NCERT Class 9 Hindi Ganga Chapter 4 ऐसी भी बातें होती हैं Questions with Solutions – FREE PDF
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NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 4 ऐसी भी बातें होती हैं
अभ्यास (पृष्ठ 74-82)
रचना से संवाद
मेरे उत्तर मेरे तर्क
निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं?
प्रश्न 1. लता जी ने अपने पिताजी से क्या-क्या सीखा?
(क) अनुशासन और नियम के साथ जीना
(ख) भय और संशय के साथ जीना
(ग) स्वाभिमान और सच्चाई के साथ जीना
(घ) चतुराई और संयम के साथ जीना
उत्तर: (ग) स्वाभिमान और सच्चाई के साथ जीना।
तर्क: लता जी के पिता पं. दीनानाथ मंगेशकर स्वयं सत्य, आत्मसम्मान और दृढ़ता के साथ जीवन जीते थे। उन्होंने अपने बच्चों को भी यही सीख दी कि जो बात सही लगे, उसका साहसपूर्वक पालन करना चाहिए और अनुचित दबाव के सामने नहीं झुकना चाहिए।
प्रश्न 2. पिताजी की मृत्यु के बाद परिवार सँभालने का लता जी का निर्णय किस जीवन मूल्य का द्योतक है?
(क) संघर्ष
(ख) निराशा
(ग) भौतिकता
(घ) कर्तव्यनिष्ठा
उत्तर: (घ) कर्तव्यनिष्ठा।
तर्क: पिता के निधन के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति कठिन हो गई थी। छोटी आयु में ही लता जी ने अपनी माँ और भाई-बहनों की जिम्मेदारी स्वीकार कर ली। उन्होंने कठिन परिश्रम करके परिवार की आवश्यकताओं को पूरा किया। यह उनके कर्तव्यबोध, त्याग और जिम्मेदार स्वभाव को दर्शाता है।
प्रश्न 3. “बिल्कुल ठेठ गँवई अंदाज में यह मंगलागौर का उत्सव मनाया जाता है…” ‘मंगलागौर’ के वर्णन से भारतीय समाज की कौन-सी परंपरा उजागर होती है?
(क) संगीत पर आधुनिकता का प्रभाव
(ख) लोकगीतों की लोकप्रियता में कमी
(ग) धार्मिक कार्यक्रमों में संगीत का महत्व
(घ) संगीत की महत्वपूर्ण सामाजिक भूमिका
उत्तर: (घ) संगीत की महत्वपूर्ण सामाजिक भूमिका।
तर्क: मंगलागौर जैसे लोकपर्वों में स्त्रियाँ सामूहिक रूप से गीत गाती, नृत्य करती और विभिन्न मनोरंजक प्रस्तुतियाँ देती थीं। इससे स्पष्ट होता है कि संगीत केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि लोगों को जोड़ने, उत्सव का आनंद बढ़ाने और सामाजिक संबंध मजबूत करने का माध्यम भी है।
प्रश्न 4. “गाव गेला वाहुन, नाव गेला राहुन”- इस कहावत का प्रतीकात्मक अर्थ क्या है?
(क) नाव गाँव में नहीं रहती, नदी में बहती है।
(ख) इस नश्वर संसार में सब कुछ नष्ट हो जाता है।
(ग) फिल्मों में गीत गाने से बहुत प्रसिद्धि मिलती है।
(घ) जीवन अस्थायी है, पर कर्म अमर रहते हैं।
उत्तर: (घ) जीवन अस्थायी है, पर कर्म अमर रहते हैं।
तर्क: मनुष्य का जीवन सीमित होता है, लेकिन उसके अच्छे कार्य, उपलब्धियाँ और समाज को दिया गया योगदान लंबे समय तक याद रखा जाता है। व्यक्ति संसार से चला जाता है, पर उसके श्रेष्ठ कर्म उसके नाम और पहचान को जीवित रखते हैं।
प्रश्न 5. कोरस में साथ गाने वाली लड़कियों के साथ लता जी के संबंध कैसे थे?
(क) औपचारिक
(ख) कामकाजी
(ग) आत्मीय
(घ) प्रतिस्पर्धात्मक
उत्तर: (ग) आत्मीय।
तर्क: लता जी कोरस में गाने वाली लड़कियों से केवल सहकर्मियों की तरह नहीं, बल्कि परिवार के सदस्यों की तरह व्यवहार करती थीं। वे उनके साथ जमीन पर बैठकर बातचीत करतीं और सभी को समान सम्मान देती थीं। इसी आत्मीयता के कारण वे लड़कियाँ लंबे समय तक उनके साथ जुड़ी रहीं।
प्रश्न 6. लता मंगेशकर के अनुसार बाबा हरिदास और तानसेन की कथाओं से क्या निष्कर्ष निकाला जा सकता है?
(क) संगीत द्वारा दीपक जलाए जा सकते हैं।
(ख) मेघराग गाने से वर्षा होने लगती है।
(ग) सुर में वाद्य बजाने से तार टूट जाते हैं।
(घ) संगीत में अपरिमित शक्ति होती है।
उत्तर: (घ) संगीत में अपरिमित शक्ति होती है।
तर्क: बाबा हरिदास और तानसेन से जुड़ी कथाएँ प्रतीकात्मक रूप में संगीत की असाधारण प्रभावशीलता को प्रकट करती हैं। लता जी ने स्वयं महान कलाकारों के गायन और वादन का गहरा प्रभाव अनुभव किया था। उनका मानना था कि सच्चे सुर श्रोता के मन, भावनाओं और वातावरण पर अत्यंत शक्तिशाली प्रभाव डाल सकते हैं।
प्रश्न 7. पूरे साक्षात्कार में लता मंगेशकर की जो छवि बनती है, वह मुख्यत: कैसी है?
(क) सादगी, समर्पण और आत्मसम्मान की
(ख) प्रसिद्धि, परिवार को समर्पित और आत्ममुग्ध
(ग) कठोर सिद्धांतवादी और व्यावहारिक व्यक्ति
(घ) आधुनिकता विरोधी रूढ़िवादी विचारों वाली
उत्तर: (क) सादगी, समर्पण और आत्मसम्मान की
तर्क: साक्षात्कार से लता जी का सरल, विनम्र, परिश्रमी और आत्मसम्मानी व्यक्तित्व सामने आता है। विश्वभर में प्रसिद्ध होने के बाद भी वे अपनी उपलब्धियों पर गर्व करने के बजाय परिवार, संगीत और श्रोताओं से मिले प्रेम को अधिक महत्त्व देती थीं। उनका जीवन निरंतर साधना और जिम्मेदारी का उदाहरण था।
मेरी समझ मेरे विचार
नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए-
प्रश्न 1.
“पिताजी उस समय पूछते थे, ‘समझ गए न ?’…. इसके बाद वे कहते थे कि ‘अच्छा अब जाओ, बाहर जाकर खेलो।” यह प्रसंग पारिवारिक अनुशासन और स्नेह के संतुलन का प्रतीक है। कैसे?
(संकेत – यहाँ अनुशासन में डर है या सम्मान?)
उत्तर: यह प्रसंग बताता है कि पं. दीनानाथ मंगेशकर बच्चों को कठोर दंड देकर नहीं, बल्कि अपने गंभीर और प्रभावशाली व्यवहार से अनुशासित करते थे। उनके “समझ गए न?” कहने भर से बच्चे अपनी गलती समझ जाते थे। इसके बाद वे उन्हें प्रेमपूर्वक खेलने भेज देते थे।
यह अनुशासन भय पर नहीं, बल्कि पिता के प्रति सम्मान और विश्वास पर आधारित था। बच्चों को पता था कि उनके पिता उनकी भलाई चाहते हैं। इस प्रकार उनके व्यवहार में अनुशासन की गंभीरता और पिता के स्नेह का सुंदर संतुलन था।
प्रश्न 2. लता मंगेशकर पर अपने पिताजी पं. दीनानाथ मंगेशकर के व्यक्तित्व का क्या प्रभाव पड़ा? उनके कौन-कौन से कार्यों और व्यवहार में उनके पिता का प्रभाव दिखाई देता है?
उत्तर: लता मंगेशकर के जीवन और व्यक्तित्व पर उनके पिता का गहरा प्रभाव था। उन्होंने अपने पिता से संगीत की प्रारंभिक शिक्षा के साथ सत्य, स्वाभिमान, अनुशासन और अपने कार्य के प्रति पूर्ण समर्पण सीखा।
पं. दीनानाथ मंगेशकर घंटों संगीत साधना और कार्य में लगे रहते थे। इसी प्रकार लता जी भी एक स्टूडियो से दूसरे स्टूडियो जाकर लगातार रिकॉर्डिंग करती थीं। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी कभी हार नहीं मानी और अपने परिवार की जिम्मेदारियाँ निभाईं। सही बात पर दृढ़ रहने, परिश्रम करने और किसी के आगे अनुचित रूप से न झुकने का उनका स्वभाव भी पिता से मिले संस्कारों का परिणाम था।
प्रश्न 3. “मैंने अपने पिताजी का नाम थोड़ा ही सही मगर, आगे बढ़ाया।” “नाम आगे बढ़ाने का लता जी के लिए क्या अर्थ है? क्या यह सिर्फ प्रसिद्धि पाना है या इससे कोई महत्वपूर्ण उत्तरदायित्व भी जुड़ा हुआ है?
उत्तर: लता जी के लिए पिता का नाम आगे बढ़ाने का अर्थ केवल लोकप्रियता या पुरस्कार प्राप्त करना नहीं था। इसका वास्तविक अर्थ था अपने पिता से मिली संगीत-परंपरा, आदर्शों और मूल्यों को ईमानदारी से आगे ले जाना।
उन्होंने संगीत को साधना मानकर जीवनभर परिश्रम किया। सत्य, आत्मसम्मान, अनुशासन और परिवार के प्रति जिम्मेदारी जैसे पिता के गुणों को भी अपने जीवन में अपनाया। अपनी श्रेष्ठ कला और आदर्श व्यवहार से उन्होंने पं. दीनानाथ मंगेशकर की विरासत को सम्मान दिलाया। इसलिए नाम आगे बढ़ाना उनके लिए प्रसिद्धि के साथ एक नैतिक और सांस्कृतिक उत्तरदायित्व भी था।
प्रश्न 4. किसी भी कार्य को पूरा करने में सहयोगियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। साक्षात्कार के आधार पर बताइए कि लता जी के अपने सहयोगियों के साथ संबंध कैसे थे?
उत्तर: लता जी अपने सहयोगियों के साथ सम्मानपूर्ण, सरल और आत्मीय व्यवहार करती थीं। वे अपने साथ काम करने वाले कलाकारों को छोटा या बड़ा नहीं मानती थीं। कोरस में गाने वाली लड़कियों के साथ वे जमीन पर बैठकर सहजता से बातचीत करती थीं और उन्हें अपने परिवार जैसा मानती थीं।
उनके व्यवहार में प्रतिस्पर्धा या अहंकार नहीं था। वे समझती थीं कि किसी गीत या रिकॉर्डिंग की सफलता के पीछे अनेक कलाकारों और तकनीकी सहयोगियों का योगदान होता है। उनकी इसी आत्मीयता और सहयोग की भावना के कारण लोग लंबे समय तक उनके साथ जुड़े रहे।
साक्षात्कार से उभरता व्यक्तित्व / उभरती छवि
साक्षात्कार से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन पंक्तियों से लता मंगेशकर के व्यक्तित्व के कौन-कौन से गुण या विशेषताएँ उभरकर सामने आती हैं? चुनकर लिखिए-
प्रश्न 1. “मुझे अपने गाने और रेकॉर्डिंग के अलावा किसी दूसरी चीज की सुध नहीं रहती थी।”
उत्तर: इस पंक्ति से लता जी की संगीत के प्रति गहरी एकाग्रता, समर्पण, परिश्रम और साधना का पता चलता है।
प्रश्न 2. “अगर कोई बात तुम्हें सही लगती है, तो उसे करो और किसी के आगे झुकने की जरूरत नहीं है।”
उत्तर: इस कथन से आत्मविश्वास, स्वाभिमान, साहस, दृढ़ निश्चय और सत्य के पक्ष में खड़े रहने का गुण प्रकट होता है।
प्रश्न 3. “आप जैसे लोग अगर यह मानते हैं कि मैं अमर हूँ, तो यह मुझे मिलने वाले उस प्यार जैसा ही है।”
उत्तर: इस पंक्ति से लता जी की विनम्रता, कृतज्ञता, सरलता और श्रोताओं के प्रेम के प्रति सम्मान प्रकट होता है।
प्रश्न 4. “मेरा गाना अमर है, पर शरीर तो अमर नहीं।”
उत्तर: इस कथन से लता जी की यथार्थवादी सोच, दार्शनिक दृष्टि, स्पष्टवादिता और जीवन की नश्वरता की समझ दिखाई देती है।
मेरे प्रश्न
नीचे दिए गए वाक्य को पढ़िए-
“संगीत में असीम शक्ति और अप्रत्याशित रचने की क्षमता होती है।”
इस वाक्य के आधार पर अनेक प्रश्न बनाए जा सकते हैं, जैसे-
लता मंगेशकर ने संगीत के विषय में क्या कहा?
लता मंगेशकर ने संगीत की क्या विशेषताएँ बताई हैं?
लता मंगेशकर ने संगीत की क्षमता का आकलन करते हुए क्या कहा?
उस्ताद अली अकबर खाँ और पंडित रविशंकर के कंसर्ट में हुई घटना से संगीत के बारे में क्या पता चलता है?
आपने देखा कि अनेक प्रश्नों का एक ही उत्तर हो सकता है और एक ही उत्तर से अनेक प्रश्न बनाए जा सकते हैं।
अब नीचे दिए गए उत्तरों से अधिक से अधिक प्रश्न बनाइए (कम से कम दो) –
उत्तर: ‘मंगलागौर’ जैसे लोक पर्वों में स्त्रियों के बीच गीत, नृत्य और सौहार्द का भाव झलकता था।
प्रश्न-
मंगलागौर उत्सव किस प्रकार मनाया जाता था?
मंगलागौर में स्त्रियाँ कौन-कौन सी गतिविधियाँ करती थीं?
लता मंगेशकर ने मंगलागौर के विषय में क्या बताया?
मंगलागौर जैसे लोकपर्व सामाजिक सौहार्द को कैसे बढ़ाते थे?
मंगलागौर उत्सव में संगीत और नृत्य की क्या भूमिका थी?
मंगलागौर को स्त्रियों का विशेष उत्सव क्यों माना जाता था?
उत्तरः लता जी का मानना था कि तकनीकी प्रगति के बावजूद पुराने संगीतकारों की सादगी और गहराई अद्वितीय थी।
प्रश्न-
पुराने संगीतकारों के विषय में लता जी के क्या विचार थे?
तकनीकी प्रगति के बाद भी पुराने संगीतकार विशेष क्यों माने जाते हैं?
लता जी पुराने और नए संगीत के बीच क्या अंतर अनुभव करती थीं?
पुराने संगीतकारों की कौन-सी विशेषताएँ लता जी को प्रभावित करती थीं?
आधुनिक तकनीक के संदर्भ में लता जी ने पुराने संगीत की क्या विशेषता बताई?
लता जी के अनुसार क्या तकनीक संगीत की सादगी और गहराई का स्थान ले सकती है?
मेरे अनुभव मेरे विचार
अपने अनुभवों के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
प्रश्न 1. “अगर कोई बात तुम्हें सही लगती है, तो उसे करो और किसी के आगे झुकने की जरूरत नहीं है।” क्या आप किसी ऐसी स्थिति से गुजरे हैं जब आपको किसी सही बात पर अकेले खड़ा होना पड़ा हो ? कब और क्यों?
उत्तर: एक बार मैं अपने मित्रों के साथ पहाड़ी क्षेत्र में घूमने गया था। अगले दिन हमने ट्रैकिंग की योजना बनाई थी, लेकिन मौसम विभाग ने भारी वर्षा और तूफान की चेतावनी दी। मैंने सभी को यात्रा स्थगित करने की सलाह दी, पर मेरे मित्र केवल ट्रैकिंग के उद्देश्य से आए थे और वे मेरी बात मानने के लिए तैयार नहीं थे।
मैंने सुरक्षा को प्राथमिकता दी और उनके साथ जाने से इनकार कर दिया। उस समय मैं अकेला पड़ गया, फिर भी मुझे विश्वास था कि मेरा निर्णय सही है। बाद में मेरे मित्र खराब मौसम के कारण रास्ते में फँस गए और उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। इस घटना से मैंने सीखा कि सही निर्णय लेते समय संख्या नहीं, बल्कि विवेक और साहस महत्त्वपूर्ण होते हैं।
प्रश्न 2. “बाबा ने जैसा सिखाया था, उस पर हम सभी भाई-बहनों ने चलने का प्रयास किया।”
आपके परिवार में भी कोई ऐसी सीख या नियम अवश्य होंगे जिनका पालन आप किसी के याद दिलाए बिना स्वतः करते होंगे, उनके विषय में बताइए।
उत्तर: मेरे परिवार में सत्य बोलने, समय का सम्मान करने और परिश्रम से कार्य पूरा करने की शिक्षा दी जाती है। मेरे पिताजी हमेशा कहते हैं कि परिस्थितियाँ सदैव एक जैसी नहीं रहतीं, इसलिए सफलता के साथ असफलता को स्वीकार करना भी सीखना चाहिए।
मैं विद्यालय का कार्य समय पर पूरा करता हूँ, किसी की वस्तु बिना अनुमति नहीं लेता और गलती होने पर उसे छिपाने के बजाय स्वीकार करता हूँ। घर के बड़े सदस्यों का सम्मान करना और जरूरतमंद की सहायता करना भी हमारे परिवार के महत्त्वपूर्ण नियम हैं। अब इन बातों के लिए मुझे किसी के याद दिलाने की आवश्यकता नहीं पड़ती, क्योंकि वे मेरे व्यवहार का स्वाभाविक हिस्सा बन चुकी हैं।
प्रश्न 3. “पहले दिन गुड़ि बाँधने के बाद नौ दिन तक उत्सव मनाया जाता है।”
आप भी अपने घर में किसी पारंपरिक पर्व को विशेष तरीके से मनाते होंगे। उसका वर्णन कीजिए।
उत्तर: हमारे घर में दशहरा पारंपरिक ढंग से मनाया जाता है। इस दिन सुबह घर और पूजा-स्थान की विशेष सफाई की जाती है। परिवार के सदस्य मिलकर पूजा की तैयारी करते हैं। नवरात्र के पहले दिन बोए गए जौ पूजा में रखे जाते हैं।
पूजा के समय घर के बच्चे अपनी पुस्तकें, कॉपियाँ और कलम लेकर बैठते हैं। बड़े सदस्य जौ को आशीर्वाद के रूप में बच्चों की पुस्तकों में रखते हैं और उन्हें शिक्षा तथा अच्छे आचरण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। इसके बाद सभी पूजा-स्थल की परिक्रमा करते हैं और प्रसाद ग्रहण करते हैं।
इस परंपरा से परिवार के सभी सदस्य एक साथ आते हैं और बच्चों में शिक्षा, संस्कृति तथा बड़ों के प्रति सम्मान की भावना विकसित होती है।
प्रश्न 4. “बिल्कुल ठेठ गँवई अंदाज में यह मंगलागौर का उत्सव मनाया जाता है, मगर आहिस्ता-आहिस्ता वह भी अब खत्म हो रहा है।” पाठ में आपने पढ़ा कि लता मंगेशकर के बचपन से अब तक उत्सवों से जुड़ी अनेक परंपराएँ बदल रही हैं। कौन-कौन-सी परंपराएँ बदल गई हैं? अपने घर-परिवार में बातचीत करके पता लगाइए कि विभिन्न त्योहारों को मनाने के तरीकों में कौन-कौन से बदलाव आ रहे हैं?
उत्तर: पहले त्योहार सामूहिकता, पारिवारिक मेल-जोल और घर में कई दिनों तक चलने वाली तैयारियों के साथ मनाए जाते थे। होली पर घर की महिलाएँ मिलकर गुजिया और अन्य पकवान बनाती थीं। दीपावली पर पूरा परिवार घर की सफाई, सजावट, दीये बनाने और मिठाइयाँ बाँटने में भाग लेता था। लोकगीत, पारंपरिक खेल और पड़ोसियों से मिलना त्योहारों का महत्त्वपूर्ण हिस्सा था।
अब व्यस्त जीवनशैली के कारण अधिकांश पकवान बाजार से खरीदे जाते हैं। शुभकामनाएँ व्यक्तिगत रूप से देने के बजाय मोबाइल संदेशों से भेजी जाती हैं। प्रदूषण और सुरक्षा के कारण पटाखों का प्रयोग कम हुआ है, जो एक सकारात्मक बदलाव है। सजावट भी पारंपरिक दीयों के स्थान पर आधुनिक बिजली की रोशनी से होने लगी है।
त्योहार आज भी मनाए जाते हैं, लेकिन उनमें पहले जैसी सामूहिक भागीदारी और लोकपरंपराएँ धीरे-धीरे कम होती जा रही हैं। हमें आधुनिकता के साथ पर्यावरण-अनुकूल और उपयोगी परंपराओं को बचाए रखना चाहिए।
विधा से संवाद
साक्षात्कार की पड़ताल
प्रश्न 1. ‘ऐसी भी बातें होती हैं’ एक साक्षात्कार है। साक्षात्कार में एक व्यक्ति प्रश्न पूछता है और दूसरा व्यक्ति उन प्रश्नों के उत्तर देता है। साक्षात्कार विधा के कुछ मुख्य बिंदु आगे दिए गए हैं। इस साक्षात्कार में से इन मुख्य बिंदुओं को रेखांकित करने वाली पंक्तियों को ढूँढ़कर लिखिए।
साक्षात्कार के मुख्य बिंदु |
साक्षात्कार लेने वाले का नाम और जिसका साक्षात्कार लिया गया, उसका नाम |
प्रश्नोत्तर |
भावनात्मक वातावरण |
आमंत्रण, स्वागत और परिचय |
उत्तर देने की शैली का संकेत |
विचार और उदाहरण |
संस्मरण |
समापन |
उत्तर: साक्षात्कार लेने वाले – यतींद्र मिश्र
साक्षात्कार देने वाली – लता मंगेशकर
प्रश्नोत्तर
उत्तर: यतींद्र मिश्र – “पिताजी से संगीत के अलावा आपने और क्या-क्या सीखा?”
लता मंगेशकर – “सबसे ज्यादा तो स्वाभिमान से जीने की बात सीखी।”
भावनात्मक वातावरण
उत्तर: “पिताजी की कंपनी जब तक अच्छी चलती थी, तो हम सब लोग बड़े शान से रहते थे। फिर पिताजी के निधन के बाद हमें यह भी देखना पड़ा कि बुरे हालात में कैसे जीना है?”
इस पंक्ति में पिता के निधन के बाद परिवार की कठिन परिस्थितियों और लता जी की भावनाओं का वर्णन है।
आमंत्रण, स्वागत और परिचय
उत्तर: “दीदी, आपके संगीत की अप्रतिम यात्रा पर बातचीत शुरू करते हैं।”
“आप पूछिए, मैं आपके प्रश्नों का जवाब देने के लिए तैयार हूँ।”
“मेरे पिताजी कमाल के आदमी थे, जिन्हें मैंने हमेशा अपने काम और संगीत में डूबा हुआ ही देखा।”
उत्तर देने की शैली का संकेत
उत्तर: “आप जैसे लोग अगर यह मानते हैं कि मैं अमर हूँ, तो यह मुझे मिलने वाले उस प्यार जैसा ही है, जो दुनिया ने मुझे दिया है।”
यह उत्तर उनकी विनम्र, आत्मीय और विचारपूर्ण शैली को दर्शाता है।
विचार और उदाहरण
उत्तर: “मेरा कोरस की लड़कियों के साथ अच्छा संबंध था, वे बिल्कुल मेरे घर जैसी थीं। अक्सर वहाँ स्टूडियो में ज्यादा कुर्सियाँ नहीं होती थीं। वे सब बड़े मजे से जमीन पर बैठती थीं और अक्सर मैं भी रिकॉर्डिंग में आकर वहीं जमीन पर बैठकर उन सभी के साथ बातें करती थी।”
संस्मरण
उत्तर: “आप सुनकर हैरान होंगे कि मैं ऐन दीवाली के दिन तड़के पाँच बजे ही नहा-धोकर बहुत सारे संगीतकारों के घर मिठाई लेकर पहुँच जाती थी।”
समापन
उत्तर: “हे प्रभु! तुमने जो भी दिया, वह बहुत दिया, दूसरों से कहीं ज्यादा दिया। अपनी कृपा की छाया से जैसे मुझे छाँह दी है, वैसे ही हर एक कलाकार और नेक इंसान के ऊपर भी रखना, यही प्रार्थना है।”
प्रश्न 2. “मैं कोशिश करूँगी कि जो कुछ भी मैंने संगीत में रहते हुए जाना है, उसे आपको बता सकूँ।”
इस कथन से साक्षात्कार की शैली के विषय में क्या पता चलता है- क्या यह औपचारिक संवाद है या आत्मीय बातचीत? अपने विचार तर्क सहित लिखिए।
उत्तर: यह साक्षात्कार व्यवस्थित प्रश्नोत्तर के रूप में प्रस्तुत है, लेकिन इसकी भाषा और भाव मुख्यतः आत्मीय बातचीत जैसे हैं। लता जी औपचारिक दूरी बनाकर उत्तर नहीं देतीं, बल्कि अपने जीवन के अनुभव, पारिवारिक स्मृतियाँ, संघर्ष और भावनाएँ सहजता से साझा करती हैं।
साक्षात्कारकर्ता भी सम्मानपूर्वक उन्हें “दीदी” कहकर संबोधित करता है। प्रश्न केवल प्रसिद्धि या उपलब्धियों से संबंधित नहीं हैं, बल्कि उनके परिवार, संस्कार, सहयोगियों और संगीत-साधना से भी जुड़े हैं। इसलिए इसे औपचारिक संरचना में प्रस्तुत एक सहज, आत्मीय और संवेदनशील बातचीत कहा जा सकता है।
आपका साक्षात्कार
“आप पूछिए, मैं आपके प्रश्नों का जवाब देने के लिए तैयार हूँ।”
प्रस्तुत पाठ में विश्व प्रसिद्ध व्यक्तित्व का साक्षात्कार दिया गया है। कल्पना कीजिए कि आप भी लता मंगेशकर के इस साक्षात्कार में उपस्थित हैं। आप लता जी से कौन-कौन से अलग प्रश्न पूछते और क्यों?
उत्तर: यदि मुझे लता मंगेशकर से प्रश्न पूछने का अवसर मिलता, तो मैं निम्नलिखित प्रश्न पूछता—
आपने हिंदी और मराठी के अतिरिक्त किन-किन भाषाओं में गीत गाए?
आपकी माताजी के व्यक्तित्व और संस्कारों का आपके जीवन पर क्या प्रभाव पड़ा?
कठिन परिस्थितियों में आपने अपनी आवाज और स्वास्थ्य की देखभाल कैसे की?
आपके द्वारा गाए गए गीतों में कौन-सा गीत आपके हृदय के सबसे निकट है और क्यों?
रिकॉर्डिंग के दौरान घटी कोई ऐसी घटना बताइए जिसे आप कभी नहीं भूल सकीं।
आपके भाई-बहनों के साथ बचपन और संगीत-यात्रा से जुड़ी कौन-सी स्मृतियाँ विशेष हैं?
नई पीढ़ी के गायकों को आप रियाज और सफलता के विषय में क्या सलाह देना चाहेंगी?
भारतीय संगीत में आए तकनीकी परिवर्तनों को आप किस प्रकार देखती हैं?
किसी गीत को भावपूर्ण बनाने के लिए गायक को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
प्रसिद्धि प्राप्त करने के बाद भी आपने अपनी सादगी कैसे बनाए रखी?
मैं ये प्रश्न इसलिए पूछना चाहूँगा ताकि उनके पारिवारिक संस्कार, संगीत-साधना, कार्यशैली और जीवन-दृष्टि को अधिक गहराई से समझा जा सके। उनके अनुभव संगीत सीखने वाले विद्यार्थियों और नई पीढ़ी के कलाकारों को प्रेरणा दे सकते हैं।
विषयों से संवाद
प्रश्न 1. “एक स्टूडियो से दूसरे और तीसरे स्टूडियो के चक्कर में ही पूरा दिन बीत जाता था।”
सन् 1942 में अपने पिता की मृत्यु के बाद लता मंगेशकर ने अकेले अपनी माँ, छोटे भाई-बहनों की देखभाल की और अपने घर को सँभाला। उस समय उनकी आयु मात्र 13 वर्ष थी। तब महिलाओं का फिल्मों में काम करना अच्छा नहीं माना जाता था। उस समय सुबह से रात तक एक स्टूडियो से दूसरे स्टूडियो भागते हुए लता जी के एक दिन की कल्पना कीजिए। इस भागदौड़ में वे किन-किन चुनौतियों का सामना करती होंगी?
(संकेत – भोजन, यात्रा – भाड़ा, सुरक्षा, थकान आदि)
उत्तर: पिता के निधन के बाद बहुत कम आयु में लता जी पर परिवार की जिम्मेदारी आ गई थी। उनका दिन संभवतः सुबह जल्दी उठकर रियाज करने और परिवार की आवश्यकताओं की व्यवस्था से शुरू होता होगा। इसके बाद वे किसी स्टूडियो में रिकॉर्डिंग या काम की तलाश में निकलती होंगी।
एक स्टूडियो से दूसरे स्टूडियो तक पहुँचने के लिए उन्हें सार्वजनिक परिवहन में यात्रा करनी पड़ती होगी। सीमित आय के कारण यात्रा-भाड़े और भोजन का खर्च भी सोच-समझकर करना पड़ता होगा। कई बार उन्हें समय पर भोजन और आराम नहीं मिलता होगा। लंबे समय तक खड़े रहने, प्रतीक्षा करने और लगातार गाने से शारीरिक थकान भी होती होगी।
कम आयु की लड़की होने के कारण उन्हें अपनी सुरक्षा, सामाजिक आलोचना और फिल्मों में काम करने को लेकर लोगों की संकीर्ण सोच का भी सामना करना पड़ा होगा। फिर भी उन्होंने परिवार की चिंता और संगीत के प्रति समर्पण के कारण सभी कठिनाइयों का साहसपूर्वक सामना किया।
प्रश्न 2. “पहले के दौर में पुरुष और स्त्री आवाज़ों के कोरस हम लोगों के गीतों के साथ ही रेकॉर्ड होते थे। भले ही वह गाना डुएट हो या फिर कोई सोलो सांग।”
अपने घर, आस-पड़ोस, समुदाय, विद्यालय में होने वाले उन कार्यों के विषय में बताइए जिसमें सहयोग और सामूहिकता की आवश्यकता होती है।
उत्तर: हमारे दैनिक जीवन के अनेक कार्य आपसी सहयोग और सामूहिकता से पूरे होते हैं।
घर में परिवार के सदस्य मिलकर सफाई, भोजन बनाने, खरीदारी, छोटे बच्चों की देखभाल और उत्सवों की तैयारी करते हैं। संकट या बीमारी के समय भी सभी सदस्य जिम्मेदारियाँ बाँटते हैं।
आस-पड़ोस में धार्मिक कार्यक्रम, स्वच्छता अभियान, विवाह समारोह, कीर्तन और किसी जरूरतमंद परिवार की सहायता जैसे कार्य सामूहिक सहयोग से किए जाते हैं।
समुदाय में स्वास्थ्य शिविर, वृक्षारोपण, सांस्कृतिक कार्यक्रम, मेले और जन-जागरूकता अभियान आयोजित करने के लिए अनेक लोगों की भागीदारी आवश्यक होती है।
विद्यालय में प्रार्थना सभा, खेल प्रतियोगिता, विज्ञान प्रदर्शनी, नाटक, समूह-परियोजना और वार्षिक समारोह शिक्षक तथा विद्यार्थियों के सहयोग से सफल होते हैं।
इस प्रकार सामूहिकता से कार्य आसान, व्यवस्थित और प्रभावशाली बनता है। सहयोग के बिना परिवार, विद्यालय और समाज का सुचारु रूप से चलना संभव नहीं है।
शास्त्रीय संगीत
प्रश्न 1. “फिर उसमें लंबी-लंबी रागदारी वाले गायन की भी परंपरा थी।”
रागदारी वाले गायन का अर्थ है- भारतीय शास्त्रीय संगीत।
आपने इस पाठ में संगीत से जुड़े अनेक शब्दों को पढ़ा है। शब्दकोश, इंटरनेट, पुस्तकालय और अपने शिक्षकों की सहायता से इनके अर्थ और उदाहरण खोजकर लिखिए-
उत्तर:
1. राग
अर्थ: स्वरों की ऐसी व्यवस्थित और मधुर रचना, जो किसी विशेष भाव, मनोदशा या वातावरण को प्रकट करती है। भारतीय शास्त्रीय संगीत में राग सामान्यतः पाँच से सात स्वरों के आधार पर बनाया जाता है।
उदाहरण: राग यमन, राग भैरव, राग भूपाली, राग दरबारी और राग खमाज।
2, सुर
अर्थ: संगीत में निश्चित ऊँचाई वाली मधुर ध्वनि को सुर या स्वर कहा जाता है। भारतीय संगीत के सात मुख्य स्वर हैं।
उदाहरण: सा, रे, ग, म, प, ध और नि।
3. बंदिश
अर्थ: किसी विशेष राग और ताल में बाँधी गई गायन-रचना को बंदिश कहते हैं। इसमें निश्चित शब्द, स्वर और लय होते हैं।
उदाहरण: राग यमन में तीनताल की बंदिश, राग भैरव में विलंबित खयाल और राग भूपाली में द्रुत खयाल।
4. अभंग
अर्थ: महाराष्ट्र की एक प्रसिद्ध भक्तिपरक काव्य और संगीत शैली, जिसमें भगवान विट्ठल की स्तुति की जाती है। ‘अभंग’ का अर्थ है—जो भंग या समाप्त न हो।
उदाहरण: संत तुकाराम और संत नामदेव द्वारा रचित विट्ठल-भक्ति के अभंग।
5. सोहर
अर्थ: उत्तर भारत, विशेष रूप से उत्तर प्रदेश और बिहार में बच्चे के जन्म के अवसर पर गाया जाने वाला पारंपरिक मंगल गीत।
उदाहरण: घर में शिशु के जन्म पर परिवार की महिलाएँ सामूहिक रूप से सोहर गाती हैं।
6. फाग
अर्थ: फाल्गुन महीने और होली के अवसर पर गाए जाने वाले उल्लासपूर्ण लोकगीतों को फाग कहा जाता है।
उदाहरण: होली के समय गाँवों में ढोलक और मंजीरे के साथ गाए जाने वाले फाग गीत।
7. बधावा
अर्थ: जन्म, विवाह या किसी अन्य शुभ अवसर पर प्रसन्नता और शुभकामना व्यक्त करने के लिए गाया जाने वाला मांगलिक गीत।
उदाहरण: विवाह में वर-वधू के स्वागत, बच्चे के जन्म और गृह-प्रवेश के समय गाए जाने वाले बधावा गीत।
प्रश्न 2. “त्योहारों के संदर्भ में एक बात और ध्यान में आती है कि अधिकांश प्रदेशों में पर्वों व अनुष्ठानों से संदर्भित घर-घर गीत गाए जाने का प्रचलन रहा है।” आपने पढ़ा कि भारत में त्योहारों पर फाग, धमार, सोहर, बधावा, छठ के गीत आदि गाने की परंपरा है। अपने क्षेत्र में गाए जाने वाले ऐसे गीतों के विषय में अपने घर में पता कीजिए और एक गीत अपनी लेखन – पुस्तिका में लिखिए।
उत्तर: हमारे क्षेत्र में विवाह के अवसर पर भात, बन्ना-बन्नी और बधावा गीत गाने की परंपरा है। जब मामा अपनी बहन के घर भात लेकर आते हैं, तब परिवार की महिलाएँ उनका स्वागत करती हैं और ढोलक की थाप पर गीत गाती हैं। इन गीतों में प्रेम, हास्य, अपनापन और पारिवारिक संबंधों की मधुरता दिखाई देती है।
भात गीत का एक उदाहरण:
भात लेकर आए भैया,
घर में खुशियाँ छाई हैं।
मंगल गीत सुनाती बहनें,
शुभ घड़ी अब आई है।
माँग सजाओ, दीप जलाओ,
आँगन फूल बिछाए हैं।
भैया के आने की खुशी में,
सबने गीत सुनाए हैं।
साइबर सुरक्षा
प्रश्न 1. “आज, जो स्थिति है और जिस तरह हमारी तकनीक विकसित हो चुकी है, उसमें अगर इन लोगों को काम करने का मौका मिलता, तब तो कमाल ही हो गया होता।”
आज तकनीकी विकास इतना अधिक हो चुका कि अनेक धोखेबाज / ठग कृत्रिम बुद्धिमत्ता का प्रयोग करके अपनी आवाज़ बदलकर लोगों के साथ धोखाधड़ी करते हैं। कक्षा में चर्चा कीजिए और बताइए कि साइबर सुरक्षा नियमों का प्रयोग करते हुए इस प्रकार की धोखाधड़ी से किस प्रकार बचा जा सकता है?
https://cybercrime.gov.in/UploadMedia/CyberSafety Hindi.Pdf
उत्तर: कृत्रिम बुद्धिमत्ता की सहायता से अपराधी किसी परिचित व्यक्ति की आवाज की नकल करके पैसे, बैंक की जानकारी या ओटीपी माँग सकते हैं। ऐसी धोखाधड़ी से बचने के लिए सावधानी और पहचान की पुष्टि आवश्यक है।
बचाव के उपाय:
किसी परिचित की आवाज में अचानक पैसे माँगे जाने पर तुरंत विश्वास न करें।
फोन काटकर उस व्यक्ति के पहले से सुरक्षित नंबर पर स्वयं कॉल करके पुष्टि करें।
परिवार के सदस्यों के बीच कोई गुप्त शब्द या प्रश्न तय किया जा सकता है, जिससे आपातकालीन कॉल की सच्चाई जाँची जा सके।
ओटीपी, यूपीआई पिन, बैंक पासवर्ड, सीवीवी या आधार से जुड़ी जानकारी किसी को न दें।
अनजान लिंक पर क्लिक न करें और किसी के कहने पर स्क्रीन-शेयरिंग ऐप डाउनलोड न करें।
बैंक, ईमेल और सोशल मीडिया खातों में मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन सक्रिय रखें।
मोबाइल, कंप्यूटर और सुरक्षा सॉफ्टवेयर को नियमित रूप से अपडेट करें।
संदिग्ध कॉल, नंबर, संदेश और लेन-देन के स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखें।
धोखाधड़ी होने पर तुरंत बैंक को सूचना दें और राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल या हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें।
सावधानी, पहचान की पुष्टि और व्यक्तिगत जानकारी को सुरक्षित रखकर एआई आधारित धोखाधड़ी से बचा जा सकता है।
हम ऐसे भी बोलते हैं
“वे बस हमको गंभीरता से देखते थे… मगर हम सभी समझ जाते थे कि हमको बुलाया किसलिए गया है।”
प्रश्न 1. क्या आपके जीवन में भी कोई ऐसा व्यक्ति है जो बिना कुछ बोले सिर्फ नजरों या संकेतों (हाव-भाव) से ही आपको समझा देता है? उस अनुभव के विषय में बताइए।
उत्तर: हाँ, मेरे पिताजी बिना कुछ बोले केवल अपने चेहरे के भाव और आँखों के संकेत से हमें बहुत कुछ समझा देते हैं। जब हम पढ़ाई के समय शरारत करते हैं, तो वे हमें डाँटने के बजाय गंभीरता से देखते हैं और हाथ से पुस्तक खोलने का संकेत करते हैं।
हम तुरंत समझ जाते हैं कि अब शांत होकर पढ़ाई करनी चाहिए। उनके इस व्यवहार में क्रोध से अधिक अनुशासन और प्रेम होता है। इससे हमें अपनी गलती स्वयं समझने का अवसर मिलता है।
प्रश्न 2. यदि कोई व्यक्ति बिना बोले (संकेत भाषा) आपको कुछ समझा रहा है, तो वह आपके साथ और आप उसके साथ कैसा व्यवहार करेंगे?
(संकेत – धैर्य, जिज्ञासा, समानुभूति आदि)
उत्तर: यदि कोई व्यक्ति संकेतों के माध्यम से अपनी बात समझा रहा हो, तो मैं धैर्यपूर्वक उसकी ओर ध्यान दूँगा। उसके चेहरे के भाव, हाथों के संकेत और शरीर की गतिविधियों को समझने का प्रयास करूँगा।
यदि उसकी बात स्पष्ट न हो, तो मैं विनम्रता से दोबारा संकेत करने या लिखकर बताने के लिए कहूँगा। उसके साथ दया दिखाने के बजाय समानता, सम्मान और समानुभूति का व्यवहार करना चाहिए। हमें उसे यह महसूस कराना चाहिए कि उसकी बात हमारे लिए महत्त्वपूर्ण है और हम उसे समझने का पूरा प्रयास कर रहे हैं।
सृजन
प्रश्न 1. “अगर हम समय के चक्र (टाइम मशीन) को घुमाकर सन् 1949-50 में ले जाएँ”, कल्पना कीजिए कि आपके पास टाइम मशीन है। 1940-50 के दशक में जाकर लता जी से मिलिए और उनके साथ बिताए गए एक दिन का वर्णन डायरी के रूप में लिखिए। उस समय की वेशभूषा, भोजन, संगीत आदि का वर्णन अवश्य कीजिए।
उत्तर:
डायरी लेखन
दिनांक – 15 अप्रैल, 1950
दिन – शनिवार
समय – रात्रि 9 बजे
आज का दिन मेरे जीवन का सबसे अद्भुत दिन रहा। टाइम मशीन की सहायता से मैं सन् 1950 में पहुँच गया और मुझे लता मंगेशकर जी से मिलने का अवसर मिला।
लता जी बहुत सादे वस्त्रों में थीं। उन्होंने हल्के बॉर्डर वाली सूती साड़ी पहनी थी। उनके व्यक्तित्व में विनम्रता और गंभीरता दिखाई दे रही थी। सुबह उन्होंने नियमित रियाज किया। इसके बाद वे रिकॉर्डिंग के लिए स्टूडियो पहुँचीं। उस समय आधुनिक डिजिटल उपकरण नहीं थे। सभी गायक और वादक एक साथ बैठकर रिकॉर्डिंग करते थे। थोड़ी-सी गलती होने पर पूरे गीत को फिर से गाना पड़ता था।
दोपहर में उन्होंने दाल, चावल, सब्जी और रोटी जैसा सादा भोजन किया। काम की व्यस्तता के कारण उन्हें आराम का बहुत कम समय मिला। शाम को उन्होंने मुझे अपने पिता से मिली संगीत-शिक्षा, परिवार की जिम्मेदारियों और कठिन संघर्षों के बारे में बताया।
उस समय बाजारों में लोग साधारण धोती-कुर्ता, पाजामा, साड़ी और सलवार-कमीज पहने दिखाई देते थे। सड़कों पर आधुनिक वाहन कम थे और वातावरण आज की तुलना में शांत था।
लता जी के साथ बिताया गया यह दिन मुझे सादगी, कठिन परिश्रम और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पण की सीख दे गया। उनकी स्मृतियों को मन में सँजोकर मैं टाइम मशीन से अपने समय में वापस लौट आया।
प्रश्न 2. “आप जैसे लोग अगर यह मानते हैं कि मैं अमर हूँ, तो यह मुझे मिलने वाले उस प्यार जैसा ही है।”
कल्पना कीजिए कि यह लता जी का अंतिम संदेश है- आप उस पर अपनी भावनात्मक प्रतिक्रिया एक अनुच्छेद के रूप में व्यक्त कीजिए।
उत्तर: लता मंगेशकर जी का यह संदेश उनकी विनम्रता और श्रोताओं के प्रति कृतज्ञता को व्यक्त करता है। वे मानती थीं कि मनुष्य का शरीर नश्वर है, लेकिन उसकी कला और अच्छे कर्म लंबे समय तक जीवित रहते हैं। लता जी आज हमारे बीच शारीरिक रूप से उपस्थित नहीं हैं, फिर भी उनकी मधुर आवाज और हजारों गीत लोगों के हृदय में बसे हुए हैं। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में परिवार की जिम्मेदारी निभाई और अपना पूरा जीवन संगीत को समर्पित कर दिया। विश्वभर में सम्मान और प्रसिद्धि मिलने के बाद भी उन्होंने इसे अपनी महानता नहीं, बल्कि श्रोताओं का प्रेम माना। उनके गीत आने वाली पीढ़ियों को भी आनंद और प्रेरणा देते रहेंगे। इसी अर्थ में उनकी कला ने उन्हें वास्तव में अमर बना दिया है।
भाषा से संवाद
व्याकरण की बात
मुहावरे
“मगर किसी के आगे जाकर हाथ नहीं पसारना है।”
उपर्युक्त वाक्य में रेखांकित अंश मुहावरा है। हाथ पसारना या फैलाना का अर्थ है- कुछ माँगना या याचना करना। हाथों से जुड़े अनेक मुहावरे आपने पढ़े और सुने होंगे। ऐसे ही कुछ मुहावरे नीचे दिए गए हैं। इनका प्रयोग करते हुए वाक्य बनाइए-
हाथ में आना
हाथ का मैल होना
हाथ से हाथ मिलाना
हाथ साफ करना
हाथ से निकल जाना
हाथ धो बैठना
उत्तर:
हाथ में आना
अर्थ – प्राप्त होना या नियंत्रण में आना।
वाक्य – कई दिनों की खोज के बाद चोरी का सामान पुलिस के हाथ में आ गया।
हाथ का मैल होना
अर्थ – धन को अधिक महत्त्व न देना या उसे आसानी से खर्च होने वाली वस्तु समझना।
वाक्य – समझदार व्यक्ति के लिए धन हाथ का मैल है, अच्छे संबंध अधिक मूल्यवान होते हैं।
हाथ से हाथ मिलाना
अर्थ – सहयोग करना या साथ मिलकर कार्य करना।
वाक्य – पर्यावरण की रक्षा के लिए सभी विद्यार्थियों ने हाथ से हाथ मिलाया।
हाथ साफ करना
अर्थ – चोरी करना या किसी वस्तु को चुपके से ले लेना।
वाक्य – भीड़ का लाभ उठाकर चोर ने एक यात्री के मोबाइल पर हाथ साफ कर दिया।
हाथ से निकल जाना
अर्थ – अवसर या स्थिति का नियंत्रण से बाहर हो जाना।
वाक्य – समय पर तैयारी न करने से प्रतियोगिता में भाग लेने का अवसर उसके हाथ से निकल गया।
हाथ धो बैठना
अर्थ – किसी वस्तु, पद या अवसर को पूरी तरह खो देना।
वाक्य – लगातार लापरवाही के कारण वह अपनी नौकरी से हाथ धो बैठा।
हमारी भाषाएँ
प्रश्न 1. “’गाव गेला वाहुन, नाव गेला राहुन’। मतलब गाँव तो बह जाता है, लेकिन जो नाम है, वह रह जाता है।” आपने एक कहावत और उसका हिंदी में अर्थ पढ़ा। इस कहावत के अर्थ को अपने घर या क्षेत्र की भाषा अथवा भाषाओं में लिखिए।
उत्तर: इस कहावत का भाव है कि संसार की वस्तुएँ और मनुष्य एक दिन समाप्त हो जाते हैं, लेकिन उनके अच्छे कार्य और नाम लोगों की स्मृतियों में बने रहते हैं।
पंजाबी:
“पिंड वग गया, पर नाँ रह गया।”
भोजपुरी:
“गाँव बह गइल, बाकिर नाव रह गइल।”
गढ़वाली:
“गौं बगि ग्ये, पर नौं रै ग्ये।”
इन सभी वाक्यों का भाव यही है कि व्यक्ति या स्थान नष्ट हो सकता है, पर अच्छे कर्मों से कमाया गया नाम जीवित रहता है।
प्रश्न 2. लता जी ने मराठी कहावत को हिंदी में समझाया। अब आप अपनी मातृभाषा की कोई कहावत चुनिए और उसका हिंदी में अनुवाद कीजिए । अनुवाद के बाद भाव में क्या परिवर्तन आया? लिखिए।
उत्तर:
पंजाबी कहावत:
“जेहा बीजोगे, ओहा ही वढोगे।”
हिंदी अनुवाद:
“जैसा बोओगे, वैसा ही काटोगे।”
भावार्थ:
मनुष्य जैसे कर्म करता है, उसे वैसा ही परिणाम प्राप्त होता है। अच्छे कर्मों का अच्छा और बुरे कर्मों का बुरा फल मिलता है।
अनुवाद करने पर कहावत का मूल भाव नहीं बदला, लेकिन पंजाबी भाषा की स्थानीय मिठास और बोलचाल का प्रभाव हिंदी में कुछ कम हो गया। हिंदी रूप अधिक सामान्य और सभी के लिए आसानी से समझने योग्य बन गया।
प्रश्न 3. एक ‘सेतु चित्र’ बनाइए जिसमें दो – किनारे हों एक किनारे पर हिंदी और दूसरे किनारे पर अपने घर या क्षेत्र की भाषा। दोनों किनारों के बीच में ऐसे शब्द लिखिए जो दोनों भाषाओं में समान अर्थ रखते हैं।
उत्तर:
गतिविधियाँ
प्रश्न 1. ‘नाम रह जाएगा’ वाक्य के लिए एक सुंदर पोस्टर बनाइए। इसके ऊपर ‘नाम रह जाता है..’ लिखिए और नीचे विभिन्न भारतीय भाषाओं में ‘नाम’ शब्द (जैसे- नाव, नालो, नांउ, नाउँ, मिङ, पेरु, नामम् आदि) लिखिए। साथ ही कक्षा में सब विद्यार्थी मिलकर एक प्रतिज्ञा लें- ‘हम हर भाषा का सम्मान करेंगे।’
उत्तर:
पोस्टर
नाम रह जाता है...
शरीर नश्वर है,
पर अच्छे कर्म अमर हैं।
नाम – हिंदी
नाव – मराठी
नाँ – पंजाबी
नांउ – असमिया
नाउँ – नेपाली
पेरु – तेलुगु
नामम् – मलयालम
मिङ – मणिपुरी
हमारी प्रतिज्ञा:
“हम भारत की सभी भाषाओं और बोलियों का सम्मान करेंगे। हम किसी भाषा को छोटा या बड़ा नहीं मानेंगे और भाषाई विविधता को अपनी सांस्कृतिक शक्ति समझेंगे।”
प्रश्न 2. कागज पर एक पेड़ का चित्र बनाइए। इसे नाम दीजिए- भाषा – वृक्ष। इसकी जड़ में लिखिए- ‘भारतीय संस्कृति’; तने पर और शाखाओं पर लिखिए- हिंदी, मराठी, तमिल, बांग्ला, गुजराती आदि। हर शाखा पर उस भाषा का एक प्यारा शब्द जोड़िए।
उत्तर:
भाषा-वृक्ष
जड़:
भारतीय संस्कृति
तना:
भारतीय भाषाएँ
शाखाएँ और शब्द:
हिंदी – प्रेम
मराठी – आनंद
तमिल – नन्द्री
बांग्ला – भालोबाशा
गुजराती – आवजो
पंजाबी – सत श्री अकाल
तेलुगु – नमस्कारम्
मलयालम – स्नेहम्
कन्नड़ – नमस्कारा
असमिया – मोरम
इस भाषा-वृक्ष से यह संदेश मिलता है कि भारत की सभी भाषाएँ एक ही संस्कृति की जड़ों से जुड़ी हुई हैं।
प्रश्न 3. समूह में मिलकर किसी विषय पर एक छोटा समाचार बुलेटिन तैयार कीजिए जिसमें हिंदी, अंग्रेजी और किसी क्षेत्रीय भाषा का प्रयोग हो। उदाहरण के लिए, एक विषय हो सकता है- ‘कला जो जोड़ती है, बाँटती नहीं।’
उत्तर:
समाचार बुलेटिन
नमस्कार! आज की विशेष खबर कला और संस्कृति से जुड़ी है।
विषय है—“कला जो जोड़ती है, बाँटती नहीं।”
आज हमारे नगर में एक बहुभाषी सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। विभिन्न राज्यों से आए कलाकारों ने संगीत, चित्रकला, नृत्य और नाटक के माध्यम से राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया।
One of the artists said, “Art connects people beyond language and borders.”
पंजाब से आए एक कलाकार ने कहा—
“कला दिलां नूँ जोड़दी ऐ, वंडदी नहीं।”
अर्थात कला लोगों के दिलों को जोड़ती है, उन्हें अलग नहीं करती।
कार्यक्रम में यह स्पष्ट दिखाई दिया कि कलाकारों की भाषाएँ अलग थीं, लेकिन उनकी भावनाएँ और संदेश एक थे।
आज की मुख्य सीख है—कला प्रेम, सहयोग और एकता की ऐसी शक्ति है, जो सभी सीमाओं से ऊपर है।
धन्यवाद!
प्रश्न 4. भाषाई स्मृति पोटली
अपने परिवार में प्रयुक्त अलग-अलग भाषाओं के पाँच शब्द एकत्र कीजिए (जैसे- दादी मराठी बोलती हों, माँ हिंदी)। उन्हें एक ‘शब्द पोटली’ में कार्ड पर सजाइए।
उत्तर: भाषाई स्मृति पोटली
भाषा | शब्द | अर्थ |
हिंदी | प्यार | प्रेम |
मराठी | आजी | दादी या नानी |
पंजाबी | चंगा | अच्छा |
तमिल | नन्द्री | धन्यवाद |
बांग्ला | भालो | अच्छा या सुंदर |
इन शब्दों को अलग-अलग रंगों के कार्ड पर लिखकर कपड़े या कागज की पोटली में रखा जा सकता है। प्रत्येक कार्ड पर भाषा, शब्द और उसका हिंदी अर्थ लिखा जाएगा।
प्रश्न 5. स्वर- कोलाज
उत्तर: स्वर-कोलाज बनाने के लिए विद्यार्थियों ने भारत की विभिन्न संगीत-परंपराओं और भाषाओं से संबंधित चित्र, शब्द और संगीत-रूप एकत्र किए।
कोलाज में निम्नलिखित को शामिल किया जा सकता है:
हिंदी – भजन
मराठी – अभंग
पंजाबी – लोकगीत
बंगाली – रवींद्र संगीत
तमिल – लोकधुन
असमिया – बिहू गीत
राजस्थानी – मांड
भोजपुरी – सोहर
ब्रज भाषा – फाग
कर्नाटक – कर्नाटक शास्त्रीय संगीत
कोलाज के मध्य में लिखा जा सकता है:
“भाषाएँ अनेक, संगीत एक—भारत के स्वरों में एकता।”
प्रश्न 6. समय – रेखा
लता जी के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाएँ कालानुक्रम में दर्शाइए।
उत्तर: लता मंगेशकर के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं की समय-रेखा:
1929 – 28 सितंबर को इंदौर में जन्म हुआ।
1942 – पिता के निधन के बाद लगभग 13 वर्ष की आयु में परिवार की जिम्मेदारी सँभाली और गायन तथा अभिनय के क्षेत्र में काम शुरू किया।
1949 – फिल्म ‘महल’ के गीत ‘आएगा आने वाला’ से व्यापक प्रसिद्धि मिली।
1950 से 1960 का दशक – हिंदी सिनेमा की प्रमुख पार्श्व गायिका के रूप में स्थापित हुईं और अनेक महान संगीतकारों तथा गायकों के साथ कार्य किया।
1963 – देशभक्ति गीत ‘ऐ मेरे वतन के लोगो’ प्रस्तुत किया, जिसने श्रोताओं को अत्यंत भावुक किया।
1969 – पद्म भूषण से सम्मानित हुईं।
1989 – दादा साहब फाल्के पुरस्कार प्राप्त किया।
1999 – पद्म विभूषण से सम्मानित हुईं।
2001 – भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ प्राप्त किया।
2022 – 6 फरवरी को उनका निधन हुआ।
निष्कर्ष:
लता मंगेशकर का जीवन संगीत-साधना, संघर्ष, सादगी और समर्पण का प्रेरणादायक उदाहरण है। उनकी आवाज और गीत भारतीय संगीत-जगत में सदैव जीवित रहेंगे।
भाषा संगम
“उस दिन घर में संगीत की सभा होती थी।”
नीचे ‘संगीत’ शब्द के लिए संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कुछ भारतीय भाषाओं में प्रयुक्त शब्दों की सूची दी गई है।
संगीत (हिंदी); सङ्गीतम् (संस्कृत); संगीत (पंजाबी); मूसीकी, मौसिकी (उर्दू); मूसीकी, संगीत (कश्मीरी); संगीत ( सिंधी); संगीत कला (मराठी); संगीतकळा (ला) (गुजराती); संगीत (कोंकणी); संगीत (नेपाली); संगीत (बांग्ला); संगीत (असमिया); ईशै (मणिपुरी); संगीत (ओड़िआ); संगीतमु (तेलुगु); संगीतम्, इशै (तमिल); संगीतम् (मलयालम); संगीत (कन्नड़)।
इनके अतिरिक्त यदि आप ‘संगीत’ शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं तो उस भाषा में भी लिखिए।
उपर्युक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए।
https://shabd.education.gov.in/lexicon.jsp
उत्तर: अंग्रेजी भाषा में ‘संगीत’ को “Music” कहा जाता है।
संथाली में संगीत के लिए ‘सेरेञ’ या ‘सैरंग’ जैसे शब्दों का प्रयोग किया जाता है। मैथिली में इसे ‘संगीत’ ही कहा जाता है।
“उस दिन घर में संगीत की सभा होती थी।” का विभिन्न भाषाओं में रूप:
पंजाबी:
“उस दिन घर विच संगीत दी सभा हुंदी सी।”
भोजपुरी:
“ओह दिन घर में संगीत के सभा होत रहे।”
राजस्थानी:
“ओ दिन घर में संगीत री सभा होवती थी।”
गुजराती:
“ते दिवसे घरमा संगीतनी सभा थती हती।”
खोजबीन
लता मंगेशकर से जान-पहचान
प्रश्न 1. “जब मैं बड़ी हो जाऊँगी, तब मुझे भी ऐसे ही मेडल मिलेंगे।”
लता जी ने बचपन में मेडल पाने की कल्पना की और जीवन में अनगिनत पुरस्कार और मेडल प्राप्त भी किए। पता कीजिए कि उन्होंने जीवन भर में कौन-कौन से ‘मेडल’ और पुरस्कार प्राप्त किए?
उत्तर: लता मंगेशकर को भारतीय संगीत में उनके असाधारण योगदान के लिए अनेक राष्ट्रीय और फिल्म-संबंधी सम्मानों से सम्मानित किया गया। उनके कुछ प्रमुख पुरस्कार इस प्रकार हैं:
1969 – पद्म भूषण
1989 – दादा साहब फाल्के पुरस्कार
1997 – महाराष्ट्र भूषण
1999 – पद्म विभूषण
2001 – भारत रत्न
इसके अतिरिक्त उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, फिल्मफेयर पुरस्कार, फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट सम्मान और कई राज्यस्तरीय तथा अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए। संगीत की दुनिया में वे ‘भारत कोकिला’ और ‘नाइटिंगेल ऑफ इंडिया’ के नाम से प्रसिद्ध हुईं।
प्रश्न 2. पाठ में लता मंगेशकर ने कई फिल्मों और गीतों का उल्लेख किया है। इंटरनेट की सहायता से इनमें से किसी एक फिल्म और गीत को देखकर उसके विषय में अपने विचार लिखिए। आपको यह फिल्म और गीत कैसा लगा और क्यों?
उत्तर:
फिल्म – महल
गीत – ‘आएगा आने वाला’
यह गीत सुनने में अत्यंत मधुर, रहस्यमय और भावपूर्ण लगा। लता मंगेशकर की आवाज धीरे-धीरे उभरती है, जिससे गीत में प्रतीक्षा और रहस्य का विशेष वातावरण बनता है। शब्दों और संगीत के साथ उनकी आवाज का मेल श्रोता पर गहरा प्रभाव डालता है।
गीत में प्रेम और किसी प्रिय व्यक्ति की प्रतीक्षा के भाव को सुंदरता से प्रस्तुत किया गया है। लता जी का स्पष्ट उच्चारण और भावपूर्ण गायन इसे बार-बार सुनने योग्य बनाता है। यह गीत उनके संगीत-जीवन की महत्त्वपूर्ण उपलब्धियों में माना जाता है और इससे उनकी आवाज को व्यापक पहचान मिली।
प्रश्न 3. अब आप नीचे दी गई इंटरनेट कड़ी की सहायता से लता मंगेशकर द्वारा गाया हुआ गीत ‘ऐ मेरे वतन के लोगो’ सुन सकते हैं।
https://youtu.be/CF_RqQF99Iw?si=7CG_ zpv8XW5Hprmi
उत्तर: यह श्रवण और अनुभव पर आधारित गतिविधि है। विद्यार्थी दिए गए लिंक की सहायता से गीत सुनें और उसमें व्यक्त देशभक्ति, सैनिकों के बलिदान, करुणा तथा राष्ट्रीय सम्मान के भावों को समझें।
गीत सुनने के बाद विद्यार्थी अपनी लेखन-पुस्तिका में निम्नलिखित बिंदुओं पर संक्षिप्त टिप्पणी लिख सकते हैं:
गीत का मुख्य संदेश
लता मंगेशकर की गायन-शैली
गीत सुनते समय उत्पन्न भावनाएँ
सैनिकों के प्रति हमारा कर्तव्य और सम्मान
CBSE Class 9 Hindi Chapter 4 Other Study Materials
S.No | Important Links for Chapter 4 Class 9 Hindi |
1 | Class 9 Aisi Bhi Baatein Hoti Hain Important Questions |
2 | Class 9 Aisi Bhi Baatein Hoti Hain Revision Notes |
Chapter-Specific NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga
Given below are the chapter-wise NCERT Solutions for Class 9 Hindi. Go through these chapter-wise solutions to be thoroughly familiar with the concepts.
S.No | NCERT Solutions Class 9 Chapter-wise Hindi PDF |
1 | Chapter 1 - Do Bailon Ki Katha Solutions |
2 | Chapter 2 - Kya Likhun? Solutions |
3 | Chapter 3 - Samvaadheen Solutions |
4 | Chapter 5 - Aakhri Chataan Tak Solutions |
5 | Chapter 6 - Reedh Ki Haddi Solutions |
6 | Chapter 7 - Main Aur Mera Desh Solutions |
7 | Chapter 8 - Pad Solutions |
8 | Chapter 9 - Ram-Lakshman-Parshuram-Sanvaad Solutions |
9 | Chapter 10 - Bharati Jay Vijaykare! Solutions |
10 | Chapter 11 - Jhansi Ki Rani Solutions |
11 | Chapter 12 - Ghar Ki Yaad Solutions |
Additional Study Materials for Class 9 Hindi
S.No | Important Study Material for Hindi Class 9 |
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Prepare Better with Vedantu’s NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 4 ऐसी भी बातें होती हैं
Vedantu’s NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 4 Aisi Bhi Baatein Hoti Hain help students understand the inspiring life, musical journey and values of Lata Mangeshkar through her interview with Yatindra Mishra. The chapter explains how her father, Pandit Deenanath Mangeshkar, influenced her music, discipline, self-respect and commitment to truth.
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The chapter presents an interview with Lata Mangeshkar and explores her childhood, musical training, family responsibilities, struggles, values and relationship with fellow artists. It also discusses classical music, folk traditions and the lasting importance of meaningful work.
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Lata Mangeshkar was interviewed by poet, writer and music scholar Yatindra Mishra. The interview is presented as an intimate conversation about her family, musical journey, experiences and views on life and music.
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7. Why are Tansen and Baba Haridas mentioned in the chapter?
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