
महोदय,
हमारा नाम हीरा और मोती है। हम दो बैल हैं। हमारे साथ कई बार अमानवीय और अन्यायपूर्ण व्यवहार किया गया है। हमें जबरदस्ती बाँधा गया, डंडों से मारा गया, पर्याप्त भोजन और पानी नहीं दिया गया तथा बाद में काँजीहाउस में बंद कर दिया गया।
काँजीहाउस में हमारी स्थिति और भी दयनीय थी। वहाँ अनेक पशु भूखे-प्यासे पड़े थे। उनके उपचार और देखभाल की कोई उचित व्यवस्था नहीं थी। बाद में हमें नीलाम करने का भी प्रयास किया गया।
अतः आपसे निवेदन है कि हमारे साथ क्रूरता करने वालों के विरुद्ध उचित कार्रवाई की जाए। काँजीहाउस में पशुओं के भोजन, पानी, चिकित्सा और सुरक्षा की नियमित जाँच कराई जाए तथा किसी भी पशु को अनुचित तरीके से बेचने या प्रताड़ित करने से रोका जाए।
हमें आशा है कि आप हमारी शिकायत पर गंभीरता से विचार करेंगे और सभी पशुओं को सुरक्षित तथा सम्मानपूर्ण जीवन दिलाने में सहायता करेंगे।
धन्यवाद।
भवदीय
हीरा और मोती
दिनांक: 01-01-2027
हमारी धरोहर और संस्कृति
प्रश्न 1. “वह अपना धर्म छोड़ दे लेकिन हम अपना धर्म क्यों छोड़ें!”
कहानी के अनुसार हीरा और मोती सदैव ध्यान रखते थे कि कौन-से कार्य करने योग्य हैं और कौन-से नहीं। वे कौन-कौन से कार्य कभी नहीं करते थे?
उत्तर: हीरा और मोती अपने नैतिक सिद्धांतों का पालन करते थे। वे बिना कारण किसी पर हिंसा नहीं करते थे। पराजित या घायल शत्रु पर दोबारा आक्रमण करना उन्हें अनुचित लगता था। वे स्त्रियों पर सींग चलाने को भी गलत मानते थे।
वे प्रेम, मित्रता और अपनापन समझते थे। झूरी तथा छोटी लड़की के प्रति उनके मन में गहरा स्नेह था। वे अपने स्वार्थ के लिए किसी निर्दोष व्यक्ति को संकट में नहीं डालना चाहते थे। इस प्रकार उनका व्यवहार दया, मर्यादा और नैतिकता पर आधारित था।
प्रश्न 2. “गिरे हुए बैरी पर सींग न चलाना चाहिए।”
“लेकिन औरत जात पर सींग चलाना मना है, यह भूले जाते हो।”
हीरा के ये कथन किन भारतीय मूल्यों की ओर संकेत करते हैं?
उत्तर: हीरा के ये कथन क्षमा, दया, अहिंसा और नारी-सम्मान जैसे भारतीय मूल्यों की ओर संकेत करते हैं। भारतीय संस्कृति में पराजित या असहाय शत्रु पर प्रहार करना वीरता नहीं माना जाता। उसे जीवनदान देना और क्षमा करना उच्च नैतिकता का प्रतीक है।
इसी प्रकार स्त्रियों का सम्मान करना और उनके विरुद्ध हिंसा न करना भी भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण शिक्षा है। हीरा का व्यवहार संयम, करुणा और मर्यादा पर आधारित है।
प्रश्न 3. “दूसरे दिन गया ने बैलों को हल में जोता”
(क) खेतों में जुताई के लिए बैल और हल कृषि के पारंपरिक उपकरण हैं। कृषि के अन्य पारंपरिक और आधुनिक उपकरणों तथा उनके उपयोग के विषय में पता लगाइए और लिखिए।
ख) भारत में बैल केवल पशु नहीं बल्कि कृषि संस्कृति का अभिन्न अंग हैं। लिखिए कि भारतीय गाँवों एवं शहरों में भी बैल किस-किस काम में सहायक होते हैं?
उत्तर:
(क) कृषि के पारंपरिक और आधुनिक उपकरण
पारंपरिक उपकरणों में हल, कुदाल, खुरपी, हँसिया, बैलगाड़ी, सीड ड्रिल का पुराना रूप, रहट और कोल्हू शामिल हैं। हल से खेत की जुताई की जाती थी। हँसिए से फसल काटी जाती थी। कुदाल और खुरपी का उपयोग मिट्टी खोदने तथा खरपतवार हटाने में होता था। रहट से कुएँ का पानी खेतों तक पहुँचाया जाता था।
आधुनिक कृषि में ट्रैक्टर, पावर टिलर, हार्वेस्टर, थ्रेशर, सीड ड्रिल, स्प्रे मशीन, मोटर पंप और ड्रिप सिंचाई प्रणाली का प्रयोग होता है। ट्रैक्टर जुताई करता है, हार्वेस्टर फसल काटता है, थ्रेशर अनाज को भूसे से अलग करता है और आधुनिक सिंचाई उपकरण पानी की बचत करते हैं।
(ख) बैलों के उपयोग
भारतीय गाँवों में बैल लंबे समय से खेत जोतने, बैलगाड़ी खींचने, सामान ढोने, कुएँ से पानी निकालने और कोल्हू चलाने में सहायक रहे हैं। वे किसान के श्रम और आजीविका के महत्वपूर्ण साथी थे।
कई क्षेत्रों में आज भी बैलगाड़ियों का उपयोग स्थानीय परिवहन और कृषि उपज ले जाने के लिए किया जाता है। पशु मेलों, पारंपरिक उत्सवों और ग्रामीण प्रतियोगिताओं में भी बैलों का विशेष स्थान है। इस प्रकार बैल केवल श्रम करने वाले पशु नहीं, बल्कि भारतीय कृषि संस्कृति और ग्रामीण जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
अलग-अलग और साथ-साथ
“दो-चार बार मोती ने गाड़ी को सड़क की खाई में गिराना चाहा; पर हीरा ने संभाल लिया। वह ज्यादा सहनशील था।”
प्रश्न 1. कहानी के आधार पर हीरा और मोती की विशेषताएँ लिखिए।
(संकेत – धैर्यवान, गुस्सैल, मेहनती, शांत, सहनशील आदि)
उत्तर: हीरा शांत, धैर्यवान, सहनशील और समझदार बैल है। वह कठिन परिस्थितियों में भी संयम नहीं खोता। वह बिना कारण हिंसा नहीं करता, पराजित शत्रु पर आक्रमण नहीं करता और स्त्रियों के सम्मान का ध्यान रखता है। वह दूरदर्शी है और मोती को गलत कदम उठाने से रोकता है।
मोती साहसी, उग्र, स्वाभिमानी और अन्याय का तत्काल विरोध करने वाला बैल है। वह अत्याचार सहन नहीं कर पाता और क्रोधित होकर रस्सियाँ, जुआ या दीवार तक तोड़ने को तैयार हो जाता है। वह अपने मित्र हीरा के प्रति अत्यंत निष्ठावान है और संकट में उसे कभी अकेला नहीं छोड़ता।
प्रश्न 2. हीरा और मोती की विशेषताएँ कुछ-कुछ समान और कुछ-कुछ अलग हैं, किंतु उनकी भिन्न विशेषताएँ एक-दूसरे को पूरा करती हैं। कैसे?
उत्तर: हीरा और मोती दोनों मेहनती, निष्ठावान, स्वाभिमानी और साहसी हैं। दोनों के बीच गहरा प्रेम और मित्रता है। फिर भी उनके स्वभाव में अंतर है।
हीरा शांत, धीर और समझदार है। वह निर्णय लेने से पहले सोचता है और मोती को आवेश में गलत कार्य करने से रोकता है। दूसरी ओर, मोती साहसी और क्रांतिकारी स्वभाव का है। जब हीरा अत्यधिक सहनशील बन जाता है, तब मोती उसे अन्याय का विरोध करने और संघर्ष के लिए प्रेरित करता है।
इस प्रकार हीरा का संयम मोती के क्रोध को नियंत्रित करता है और मोती का साहस हीरा की अत्यधिक सहनशीलता को सक्रिय संघर्ष में बदलता है। दोनों मिलकर एक-दूसरे की कमियों को पूरा करते हैं।
प्रश्न 3. आपकी कक्षा में भी कुछ कुछ समान और कुछ-कुछ भिन्न विशेषताओं वाले सहपाठी हैं। सबकी आवश्यकताएँ भी थोड़ी समान और थोड़ी भिन्न हैं। बताइए कि आप भिन्न विशेषताओं वाले सहपाठी से अपने लिए कैसा व्यवहार चाहते हैं? उनसे पता कीजिए कि वे आपसे अपने लिए कैसा व्यवहार चाहते हैं?
(संकेत – क्या-क्या करें और क्या-क्या न करें, कैसे पढ़ाई, खेल आदि में एक-दूसरे की सहायता करें और साथ दें)
उत्तर: मैं चाहता हूँ कि मेरे सहपाठी मेरी विशेषताओं और कमियों को समझें। वे पढ़ाई में कठिन विषयों को समझाने में मेरी सहायता करें, खेलों में मुझे प्रोत्साहित करें और गलती होने पर अपमानित करने के बजाय शांति से समझाएँ। मैं यह भी चाहता हूँ कि वे मेरी व्यक्तिगत सीमाओं और विचारों का सम्मान करें।
मेरे सहपाठी मुझसे अपेक्षा करते हैं कि मैं उनकी बात ध्यान से सुनूँ, पढ़ाई के समय अनावश्यक बातचीत न करूँ, समूह कार्य में जिम्मेदारी निभाऊँ और किसी की कमजोरी का मजाक न उड़ाऊँ। हमें एक-दूसरे की अलग-अलग प्रतिभाओं को स्वीकार करते हुए सहयोग और सम्मान के साथ व्यवहार करना चाहिए।
प्रश्न 4. “दोनों आमने-सामने या आस-पास बैठे हुए एक- दूसरे से मूक- भाषा में विचार-विनिमय करते थे।”
कहानी में अनेक स्थानों पर ‘मूक- भाषा’ का उल्लेख किया गया है। आपके विचार से हीरा और मोती किस प्रकार आपस में बातें किया करते होंगे? अनुमान और कल्पना से बताइए।
उत्तर: हीरा और मोती अपनी आँखों, गर्दन, पूँछ, कानों, सींगों और शरीर की गतिविधियों से एक-दूसरे की भावनाएँ समझते होंगे। क्रोध में मोती सींग हिलाता, जमीन खुरचता या जोर से साँस छोड़ता होगा। हीरा शांत भाव से उसकी ओर देखकर या गर्दन हिलाकर उसे संयम रखने का संकेत देता होगा।
दुखी होने पर वे सिर झुका लेते होंगे और प्रसन्न होने पर पूँछ उठाकर एक-दूसरे को चाटते होंगे। संकट के समय उनकी आँखों और शरीर की मुद्रा से ही योजना और सहमति का संकेत मिल जाता होगा। यही उनकी मूक-भाषा थी।
प्रश्न 5. आप भी अनेक अवसरों पर बिना शब्दों का उच्चारण किए संवाद करते हैं। कब-कब? कहाँ-कहाँ? कुछ उदाहरण लिखिए।
उत्तर: हम प्रतिदिन अनेक अवसरों पर बिना बोले संवाद करते हैं। कक्षा में शिक्षक आँखों के संकेत से विद्यार्थी को शांत रहने के लिए कहते हैं। मित्र मुस्कराकर प्रसन्नता व्यक्त करते हैं या सिर हिलाकर सहमति और असहमति बताते हैं।
घर में माँ मेरे चेहरे को देखकर समझ जाती हैं कि मैं खुश हूँ, दुखी हूँ या परेशान हूँ। पिता का गले लगाना स्नेह व्यक्त करता है। खेल के मैदान में खिलाड़ी हाथ के इशारों से एक-दूसरे को पास देने या आगे बढ़ने का संकेत देते हैं। इस प्रकार चेहरे के भाव, हाथों के संकेत और शरीर की मुद्रा भी संवाद का माध्यम बनते हैं।
मार्ग खोजेंगे कैसे?
“सीधे दौड़ते चले गए। यहाँ तक कि मार्ग का ज्ञान न रहा । जिस परिचित मार्ग से आए थे, उसका यहाँ पता न था। नए-नए गाँव मिलने लगे।”
प्रश्न 1. हीरा-मोती अपने घर के मार्ग से भटक गए थे। क्या कभी आपके साथ ऐसा हुआ है कि आप रास्ता भूल गए या भटक गए? तब आपने अपने मार्ग का पता कैसे लगाया था?”
उत्तर: एक बार मैं परिवार के साथ किसी नए शहर में गया था। बाजार से लौटते समय मैं गलत मार्ग पर चला गया और कुछ देर बाद मुझे लगा कि आसपास की जगहें परिचित नहीं हैं। मैंने घबराने के बजाय एक सुरक्षित स्थान पर रुककर मोबाइल में ऑनलाइन मानचित्र खोला।
मानचित्र की सहायता से मैंने अपनी वर्तमान स्थिति और गंतव्य देखा। फिर पास की दुकान के मालिक से मार्ग की पुष्टि की और सही रास्ते से वापस पहुँच गया। इस अनुभव से मैंने सीखा कि रास्ता भटकने पर शांत रहना और विश्वसनीय सहायता लेना आवश्यक है।
प्रश्न 2. यदि कोई व्यक्ति भटक जाए तो उसे क्या करना चाहिए कि वह सुरक्षित रूप से अपने गंतव्य तक पहुँच जाए। कक्षा में चर्चा कीजिए और लिखिए।
(संकेत – ऑनलाइन मानचित्र, पुलिस, स्कूल, सरकारी भवन, विद्यार्थी, सड़क पर लगे सूचना-पट, दुकानों के बोडों पर लिखे पते, डाकघर आदि।)
उत्तर: यदि कोई व्यक्ति रास्ता भटक जाए, तो उसे घबराना नहीं चाहिए। सबसे पहले किसी सुरक्षित और भीड़भाड़ वाले स्थान पर रुकना चाहिए। ऑनलाइन मानचित्र से अपनी स्थिति और गंतव्य की दिशा देखी जा सकती है।
पुलिसकर्मी, सरकारी कर्मचारी, दुकानदार, डाकघर या विद्यालय से सहायता ली जा सकती है। सड़क पर लगे दिशा-सूचक बोर्ड और दुकानों पर लिखे पते भी उपयोगी होते हैं। किसी परिचित व्यक्ति को फोन करके अपनी स्थिति बतानी चाहिए। बच्चों को अजनबी व्यक्ति के साथ जाने के बजाय पुलिस या परिवार से संपर्क करना चाहिए।
प्रश्न 3. आपके विद्यालय में आपदा की स्थिति में निकासी का मार्ग दर्शाने वाला मानचित्र अवश्य होगा। उसे ध्यानपूर्वक देखिए और पता लगाइए कि आपदा की स्थिति में आपकी कक्षा के सबसे निकट और सुरक्षित कौन-सा मार्ग है।
उत्तर: विद्यार्थियों को अपने अध्यापक के साथ विद्यालय में लगे आपदा-निकासी मानचित्र का अध्ययन करना चाहिए। कक्षा से सबसे निकट आपातकालीन द्वार, सीढ़ियों और निर्धारित सभा-स्थल की पहचान करनी चाहिए।
आपदा के समय लिफ्ट का उपयोग नहीं करना चाहिए। बिना धक्का-मुक्की किए कतार में चलना चाहिए और शिक्षक के निर्देशों का पालन करते हुए निकटतम सुरक्षित मार्ग से खुले सभा-स्थल तक पहुँचना चाहिए।
सृजन
प्रश्न 1. हीरा और मोती की दैनंदिनी
कहानी में हीरा और मोती आपस में मनुष्यों की तरह बातें करते दिखते हैं। कल्पना कीजिए कि वे लिख-पढ़ भी सकते हैं। हीरा या मोती की नजर से उस दिन की डायरी लिखिए जब उन्हें काँजीहाउस ले जाया गया।
कैसे लिखें-
• “आज का दिन…” से आरंभ करें।
• भावनाएँ लिखें (भूख, गुस्सा, दर्द)।
• अंत में आशा या संकल्प लिखें।
(संकेत – “आज हमें कॉंजीहाउस में बंद किया गया। भूख से पेट जल रहा है। पर विश्वास है कि झूरी हमें वापस ले जाएगा।”)
उत्तर:
दिनांक: 10 जुलाई 2027
आज का दिन हमारे जीवन का अत्यंत कठिन दिन रहा। मटर के खेत में पकड़े जाने के बाद हमें बेरहमी से काँजीहाउस लाकर बाँध दिया गया। यहाँ चारों ओर भूखे, कमजोर और उदास पशु पड़े हैं। किसी के सामने चारा नहीं है और पानी की भी उचित व्यवस्था नहीं है।
भूख से पेट जल रहा है और शरीर थक चुका है। मोती क्रोध से भरा हुआ है, जबकि मैं उसे धैर्य रखने के लिए समझा रहा हूँ। फिर भी मन में यह प्रश्न उठता है कि क्या हमें इसी प्रकार अन्याय सहते रहना चाहिए।
मुझे विश्वास है कि झूरी हमें खोज रहा होगा। यदि वह यहाँ न भी पहुँच पाया, तो हम अपने साथ-साथ अन्य बंद पशुओं को भी मुक्त करने का प्रयास करेंगे। हमने निश्चय किया है कि अन्याय के सामने चुप नहीं बैठेंगे।
– हीरा
प्रश्न 2. आज के समाचार
मान लीजिए आप एक स्थानीय समाचार पत्र के संवाददाता हैं। अपने समाचार पत्र के लिए बैलों के काँजीहाउस से भागने का समाचार लिखिए।
कैसे लिखें-
• शीर्षक दें।
• घटना का विवरण (कहाँ, कब, क्या हुआ)।
• परिणाम और लोगों की प्रतिक्रिया।
(संकेत – शीर्षक ‘दो बहादुर बैलों ने तोड़ी बेड़ियाँ’)
उत्तर:
दो बहादुर बैलों ने तोड़ी काँजीहाउस की दीवार
स्थानीय काँजीहाउस में बीती रात हीरा और मोती नामक दो बैलों ने साहस दिखाते हुए मिट्टी की दीवार तोड़ दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार काँजीहाउस में कई पशु भूखे-प्यासे और अत्यंत कमजोर अवस्था में बंद थे।
हीरा और मोती ने बार-बार सींग मारकर दीवार को कमजोर किया। कुछ देर बाद दीवार का एक भाग गिर गया और घोड़े, भैंसें, बकरियाँ तथा अन्य पशु बाहर निकल गए। दोनों बैलों ने स्वयं संकट में रहते हुए भी अनेक पशुओं को मुक्त होने का अवसर दिया।
सुबह घटना की जानकारी मिलने पर काँजीहाउस के कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। स्थानीय लोगों ने पशुओं की खराब स्थिति पर नाराजगी व्यक्त की और काँजीहाउस की व्यवस्था की जाँच की माँग की। कई लोगों ने हीरा और मोती के साहस की प्रशंसा की।
प्रश्न 3. कहानी का नया अंत
यदि बैल वापस न लौटते तो कहानी का अंत कैसे होता? कहानी का नया अंत लिखिए।
कैसे लिखें-
• बैलों की नई जगह।
• झूरी की स्थिति।
(संकेत- “हीरा और मोती अब एक बूढ़े किसान के घर शांति से रह रहे हैं।”)
उत्तर: काँजीहाउस से निकलने के बाद हीरा और मोती रास्ता भटककर एक दूर गाँव पहुँच गए। थके और भूखे दोनों एक खेत के किनारे बैठ गए। उसी समय एक वृद्ध किसान वहाँ आया। उसने बैलों की हालत देखकर उन्हें पानी पिलाया और हरा चारा दिया।
वृद्ध किसान अकेला रहता था और उसके पास खेती के लिए कोई पशु नहीं था। उसने दोनों को अपने घर के खुले अहाते में स्थान दिया। हीरा और मोती ने उसके स्नेह को पहचान लिया और वहीं रहने लगे। किसान उनके साथ प्रेमपूर्वक व्यवहार करता और वे भी मन लगाकर खेतों में काम करते।
दूसरी ओर, झूरी दोनों बैलों के न लौटने से बहुत दुखी था। उसने उन्हें कई दिनों तक खोजा, पर उनका पता नहीं मिला। उसे केवल इस बात की सांत्वना थी कि जहाँ भी होंगे, साथ होंगे। समय के साथ हीरा और मोती ने वृद्ध किसान में झूरी जैसा अपनापन पा लिया और शांतिपूर्वक नया जीवन शुरू किया।
प्रश्न 4. चित्रकथा लेखन
नीचे ‘दो बैलों की कथा’ की एक घटना को चित्रकथा के रूप में दिया गया है। इन घटनाओं को पहचानिए । प्रत्येक घटना के लिए उपयुक्त संवाद और घटनाक्रम बताने वाले वाक्य लिखिए।
कैसे लिखें-
• हर चित्र के लिए एक छोटा संवाद बनाकर लिखिए।
• दृश्य का क्रम बंद करना, भागने की योजना दीवार तोड़ना, आजादी।
(संकेत – चित्र 4: “अब हम आजाद हैं।”)
उत्तर:
चित्र 1
घटना – हीरा और मोती काँजीहाउस में अन्य भूखे और कमजोर पशुओं के साथ बंद हैं।
संवाद:
हीरा – “मोती, यहाँ सभी पशु भूख से बेहाल हैं।”
मोती – “अब और चुप रहना संभव नहीं है।”
चित्र 2
घटना – दोनों काँजीहाउस से निकलने की योजना बना रहे हैं।
संवाद:
हीरा – “हमें ऐसा उपाय करना होगा जिससे सभी पशु बाहर निकल सकें।”
मोती – “हम मिलकर इस दीवार को तोड़ देंगे।”
चित्र 3
घटना – दोनों बैल सींग मारकर दीवार गिराने का प्रयास करते हैं। हीरा रस्सी में बँधा है।
संवाद:
हीरा – “तुम बाहर निकल जाओ, मैं बँधा हुआ हूँ।”
मोती – “मैं तुम्हें अकेला छोड़कर कभी नहीं जाऊँगा।”
चित्र 4
घटना – दीवार टूट जाती है और सभी पशु बाहर निकलने लगते हैं।
संवाद:
सभी पशु – “अब हम आजाद हैं!”
हीरा – “जल्दी बाहर निकलो, यह अवसर दोबारा नहीं मिलेगा।”
भाषा से संवाद
व्याकरण की बात
मेरे शब्द
प्रश्न 1. कहानी में से पाँच ऐसे शब्द चुनकर लिखिए जो आपके लिए बिल्कुल नए हैं। अब उन शब्दों के अर्थ अपने अनुमान से लिखिए। उसके बाद उनके अर्थ शब्दकोश में से देखकर लिखिए।
उत्तर:
शब्द | अनुमानित अर्थ | शब्दकोश के अनुसार अर्थ |
पगहिया | पशु को बाँधने की रस्सी | पशु के पैरों या गले में बाँधी जाने वाली रस्सी |
बेतहाशा | बहुत तेजी से | बिना नियंत्रण के, अत्यधिक तेजी से |
बूते | शक्ति | बल, सामर्थ्य या क्षमता |
उन्मत्त | बहुत उत्तेजित | नशे, क्रोध या आवेग में विवेक खो बैठा व्यक्ति |
अख्तियार | अधिकार | हक, अधिकार या नियंत्रण |
भाषा गढ़ते मुहावरे
“लोग आ आकर उनकी सूरत देखते और मन फीका करके चले जाते।”
‘मन फीका करना’ एक मुहावरा है जिसका अर्थ आपको वाक्य पढ़कर समझ में आ ही गया होगा। इसी से मिलते-जुलते मुहावरे हैं- जी फीका होना, जी खट्टा होना आदि । ‘दो बैलों की कथा’ कहानी में कई मुहावरे हैं जिनसे यह कहानी जीवंत हो गई है। ऐसी भाषा को ही मुहावरेदार भाषा कहा जाता है।
कहानी में से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं। इन वाक्यों में मुहावरों को पहचानकर रेखांकित कीजिए। इन मुहावरों का प्रयोग करते हुए नए वाक्य बनाकर लिखिए-
“झूरी के साले गया को घर तक गोईं ले जाने में दाँतों पसीना आ गया।”
“उसका चेहरा देखकर अंतर्ज्ञान से दोनों मित्रों के दिल काँप उठे।”
“झूरी की स्त्री ने बैलों को द्वार पर देखा, तो जल उठी।”
“मोती दिल में ऐंठकर रह गया।”
“आएगा तो दूर ही से खबर लूँगा। देखूं कैसे ले जाता है।”
“जी तोड़कर काम करते हैं, किसी से लड़ाई-झगड़ा नहीं करते, चार बातें सुनकर गम खा जाते हैं।”
“अगर वे भी ईंट का जवाब पत्थर से देना सीख जाते, तो शायद सभ्य कहलाने लगते।”
“तो फिर वहीं मरो। बंदा तो नौ दो ग्यारह होता है।”
उत्तर:
1. दाँतों पसीना आना – बहुत कठिनाई या परिश्रम होना।
वाक्य – पहाड़ी मार्ग पर भारी सामान ले जाते समय मजदूरों के दाँतों पसीना आ गया।
2. दिल काँप उठना – बहुत डर जाना।
वाक्य – अचानक आए तेज भूकंप से सभी का दिल काँप उठा।
3. जल उठना – ईर्ष्या या क्रोध से भर जाना।
वाक्य – मित्र की सफलता देखकर ईर्ष्यालु व्यक्ति जल उठा।
4. ऐंठकर रह जाना – क्रोध होने पर भी उसे प्रकट न कर पाना।
वाक्य – शिक्षक के सामने अपमानजनक बात सुनकर वह ऐंठकर रह गया।
5. खबर लेना – डाँटना या कठोर कार्रवाई करना।
वाक्य – नियम तोड़ने वाले विद्यार्थियों की प्रधानाचार्य ने खूब खबर ली।
6. जी तोड़कर काम करना – पूरी मेहनत और लगन से काम करना।
वाक्य – खिलाड़ियों ने प्रतियोगिता जीतने के लिए जी तोड़कर अभ्यास किया।
7. ईंट का जवाब पत्थर से देना – कठोर कार्रवाई से जवाब देना।
वाक्य – सैनिकों ने शत्रु के आक्रमण का ईंट का जवाब पत्थर से दिया।
8. नौ-दो ग्यारह होना – तुरंत भाग जाना।
वाक्य – पुलिस को देखते ही चोर नौ-दो ग्यारह हो गया।
गतिविधियाँ
नीचे दी गई गतिविधियाँ अपने समूह के साथ मिलकर कीजिए-
1. कविता (गीत) और अभिनंदन पत्र
“बाल सभा ने निश्चय किया, दोनों पशुवीरों को अभिनंदन-पत्र देना चाहिए।”
(क) मान लीजिए कि बाल सभा ने हीरा और मोती की प्रशंसा में एक गीत लिखा और गाया। अपनी कल्पना से वह गीत लिखिए।
उत्तर:
हीरा-मोती वीर हमारे,
सच्चे साथी प्यारे।
संकट आया साथ न छोड़ा,
बंधन सारे तोड़े।
हीरा धीरज का है सागर,
मोती साहस वाला।
मिलकर दोनों लड़ते ऐसे,
जैसे चमके ज्वाला।
दीन पशुओं की रक्षा करके,
सबको राह दिखाई।
मित्रता और स्वाभिमान की,
सुंदर सीख सिखाई।
स्वागत है हे वीर हमारे,
गाँव तुम्हारा गाए।
हीरा-मोती की यह जोड़ी,
युग-युग नाम कमाए।
(ख) हीरा और मोती के लिए ‘अभिनंदन-पत्र’ लिखिए।
उत्तर:
अभिनंदन-पत्र
प्रिय हीरा और मोती,
ग्राम बाल सभा की ओर से हम आप दोनों का हार्दिक अभिनंदन करते हैं। आपने अपनी मित्रता, स्वामिभक्ति, साहस और स्वाभिमान से सभी ग्रामवासियों को प्रेरित किया है।
आपने कठिन परिस्थितियों में भी एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ा। विशाल साँड़ का सामना किया, अत्याचार का विरोध किया और काँजीहाउस की दीवार तोड़कर अनेक असहाय पशुओं को स्वतंत्र कराया। आपका व्यवहार यह सिखाता है कि सच्ची मित्रता संकट के समय पहचानी जाती है।
आप दोनों केवल परिश्रमी पशु नहीं, बल्कि साहस, सहयोग और स्वतंत्रता के प्रतीक हैं। पूरा गाँव आपके लौटने पर प्रसन्न है और आपकी वीरता को नमन करता है।
ईश्वर से प्रार्थना है कि आप स्वस्थ, प्रसन्न और सुरक्षित रहें।
सादर
ग्राम बाल सभा
प्रश्न 2. बाल सभा में भाषण
मान लीजिए कि आपको बाल सभा ने हीरा मोती के लौटने के बाद भाषण देने के लिए बुलाया है। भाषण का विषय है- ‘पशुओं के अधिकार’ अपना भाषण लिखिए और कक्षा में प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर:
आदरणीय अध्यापकगण और मेरे प्रिय साथियो,
आज मैं ‘पशुओं के अधिकार’ विषय पर अपने विचार प्रस्तुत कर रहा हूँ। हीरा और मोती की कहानी हमें यह समझाती है कि पशुओं में भी प्रेम, पीड़ा, भय, मित्रता और स्वाभिमान जैसी भावनाएँ होती हैं। वे बोल नहीं सकते, पर इसका अर्थ यह नहीं कि उन्हें दर्द नहीं होता।
प्रत्येक पशु को भोजन, स्वच्छ पानी, सुरक्षित आश्रय और चिकित्सा का अधिकार मिलना चाहिए। उन्हें अनावश्यक रूप से मारना, भूखा रखना, अत्यधिक बोझ उठवाना या मनोरंजन के लिए प्रताड़ित करना गलत है। हमें घायल और बेसहारा पशुओं की सहायता करनी चाहिए तथा पशु क्रूरता की सूचना जिम्मेदार अधिकारियों को देनी चाहिए।
हीरा और मोती ने अन्याय का विरोध करके अनेक पशुओं को बचाया। उनका साहस हमें सिखाता है कि कमजोर और मूक प्राणियों की रक्षा करना हमारा नैतिक कर्तव्य है।
आइए, हम संकल्प लें कि पशुओं के साथ प्रेम, करुणा और जिम्मेदारी से व्यवहार करेंगे।
धन्यवाद।
प्रश्न 3. शीर्षक – इस कहानी के पाँच भाग हैं। कहानी के प्रत्येक भाग को अपने मन से उपयुक्त शीर्षक दीजिए।
उत्तर:
कहानी को निम्नलिखित पाँच भागों और शीर्षकों में बाँटा जा सकता है—
1. हीरा-मोती की मित्रता
इस भाग में दोनों बैलों के स्वभाव, परिश्रम, भाईचारे और झूरी के प्रति उनके प्रेम का परिचय मिलता है।
2. घर से बिछुड़ने का दुख
गया उन्हें अपने घर ले जाता है। दोनों स्वयं को बेचा हुआ समझते हैं और नए स्थान को स्वीकार नहीं कर पाते।
3. अत्याचार के विरुद्ध विद्रोह
गया की मारपीट और कठोर व्यवहार के कारण दोनों काम करने से इनकार करते हैं तथा बंधन तोड़कर भाग निकलते हैं।
4. संकट, संघर्ष और मुक्ति
दोनों साँड़ से मुकाबला करते हैं, मटर के खेत में पकड़े जाते हैं और काँजीहाउस पहुँचते हैं। वहाँ वे दीवार तोड़कर अन्य पशुओं को मुक्त करते हैं।
5. अपने घर की पहचान और वापसी
नीलामी के बाद रास्ते में वे झूरी के घर का मार्ग पहचान लेते हैं और वापस पहुँच जाते हैं। झूरी तथा उसकी पत्नी का स्नेह पाकर कहानी का सुखद अंत होता है।
मेरी पहेली
प्रश्न 1. अपने समूह के साथ मिलकर ऐसी पहेलियाँ बनाइए जिनके उत्तर निम्नलिखित हों-
हीरा, झूरी, मोती, गया, बैल, मटर, रस्सी, रोटी
उत्तर:
हीरा
शांत स्वभाव, धीरज वाला,
मित्र का सच्चा रखवाला।
अन्याय में भी समझ दिखाए,
बताओ वह कौन कहलाए?
उत्तर – हीरा
झूरी
दो पशुओं से प्रेम है गहरा,
देख उन्हें खिल जाए चेहरा।
मौन रहकर स्नेह जताए,
बताओ वह कौन कहलाए?
उत्तर – झूरी
मोती
क्रोधी भी है, वीर बड़ा,
अन्याय के आगे सदा खड़ा।
मित्र के लिए संकट मोल ले,
कौन है जो बंधन खोल दे?
उत्तर – मोती
गया
प्रेम की भाषा समझ न पाए,
डंडे से ही काम कराए।
बैल जिसे स्वीकार न करते,
नाम बताओ उसके झट से।
उत्तर – गया
बैल
खेत जोतते, गाड़ी खींचें,
मेहनत से कभी न पीछे खींचें।
किसान के साथी कहलाते,
बताओ कौन अनाज उगाते?
उत्तर – बैल
मटर
हरी फली में दाने गोल,
देख इन्हें सब जाएँ डोल।
हीरा-मोती खाकर फँसे,
बताओ किसके दाने हँसे?
उत्तर – मटर
रस्सी
गले या खूँटे से बाँधती,
आजादी का मार्ग रोकती।
तोड़ इसे दोनों घर आए,
बताओ वह क्या कहलाए?
उत्तर – रस्सी
रोटी
गोल-गोल मैं तवे पर सिकती,
भूखे की हर पीड़ा मिटती।
छोटी लड़की रोज खिलाती,
बताओ वह क्या कहलाती?
उत्तर – रोटी
Improve Your Preparation with Class 9 Hindi Chapter 1 Do Bailon Ki Katha
Vedantu’s NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 1 Do Bailon Ki Katha cover much more than the basic storyline. Students can study the character traits of Heera and Moti, understand the chapter’s symbolic connection with freedom and self-respect, and practise questions based on friendship, compassion, animal rights, Indian values and creative writing.
After reading the chapter from the NCERT textbook, students should attempt each question independently and then compare their responses with the solutions.
CBSE Class 9 Hindi Chapter 1 Other Study Materials
S.No | Important Links for Chapter 1 Class 9 Hindi |
1 | Class 9 Do Bailon Ki Katha Important Questions |
2 | Class 9 Do Bailon Ki Katha Revision Notes |
Chapter-Specific NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga
Given below are the chapter-wise NCERT Solutions for Class 9 Hindi. Go through these chapter-wise solutions to be thoroughly familiar with the concepts.
S.No | NCERT Solutions Class 9 Chapter-wise Hindi PDF |
1 | Chapter 2 - Kya Likhun? Solutions |
2 | Chapter 3 - Samvaadheen Solutions |
3 | Chapter 4 - Aisi Bhi Baatein Hoti Hein Solutions |
4 | Chapter 5 - Aakhri Chataan Tak Solutions |
5 | Chapter 6 - Reedh Ki Haddi Solutions |
6 | Chapter 7 - Main Aur Mera Desh Solutions |
7 | Chapter 8 - Pad Solutions |
8 | Chapter 9 - Ram-Lakshman-Parshuram-Sanvaad Solutions |
9 | Chapter 10 - Bharati Jay Vijaykare! Solutions |
10 | Chapter 11 - Jhansi Ki Rani Solutions |
11 | Chapter 12 - Ghar Ki Yaad Solutions |
Additional Study Materials for Class 9 Hindi
S.No | Important Study Material for Hindi Class 9 |
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FAQs on NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 1 Do Bailon Ki Katha
1. Where can I download NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 1 Do Bailon Ki Katha PDF?
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2. Who is the author of Do Bailon Ki Katha?
Do Bailon Ki Katha was written by Munshi Premchand. Through the story of Heera and Moti, the author presents important ideas about friendship, loyalty, freedom, courage and self-respect.
3. Who are the main characters in Class 9 Hindi Chapter 1 Do Bailon Ki Katha?
The main characters are Heera and Moti, two bullocks owned by Jhuri. Other important characters include Jhuri, Gaya, Jhuri’s wife and the little girl who shows kindness towards the bullocks.
4. What is the main theme of Do Bailon Ki Katha?
The main theme of Do Bailon Ki Katha is true friendship, unity, loyalty and resistance against injustice. The story also highlights freedom, dignity, compassion for animals and the importance of standing together during difficult situations.
5. Why did Heera and Moti refuse to accept their new home in Class 9 Hindi Ganga Chapter 1?
Heera and Moti believed that Jhuri had sold them. They felt hurt and could not find the same love and care at Gaya’s house. Therefore, they refused to work and tried to return to Jhuri’s home.
6. What qualities do Heera and Moti represent in the story from Class 9 Hindi Ganga Chapter 1?
Heera represents patience, wisdom, compassion and self-control, while Moti represents courage, anger against injustice and readiness to act. Together, they represent friendship, cooperation, loyalty and self-respect.
7. Why did Heera and Moti return to Jhuri from NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 1?
Heera and Moti returned because they were deeply attached to Jhuri and considered his house their true home. They wanted love, care and belonging rather than merely freedom from physical bondage.
8. How is Do Bailon Ki Katha connected with India’s freedom struggle?
Heera and Moti’s resistance to cruelty and bondage can be viewed as a symbol of the Indian people’s struggle against oppressive British rule. Their desire for freedom, dignity and justice reflects the spirit of the freedom movement.
9. What message does Do Bailon Ki Katha give to students?
The story teaches students to value friendship, unity, courage and compassion. It also conveys that animals have emotions and deserve kindness, respect and protection from cruelty.
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