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NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 5 Aakhri Chataan Tak (आखिरी चट्टान तक) 2026-27

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Hindi Class 9 Chapter 5 Aakhri Chataan Tak NCERT Solutions - FREE PDF Download

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 5 आखिरी चट्टान तक (Aakhri Chataan Tak) explain the chapter in simple, clear language and provide complete answers to every textbook question. Students can understand the main idea, the important events and descriptions, and the meaning of new words, helping them prepare full-mark answers in proper Hindi.


As a chapter in the new 2026-27 NCERT Ganga textbook, every answer is solved stepwise by Vedantu's subject experts. Download the FREE PDF for NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga below for clear, exam-ready revision anytime.

Class 9 Hindi Ganga Chapter 5 आखिरी चट्टान तक NCERT Questions with Detailed Answers

रचना से संवाद

मेरे उत्तर मेरे तर्क

निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं?

प्रश्न 1. लेखक ने सूर्यास्त का मनोहारी दृश्य कहाँ से देखा?
(क) विवेकानंद चट्टान से
(ख) अरब सागर की ओर के ऊँचे टीले से
(ग) पच्छिमी क्षितिज से
(घ) सैंड हिल से

उत्तर: (ख) अरब सागर की ओर के ऊँचे टीले से

क्यों – लेखक सूर्यास्त का पूरा और स्पष्ट दृश्य देखना चाहता था। इसलिए वह सैंड हिल से आगे बढ़कर अरब सागर की दिशा में स्थित एक ऊँचे टीले पर पहुँचा। वहीं बैठकर उसने समुद्र के विस्तृत दृश्य की पृष्ठभूमि में सूर्यास्त देखा।


प्रश्न 2. “मैं कुछ देर भूला रहा कि मैं मैं ही हूँ।” यह कथन लेखक की किन मनः स्थिति को दर्शाता है?
(क) मौन हो जाना
(ख) विस्मित हो जाना
(ग) भ्रमित हो जाना
(घ) आशंकित होना

उत्तर: (ख) विस्मित हो जाना

क्यों – समुद्र की विशालता, लहरों की शक्ति और सूर्यास्त के अद्भुत दृश्य ने लेखक को पूरी तरह मंत्रमुग्ध कर दिया था। वह कुछ समय के लिए अपनी सुध-बुध भूल गया। इससे उसके विस्मय और प्रकृति में डूब जाने की मनःस्थिति प्रकट होती है।


प्रश्न 3. “मैंने सिर्फ मैंने उस चोटी को पहली बार सर किया हो।” इस कथन में कौन-सा भाव व्यक्त होता है?
(क) करुण
(ख) विनम्रता
(ग) आत्मीयता
(घ) संतुष्टि

उत्तर: (घ) संतुष्टि

क्यों – कई टीलों को पार करके सबसे ऊँचे स्थान पर पहुँचने के बाद लेखक को अपनी मेहनत सफल होने का अनुभव हुआ। उसे ऐसा लगा जैसे उसने कोई नई चोटी पहली बार जीत ली हो। इस कथन में उपलब्धि से मिली संतुष्टि और आनंद का भाव है।


प्रश्न 4. “शक्ति का विस्तार, विस्तार की शक्ति” वाक्य में वर्णन है-
(क) बलखाती लहरों का
(ख) सागर की व्यापकता का
(ग) सूर्यास्त के दृश्य का
(घ) पच्छिमी क्षितिज का

उत्तर: (ख) सागर की व्यापकता का

क्यों – लेखक समुद्र के अंतहीन फैलाव और उसकी शक्तिशाली लहरों से अत्यंत प्रभावित था। उसे समुद्र के विशाल विस्तार में शक्ति और उसकी शक्ति में अनंत विस्तार का अनुभव हुआ। इसलिए यह कथन सागर की व्यापकता को व्यक्त करता है।


प्रश्न 5. लेखक की कन्याकुमारी की यात्रा का वर्णन पढ़कर कहा जा सकता है कि-
(क) यह कन्याकुमारी के मौसम को प्रमुखता से वर्णित करता है।
(ख) यह यात्रा को जीवंत अनुभूतियों से जोड़ता है।
(ग) यह केवल यात्रा के रोमांच पर केंद्रित है।
(घ) इसमें कन्याकुमारी का काल्पनिक वर्णन मिलता है।

उत्तर: (ख) यह यात्रा को जीवंत अनुभूतियों से जोड़ता है।

क्यों – इस यात्रा-वृत्तांत में केवल स्थानों और प्राकृतिक दृश्यों का वर्णन नहीं किया गया है। लेखक ने सूर्यास्त देखकर उत्पन्न विस्मय, ऊँचे टीले पर पहुँचने की संतुष्टि, अकेलेपन की सिरहन और बढ़ती समुद्री लहरों से होने वाले भय को भी जीवंत रूप में प्रस्तुत किया है। इससे पाठक स्वयं को लेखक की यात्रा का सहभागी महसूस करता है।


मेरी समझ मेरे विचार

नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए-

प्रश्न 1. यात्रियों का समूह सूर्यास्त का दृश्य देखने के लिए सैंड हिल की ओर बढ़ता जा रहा था लेकिन लेखक सैंड हिल पर पहुँचकर कुछ देर रुकने के बाद दूसरे टीले की ओर बढ़ने लगा। उसके ऐसा करने के पीछे मूल कारण क्या था?

उत्तर: लेखक सूर्यास्त को समुद्र के पूरे विस्तार के साथ देखना चाहता था। सैंड हिल पर पहुँचने के बाद उसने देखा कि अरब सागर की दिशा में स्थित एक और ऊँचा टीला समुद्र के कुछ भाग को छिपा रहा था। इसलिए वह अधिक खुला और विस्तृत दृश्य पाने के लिए उस टीले की ओर बढ़ गया।

वहाँ पहुँचने पर उसे उससे भी ऊँचे अन्य टीले दिखाई दिए। उसकी जिज्ञासा बढ़ती गई और वह एक के बाद एक कई टीलों को पार करता हुआ अंत में ऐसे स्थान पर पहुँचा, जहाँ से समुद्र और सूर्यास्त का पूरा दृश्य स्पष्ट दिखाई दे रहा था।


प्रश्न 2. लेखक ने कन्याकुमारी के स्थानीय लोगों के विषय में क्या-क्या बताया?

उत्तर: लेखक ने बताया कि कन्याकुमारी में बेरोजगारी एक गंभीर समस्या थी। वहाँ कई शिक्षित युवक रोजगार न मिलने के कारण बार-बार नौकरियों के लिए आवेदन करते थे। अपनी आजीविका चलाने के लिए वे पर्यटकों को फोटो-एल्बम बेचने, दूरबीन से सूर्य-दर्शन कराने और अन्य छोटे-मोटे काम करने को विवश थे।

स्थानीय युवतियाँ टोकरियों में शंख, सीपियाँ और उनसे बनी मालाएँ बेचती थीं। वहाँ के कुछ लोग समुद्री सीपियों का गूदा खाते हुए दर्शन और जीवन से संबंधित विषयों पर चर्चा करते थे। इस वर्णन से स्थानीय लोगों की आर्थिक कठिनाइयों, श्रमशीलता और बौद्धिक रुचि का पता चलता है।


प्रश्न 3. “अपने प्रयत्न की सार्थकता से संतुष्ट होकर मैं टीले पर बैठ गया” इस पंक्ति में ‘प्रयत्न की सार्थकता से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: ‘प्रयत्न की सार्थकता’ से आशय लेखक के उस प्रयास की सफलता से है, जो उसने सूर्यास्त और समुद्र का संपूर्ण दृश्य देखने के लिए किया था। वह कई ऊँचे-नीचे टीलों को पार करके ऐसे टीले पर पहुँचा, जहाँ से समुद्र का विशाल विस्तार और डूबता हुआ सूर्य स्पष्ट दिखाई दे रहा था। मनचाहा दृश्य मिल जाने के कारण उसे अपने परिश्रम की सार्थकता का अनुभव हुआ।


प्रश्न 4. यात्रा-वृत्तांत में आए उन दृश्यों के विषय में लिखिए जिनका अनुभव लेखक के लिए बिल्कुल नया था।

उत्तर: लेखक के लिए कन्याकुमारी के कई दृश्य बिल्कुल नए और रोमांचक थे। ऊँचे टीले पर पहुँचने के बाद उसने दूर तक फैली ऐसी रेत देखी, जिस पर केवल उसके पैरों के निशान थे। चमकती हुई अछूती रेत को देखकर उसे लगा मानो उस स्थान पर पहली बार किसी मनुष्य ने कदम रखा हो।

सूर्यास्त के समय उसने रेत और आकाश पर सुनहरे, लाल और फिर धीरे-धीरे गहरे स्याह रंग फैलते देखे। अँधेरा होने पर दूर के पेड़ों के झुरमुट काले दिखाई देने लगे और अकेलेपन के कारण उसके मन में भय उत्पन्न हुआ।

समुद्र तट पर उसने सुरमई, खाकी, पीली और लाल रंगों वाली रेत देखी। इससे पहले उसने रेत में इतने भिन्न रंग नहीं देखे थे। उसे तट का केवल तीन-चार फुट तक संकरा हो जाना और बढ़ती हुई लहरों का पैरों से टकराना भी एक नया तथा भयपूर्ण अनुभव लगा।


प्रश्न 5. यात्रा-वृत्तांत से ऐसे दो अंश चुनकर लिखिए जिससे लेखक की मानसिक दृढ़ता और हार न मानने की प्रवृत्ति का पता चलता है।

उत्तर: लेखक की मानसिक दृढ़ता और हार न मानने की प्रवृत्ति निम्नलिखित दो प्रसंगों से स्पष्ट होती है—

(i) सैंड हिल पर पहुँचने के बाद भी लेखक संतुष्ट नहीं हुआ। समुद्र का पूरा विस्तार देखने के लिए वह एक टीले से दूसरे टीले की ओर बढ़ता गया। उसकी टाँगें थक चुकी थीं, फिर भी उसका मन रुकने को तैयार नहीं था। अंततः वह सबसे ऊँचे टीले पर पहुँच गया और वहाँ से उसने मनचाहा सूर्यास्त देखा।

(ii) सूर्यास्त के बाद चारों ओर अँधेरा छा गया और लेखक को अकेले वापस लौटने का भय होने लगा। संकरे समुद्र तट पर तेज लहर उसके पैरों से टकराई और पानी तेजी से बढ़ने लगा। वह घबराया अवश्य, पर उसने हिम्मत नहीं छोड़ी। उसने जूते हाथ में उठाए और तेजी से ऊँचे टीले पर चढ़कर स्वयं को सुरक्षित कर लिया।


विधा से संवाद

यात्रा का वृत्तांत

मोहन राकेश का ‘आखिरी चट्टान तक’ यात्रा वृत्तांत केवल स्थान चित्रण नहीं है बल्कि इसमें प्रकृति का सजीव रूपांकन, मानव-जीवन और समाज की झलक तथा आत्मानुभूति का गहरा समन्वय मिलता है।

नीचे यात्रा-वृत्तांत के प्रमुख तत्वों विशेषताओं को कुछ प्रमुख बिंदुओं के माध्यम से दर्शाया गया है। इन्हें पढ़कर यात्रा- वृत्तांत की रचना-प्रक्रिया को समझने का प्रयास कीजिए। अपनी किसी यात्रा को इन बिंदुओं के माध्यम से समझाइए।


नीचे यात्रा-वृत्तांत के प्रमुख तत्वों विशेषताओं को कुछ प्रमुख बिंदुओं के माध्यम से दर्शाया गया है। इन्हें पढ़कर यात्रा- वृत्तांत की रचना-प्रक्रिया को समझने का प्रयास कीजिए। अपनी किसी यात्रा को इन बिंदुओं के माध्यम से समझाइए।


उत्तर: मेरी गोवा की यात्रा

1. दृश्य वर्णन

गोवा पहुँचते ही समुद्र, सुनहरी रेत, नारियल के पेड़ों और स्वच्छ आकाश का सुंदर दृश्य दिखाई दिया। अगुआड़ा किले से समुद्र का विशाल विस्तार अत्यंत आकर्षक लग रहा था। सूर्यास्त के समय आकाश में पीले, नारंगी और लाल रंग फैल गए थे। समुद्र की ऊँची लहरें बार-बार तट से टकराकर सफेद झाग बना रही थीं।


2. आत्मानुभूति व भावनाएँ

पहली बार समुद्र के इतने निकट पहुँचकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता और आश्चर्य हुआ। समुद्र की विशालता ने मुझे अपनी ओर आकर्षित किया, लेकिन ऊँची लहरों को देखकर कुछ भय भी लगा। कैंडोलिम और कलंगुट के समुद्र तटों की प्राकृतिक सुंदरता ने मेरे मन को शांति और संतोष से भर दिया।


3. सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य

गोवा की संस्कृति में भारतीय और पुर्तगाली परंपराओं का सुंदर मेल दिखाई देता है। यहाँ मंदिरों और गिरजाघरों दोनों का सम्मान किया जाता है। गणपति उत्सव, तुलसी पूजा, क्रिसमस और स्थानीय पर्व उत्साह से मनाए जाते हैं। यहाँ के लोग मिलनसार हैं और संगीत तथा नृत्य उनके सामाजिक जीवन का महत्त्वपूर्ण हिस्सा हैं।


4. जीवन-दर्शन

समुद्र ने मुझे यह अनुभव कराया कि प्रकृति जितनी सुंदर और आकर्षक है, उतनी ही शक्तिशाली भी है। मनुष्य को प्रकृति का आनंद लेते समय उसकी शक्ति का सम्मान करना चाहिए। इस यात्रा ने मुझे वर्तमान क्षण को खुलकर जीने और प्रकृति के निकट समय बिताने की प्रेरणा दी।


5. शैलीगत विशेषताएँ

गोवा की मुख्य भाषा कोंकणी है, लेकिन कई लोग हिंदी, मराठी और अंग्रेजी भी बोलते हैं। यहाँ की इमारतों में इंडो-पुर्तगाली स्थापत्य शैली दिखाई देती है। स्थानीय संगीत, समुद्री भोजन, रंगीन घर और उत्सव यात्रा-वर्णन को जीवंत बनाते हैं।


6. रोमांच व संघर्ष

समुद्र की लहरों का तेज शोर, हवा में झूमते नारियल के वृक्ष और पानी पर बनता सफेद झाग अत्यंत रोमांचकारी था। एक बार अचानक एक बड़ी लहर हमारी ओर बढ़ी। हमें अपने जूते हाथ में लेकर तेजी से तट से दूर भागना पड़ा। उस क्षण समुद्र की सुंदरता के साथ उसकी शक्ति और गहराई का भय भी अनुभव हुआ।

प्रस्तुत वर्णन के अतिरिक्त छात्र स्वयं भी अपनी इच्छानुसार किसी यात्रा को प्रस्तुत बिंदुओं के आधार पर व्यक्त कर सकते हैं।


विषयों से संवाद

यात्रा और खोज

संसार में बहुत से लोगों ने लंबी-लंबी यात्राएं की हैं और अपनी यात्रा से अर्जित ज्ञान और अनुभव से समाज को समृद्ध किया है। पुस्तकालय एवं शिक्षक की सहायता से कुछ महत्वपूर्ण याश-वृतांत और उनके लेखकों के विषय में जानकारी एकत्रित कीजिए और लिखिए। आपकी सहायता के लिए एक संकेत नीचे दिया गया है।


पुस्तकालय एवं शिक्षक की सहायता से कुछ महत्वपूर्ण याश-वृतांत और उनके लेखकों के विषय में जानकारी एकत्रित कीजिए और लिखिए।


उत्तर: कुछ प्रसिद्ध यात्रा-वृत्तांत एवं उनके लेखक


क्रमांक

यात्रा-वृत्तांत

प्रमुख यात्रा-क्षेत्र

रचनाकार

1

एक बूँद सहसा उछली

यूरोप

अज्ञेय

2

हिमालय यात्रा

हिमालय क्षेत्र

काका कालेलकर

3

तिब्बत में सवा वर्ष

तिब्बत

राहुल सांकृत्यायन

4

अरे यायावर रहेगा याद

भारत के विभिन्न क्षेत्र

अज्ञेय

5

मेरी लद्दाख यात्रा

लद्दाख

राहुल सांकृत्यायन

6

रूस में पच्चीस मास

रूस

राहुल सांकृत्यायन

7

ऋणजल-धनजल

बिहार के बाढ़ और सूखाग्रस्त क्षेत्र

फणीश्वरनाथ रेणु

8

सरयूपार की यात्रा

सरयू और अयोध्या क्षेत्र

भारतेंदु हरिश्चंद्र

9

लखनऊ की यात्रा

लखनऊ

भारतेंदु हरिश्चंद्र

10

हँसते निर्झर दहकती भट्टी

हिमालयी क्षेत्र

विष्णु प्रभाकर

11

देश-विदेश

भारत और विदेश के विभिन्न स्थान

रामधारी सिंह ‘दिनकर’

12

सौंदर्य की नदी नर्मदा

नर्मदा नदी का क्षेत्र

अमृतलाल वेगड़



मेरे देश की धरती

कन्याकुमारी भारत के तमिलनाडु राज्य में स्थित एक तटीय शहर है जिसके प्राकृतिक सौंदर्य का चित्रण पाठ में हुआ है।

प्रश्न 1. भारत के समुद्री तट पर स्थित अन्य राज्यों के नाम तथा उनकी अवस्थिति को भारत के मानचित्र पर चिह्नित कीजिए।

उत्तर:


भारत के समुद्री तट पर स्थित अन्य राज्यों के नाम तथा उनकी अवस्थिति को भारत के मानचित्र पर चिह्नित कीजिए।


भारत के समुद्री तट पर स्थित नौ राज्य निम्नलिखित हैं—

  1. गुजरात

  2. महाराष्ट्र

  3. गोवा

  4. कर्नाटक

  5. केरल

  6. तमिलनाडु

  7. आंध्र प्रदेश

  8. ओडिशा

  9. पश्चिम बंगाल

मानचित्र में पश्चिमी तट पर गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक और केरल को चिह्नित किया जा सकता है। पूर्वी तट पर तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, ओडिशा और पश्चिम बंगाल स्थित हैं।

भारत के चार तटीय केंद्रशासित प्रदेश भी हैं—

  1. पुडुचेरी

  2. लक्षद्वीप

  3. अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह

  4. दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव का दमन-दीव क्षेत्र


प्रश्न 2. यात्रा करना सभी को अच्छा लगता है। आपके मन में भी कुछ जगहों को देखने की इच्छा अवश्य हुई होगी। अपनी पसंद की उन जगहों की सूची नीचे दिए गए शीर्षकों के अनुसार बनाइए।

पर्यटन स्थल

राज्य जहाँ वह स्थित है

पर्वतीय/समुद्री/मैदानी/अन्य क्षेत्र

जलवायु

घूमने का अनुकूल समय


उत्तर:

पर्यटन स्थल

राज्य/केंद्रशासित प्रदेश

पर्वतीय/मैदानी

जलवायु

अनुकूल समय

किन्नौर

हिमाचल प्रदेश

पर्वतीय

ठंडी

अप्रैल से जून तथा सितंबर-अक्टूबर

महाकालेश्वर, उज्जैन

मध्य प्रदेश

मैदानी

गर्म और सामान्यतः शुष्क

अक्टूबर से मार्च

मनाली

हिमाचल प्रदेश

पर्वतीय

ठंडी

मार्च से जून; बर्फ के लिए दिसंबर-फरवरी

जगन्नाथ पुरी

ओडिशा

तटीय मैदानी

गर्म और आर्द्र

अक्टूबर से फरवरी

सियाचीन क्षेत्र

लद्दाख

उच्च पर्वतीय हिमानी क्षेत्र

अत्यधिक ठंडी

सामान्य पर्यटन के लिए खुला नहीं; विशेष अनुमति आवश्यक



प्रश्न 3. कन्याकुमारी की भौगोलिक स्थिति, परिवेश, महत्वूपर्ण पर्यटन स्थल एवं जन-जीवन का वर्णन करते हुए बताइए कि वहाँ की स्थिति आपके राज्य अथवा शहर / गाँव से किस प्रकार भिन्न है?

उत्तर: कन्याकुमारी की भौगोलिक स्थिति, परिवेश, पर्यटन-स्थल एवं जन-जीवन

भौगोलिक स्थिति

कन्याकुमारी

  • कन्याकुमारी तमिलनाडु में भारत की मुख्यभूमि के दक्षिणतम छोर पर स्थित है।

  • यहाँ अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर का संगम माना जाता है।

  • इसकी समुद्र से घिरी स्थिति इसे विशेष भौगोलिक और पर्यटन महत्त्व प्रदान करती है।

दिल्ली

  • दिल्ली उत्तर भारत में स्थित भारत की राष्ट्रीय राजधानी है।

  • यह समुद्र से दूर एक मैदानी क्षेत्र है और यहाँ से यमुना नदी बहती 

  • दिल्ली देश का प्रमुख प्रशासनिक, आर्थिक और सांस्कृतिक केंद्र है।

परिवेश

कन्याकुमारी

  • समुद्र के निकट होने के कारण यहाँ का वातावरण गर्म, आर्द्र और समुद्री प्रभाव वाला रहता है।

  • नारियल के वृक्ष, समुद्री तट और चट्टानें इसके प्राकृतिक सौंदर्य को बढ़ाते हैं।

  • यहाँ से सूर्योदय और सूर्यास्त के सुंदर दृश्य देखे जा सकते हैं।

दिल्ली

  • दिल्ली का परिवेश अत्यधिक शहरी और व्यस्त है।

  • यहाँ ऊँची इमारतें, चौड़ी सड़कें, बाजार, मेट्रो और यातायात के अनेक साधन हैं।

  • अधिक जनसंख्या और वाहनों के कारण प्रदूषण तथा भीड़ की समस्या भी रहती है।

पर्यटन-स्थल

कन्याकुमारी

  • विवेकानंद रॉक मेमोरियल

  • तिरुवल्लुवर प्रतिमा

  • समुद्री ग्लास ब्रिज

  • कुमारी अम्मन मंदिर

  • गांधी मंडपम

  • सूर्योदय और सूर्यास्त स्थल

दिल्ली

  • इंडिया 

  • लाल किला

  • कुतुब मीनार

  • अक्षरधाम मंदिर

  • लोटस टेंपल

  • जंतर-मंतर

  • राष्ट्रीय संग्रहालय

  • राष्ट्रपति भवन

  • नेहरू तारामंडल

जनजीवन

कन्याकुमारी

  • यहाँ के अनेक लोग मछली पकड़ने, पर्यटन, दुकानदारी और समुद्र से प्राप्त वस्तुओं पर आधारित रोजगार से जुड़े हैं।

  • शंख, सीपियों, मालाओं और स्थानीय हस्तशिल्प की बिक्री भी आय का साधन है।

  • तमिल यहाँ की मुख्य भाषा है और जीवन में दक्षिण भारतीय संस्कृति का प्रभाव दिखाई देता है।

  • जीवन अपेक्षाकृत शांत और प्रकृति के निकट है।

दिल्ली

  • यहाँ का जीवन तेज गति और भागदौड़ वाला है।

  • भारत के लगभग सभी राज्यों से लोग यहाँ शिक्षा, नौकरी और व्यापार के लिए आते हैं।

  • हिंदी, अंग्रेजी, पंजाबी और अनेक अन्य भाषाएँ बोली जाती हैं।

  • रोजगार के अवसर अधिक हैं, लेकिन प्रतिस्पर्धा, महँगाई, यातायात और प्रदूषण जैसी चुनौतियाँ भी हैं।

विशेष:

कन्याकुमारी प्रकृति, समुद्र और शांत वातावरण के लिए प्रसिद्ध है, जबकि दिल्ली आधुनिक सुविधाओं, प्रशासनिक गतिविधियों और तीव्र शहरी जीवन का केंद्र है। दोनों स्थानों की भौगोलिक स्थिति, जलवायु, रोजगार और जीवनशैली में स्पष्ट अंतर दिखाई देता है।


प्रश्न 4. इस यात्रा-वृत्तांत में कन्याकुमारी में स्थित चट्टान को आखिरी चट्टान कहा गया है। पुस्तकालय या अन्य स्रोतों तथा समाज विज्ञान के अपने शिक्षक से बातचीत करके पता लगाइए कि वर्तमान समय में भारत का अंतिम छोर (दक्षिणतम बिंदु) किसे माना जाता है। उस स्थान के विषय में लिखिए।

उत्तर: वर्तमान समय में पूरे भारत का दक्षिणतम बिंदु ‘इंदिरा पॉइंट’ माना जाता है। कन्याकुमारी मुख्यभूमि भारत का दक्षिणतम बिंदु है, जबकि इंदिरा पॉइंट द्वीपों सहित भारत का सबसे दक्षिणी स्थान है।

इंदिरा पॉइंट की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं—

  • यह अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के ग्रेट निकोबार द्वीप के दक्षिणी छोर पर स्थित 

  • यह भूमध्य रेखा के निकट और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों के पास स्थित है।

  • इसका पुराना नाम पिग्मेलियन पॉइंट था। बाद में इसका नाम इंदिरा पॉइंट रखा गया।

  • यहाँ समुद्री जहाजों के मार्गदर्शन के लिए एक प्रकाशस्तंभ बना हुआ है।

  • दिसंबर 2004 में आए भूकंप और सुनामी से इस क्षेत्र की भूमि का कुछ भाग समुद्र में धँस गया था।

  • यह भारत की समुद्री सीमा, नौसैनिक सुरक्षा और सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।

  • ग्रेट निकोबार एक पर्यावरणीय और सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र है, इसलिए सामान्य पर्यटकों का वहाँ जाना नियंत्रित होता है।


प्रश्न 5. इंटरनेट या अन्य किन्हीं माध्यमों से पता लगाइए कि आखिरी चट्टान में वर्णित कन्याकुमारी के विवेकानंद स्मारक चट्टान के स्वरूप में किस प्रकार का विस्तार हुआ है?
(संकेत – तिरुवल्लुवर की प्रतिमा इत्यादि)

उत्तर: ‘आखिरी चट्टान तक’ में वर्णित प्राकृतिक चट्टान का स्वरूप वर्तमान समय में काफी विकसित हो चुका है। यह स्थान अब आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन की दृष्टि से एक महत्त्वपूर्ण परिसर बन गया है।

विवेकानंद रॉक मेमोरियल

  • स्वामी विवेकानंद की स्मृति में इस चट्टान पर भव्य स्मारक का निर्माण किया गया।

  • स्मारक का उद्घाटन वर्ष 1970 में हुआ।

  • परिसर में श्रीपाद मंडपम और विवेकानंद मंडपम प्रमुख हैं।

  • ध्यान करने के लिए ध्यान मंडपम की व्यवस्था भी है।

तिरुवल्लुवर प्रतिमा

  • विवेकानंद रॉक मेमोरियल के निकट दूसरी चट्टान पर तमिल कवि और दार्शनिक तिरुवल्लुवर की विशाल प्रतिमा स्थापित की गई है।

  • प्रतिमा की कुल ऊँचाई 133 फुट है, जो ‘तिरुक्कुरल’ के 133 अध्यायों का प्रतीक है।

  • इसका लोकार्पण 1 जनवरी 2000 को किया गया था।

समुद्री ग्लास ब्रिज

  • विवेकानंद रॉक मेमोरियल और तिरुवल्लुवर प्रतिमा को अब एक समुद्री ग्लास ब्रिज से जोड़ दिया गया है।

  • यह पुल लगभग 77 मीटर लंबा और 10 मीटर चौड़ा है।

  • इससे पर्यटक दोनों चट्टानों के बीच पैदल जा सकते हैं और समुद्र का आकर्षक दृश्य देख सकते हैं।

पर्यटन सुविधाएँ

  • दोनों स्मारकों तक पहुँचने के लिए नियमित यात्री फेरी सेवा उपलब्ध है।

  • टिकट और नाव यात्रा के लिए ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा भी विकसित की गई है।

  • पर्यटकों की सुविधा और सुरक्षा के लिए जेटी, रेलिंग, प्रतीक्षा-स्थल और अन्य आधारभूत व्यवस्थाएँ बनाई गई हैं।

इस प्रकार एक प्राकृतिक चट्टान आज राष्ट्रीय गौरव, आध्यात्मिक साधना, तमिल संस्कृति और आधुनिक पर्यटन सुविधाओं से युक्त एक विस्तृत स्मारक-परिसर में बदल चुकी है।


हस्तशिल्प कौशल


दो स्थानीय नवयुवतियाँ उन्हें अपनी टोकरियों से शंख-मालाएँ दिखला रही थीं


“दो स्थानीय नवयुवतियाँ उन्हें अपनी टोकरियों से शंख-मालाएँ दिखला रही थीं।”

उपर्युक्त पंक्ति में स्थानीय युवतियों द्वारा यात्रियों को दिखाए जाने वाली शंख-मालाओं का उल्लेख है । यह भारतीय हस्तकला उद्योग के एक पारंपरिक रूप को दर्शाता है, जहाँ स्थानीय कारीगर घरेलू स्तर पर उत्पाद बनाते और बेचते हैं। शिक्षक की सहायता से हस्तकला और कुटीर उद्योग के विषय में जानकारी एकत्रित कीजिए।

उत्तर:

भारतीय हस्तकला एवं कुटीर उद्योग

हस्तकला

हस्तकला उन वस्तुओं को कहा जाता है जिन्हें कुशल कारीगर अपने हाथों से तैयार करते हैं। इनके निर्माण में मशीनों का बहुत कम या बिल्कुल भी उपयोग नहीं किया जाता। हस्तनिर्मित वस्तुओं में भारत की संस्कृति, परंपराओं, स्थानीय कला और कारीगरों की रचनात्मकता की झलक दिखाई देती है।

उदाहरण—मिट्टी के बर्तन, लकड़ी के खिलौने, हाथ से बने सजावटी सामान, कढ़ाई और बुनाई की वस्तुएँ, जूट के थैले, शंख-मालाएँ तथा बाँस से बनी वस्तुएँ आदि।

कुटीर उद्योग

कुटीर उद्योग ऐसे छोटे उद्योग होते हैं जिन्हें घर पर या बहुत छोटे स्तर पर चलाया जाता है। ‘कुटीर’ का अर्थ घर होता है। इन उद्योगों में परिवार के सदस्य मिल-जुलकर वस्तुओं का निर्माण करते हैं। इन्हें शुरू करने के लिए अधिक पूँजी और बड़ी मशीनों की आवश्यकता नहीं होती।

उदाहरण—खादी उद्योग, हस्तकरघा, अचार और पापड़ बनाना, अगरबत्ती तैयार करना, पतंग बनाना, मोमबत्ती बनाना तथा कागज के लिफाफे बनाना आदि।

महत्व

  • कुटीर उद्योग ग्रामीण परिवारों को रोजगार और आय का साधन प्रदान करते हैं।

  • इनके माध्यम से भारत की पारंपरिक कला और सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित रहती है।

  • ये उद्योग देश की अर्थव्यवस्था और निर्यात में योगदान देते हैं।

  • इनके कारण महिलाओं, छोटे कारीगरों और ग्रामीण लोगों को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिलता है।

  • स्थानीय संसाधनों और प्रतिभाओं का उचित उपयोग होता है।


प्रश्न 1. किसी भी स्थानीय शिल्पकार से बात करके निम्नलिखित बिंदुओं पर जानकारी संगृहीत कीजिए। यह कार्य दो-दो के जोड़े में कीजिए-


किसी भी स्थानीय शिल्पकार से बात करके निम्नलिखित बिंदुओं पर जानकारी संगृहीत कीजिए


  • शिल्प का नाम

  • यह कार्य कब से कर रहे हैं?

  • इसका प्रशिक्षण कहाँ से लिया?

  • शिल्प निर्माण में घर की महिलाओं की साझेदारी

  • प्रयुक्त सामग्री, तकनीक, लागत और विपणन

  • औपचारिक संस्थागत प्रशिक्षण

उत्तर:

शिल्पकार के साक्षात्कार से प्राप्त जानकारी

शिल्पकार का नाम – रामलाल वर्मा

शिल्प का नाम – मिट्टी के फूलदान बनाना।

यह कार्य कब से कर रहे हैं? – रामलाल जी पिछले बीस वर्षों से मिट्टी के फूलदान बनाने का कार्य कर रहे हैं।

इसका प्रशिक्षण कहाँ से लिया? – उन्होंने इस कला का प्रारंभिक प्रशिक्षण अपने दादा और पिता से प्राप्त किया। यह उनके परिवार का पारंपरिक व्यवसाय है, जो कई पीढ़ियों से चला आ रहा है। बाद में उन्होंने अपने कौशल को अधिक विकसित करने के लिए सरकारी कुटीर उद्योग प्रशिक्षण केंद्र से छह महीने का औपचारिक प्रशिक्षण भी लिया।

शिल्प निर्माण में घर की महिलाओं की साझेदारी – उनके परिवार की महिलाएँ शिल्प निर्माण में सक्रिय रूप से भाग लेती हैं। वे फूलदान बनाने के लिए मिट्टी तैयार करती हैं, तैयार फूलदानों पर रंग करती हैं और उन पर सुंदर बेल-बूटे तथा अन्य आकर्षक आकृतियाँ बनाती हैं। इस प्रकार उत्पादन को सुंदर और बिक्री योग्य बनाने में महिलाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहता है।

प्रयुक्त सामग्री, तकनीक, लागत और विपणन

सामग्री – फूलदान बनाने के लिए चिकनी मिट्टी, पानी, प्राकृतिक अथवा कृत्रिम रंग, ब्रश और सजावट की अन्य सामग्रियों का प्रयोग किया जाता है।

तकनीक – पहले मिट्टी को अच्छी तरह गूँथकर तैयार किया जाता है। इसके बाद चाक अथवा साँचे की सहायता से फूलदान को आकार दिया जाता है। फूलदान सूख जाने के बाद उसे पकाया, रंगा और सजाया जाता है।

एक उत्पाद बनाने में लागत और कितना समय लगता है? – एक साधारण मिट्टी का फूलदान तैयार करने में लगभग पचास से सौ रुपये तक की लागत आती है। इसे आकार देने और सुखाने में लगभग एक से दो दिन लगते हैं। पूरी तरह सूख जाने के बाद रंगाई और सजावट का काम किया जाता है।

विपणन – तैयार फूलदानों को स्थानीय बाजारों, मेलों, प्रदर्शनियों और हस्तशिल्प की दुकानों में बेचा जाता है। कुछ उत्पादों की बिक्री ऑनलाइन माध्यमों से भी की जाती है।

औपचारिक संस्थागत प्रशिक्षण

औपचारिक संस्थागत प्रशिक्षण कितना और किस प्रकार मिला? – रामलाल जी को शिल्पकला की मूल जानकारी अपने परिवार से मिली थी। इसके बाद उन्होंने सरकारी कुटीर उद्योग प्रशिक्षण केंद्र में छह महीने का प्रशिक्षण लिया। इस प्रशिक्षण ने उनके पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने में सहायता की।

प्रशिक्षण केंद्र से उन्होंने निम्नलिखित बातें सीखीं—

पारंपरिक विधियों के साथ आधुनिक तकनीकों का प्रयोग

नए और आकर्षक डिजाइन तैयार करना

वस्तुओं की गुणवत्ता में सुधार करना

उत्पादों की सुरक्षित पैकिंग करना

उत्पाद की सही कीमत निर्धारित करना

ग्राहकों की पसंद को समझना

ऋण, सब्सिडी और सरकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त करना

बाजार और ऑनलाइन माध्यमों से उत्पादों का प्रचार करना

साक्षात्कार के दौरान रामलाल जी हमें परिश्रमी, आत्मविश्वासी और अपने कार्य से संतुष्ट व्यक्ति लगे। उनसे बातचीत करके हमें शिल्प निर्माण की प्रक्रिया, कारीगरों की कठिनाइयों और पारिवारिक सहयोग के महत्व के बारे में बहुत उपयोगी जानकारी मिली। यह अनुभव ज्ञानवर्धक और यादगार रहा।


प्रश्न 2. डिजिटल खरीदारी और ई-वाणिज्य कुटीर उद्योग को बढ़ावा देने में किस प्रकार उपयोगी है?

उत्तर: आज के समय में डिजिटल खरीदारी और ई-वाणिज्य कुटीर उद्योगों के विकास के प्रभावी माध्यम बन गए हैं। इनके द्वारा छोटे कारीगर और शिल्पकार अपने उत्पादों को स्थानीय बाजार से बाहर निकालकर देश-विदेश के ग्राहकों तक पहुँचा सकते हैं।

डिजिटल खरीदारी और ई-वाणिज्य कुटीर उद्योगों के लिए निम्नलिखित प्रकार से उपयोगी हैं—

बाजार का विस्तार – पहले कुटीर उद्योगों में बनी वस्तुएँ अधिकतर स्थानीय दुकानों और बाजारों में ही बेची जाती थीं। अब ऑनलाइन माध्यमों से इन्हें अलग-अलग शहरों, राज्यों और देशों तक पहुँचाया जा सकता है। इससे भारतीय हस्तकला और पारंपरिक उत्पादों को व्यापक पहचान मिलती है।

उपभोक्ताओं से सीधा संपर्क – ई-वाणिज्य के माध्यम से कारीगर सीधे ग्राहकों से जुड़ सकते हैं। इससे बिचौलियों की भूमिका कम होती है और उत्पादक को अपनी मेहनत का अधिक उचित मूल्य प्राप्त होता है।

कम खर्च में अधिक लाभ – ऑनलाइन बिक्री के लिए बड़ी दुकान या महँगा व्यावसायिक स्थान लेने की आवश्यकता नहीं होती। कारीगर घर पर वस्तुएँ तैयार करके इंटरनेट के माध्यम से उनका प्रचार और बिक्री कर सकते हैं। इससे खर्च कम होता है और लाभ बढ़ने की संभावना रहती है।

डिजिटल भुगतान की सुविधा – ग्राहक घर बैठे वस्तुओं को देखकर चुन सकते हैं और ऑनलाइन भुगतान कर सकते हैं। डिजिटल भुगतान से लेन-देन तेज, सरल और सुविधाजनक बनता है।

उत्पादों का प्रचार – सोशल मीडिया, वेबसाइट और ऑनलाइन बाजारों के माध्यम से शिल्पकार अपने उत्पादों की तस्वीरें और विशेषताएँ बड़ी संख्या में लोगों तक पहुँचा सकते हैं।

ग्राहकों की प्रतिक्रिया – ऑनलाइन माध्यम से कारीगरों को ग्राहकों की राय और सुझाव प्राप्त होते हैं। इससे वे अपने उत्पादों की गुणवत्ता और डिजाइन में आवश्यक सुधार कर सकते हैं।

इस प्रकार डिजिटल खरीदारी और ई-वाणिज्य छोटे कारीगरों को बेहतर बाजार, उचित मूल्य, अधिक ग्राहक और आर्थिक आत्मनिर्भरता प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


प्रश्न 3. “हस्तशिल्प कला को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी इकट्ठा कीजिए और अपनी कक्षा में उस पर चर्चा कीजिए।

उत्तर: भारत सरकार हस्तशिल्प कलाओं और कारीगरों को प्रोत्साहित करने के लिए अनेक योजनाएँ और कार्यक्रम चला रही है। इन प्रयासों का उद्देश्य पारंपरिक कलाओं को सुरक्षित रखना, कारीगरों के कौशल को विकसित करना और उनके उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना है।

सरकार द्वारा किए जा रहे प्रमुख प्रयास निम्नलिखित हैं—

विभिन्न योजनाओं का संचालन – सरकार हस्तशिल्प के विकास से संबंधित योजनाएँ चलाती है। इनके माध्यम से कारीगरों को प्रशिक्षण, नए डिजाइन, आधुनिक तकनीक, उपकरण और उत्पादन संबंधी सुविधाएँ प्रदान की जाती हैं।

क्लस्टर विकास – एक ही प्रकार का शिल्प कार्य करने वाले कारीगरों को समूहों में संगठित किया जाता है। इससे वे सामूहिक रूप से उत्पादन कर सकते हैं, आधुनिक उपकरणों का उपयोग कर सकते हैं और बड़े बाजारों तक पहुँच बना सकते हैं।

आर्थिक सहायता और सब्सिडी – कारीगरों तथा छोटे उद्यमियों को आसान शर्तों पर ऋण, आर्थिक सहायता और सब्सिडी उपलब्ध कराई जाती है। इससे वे कच्चा माल खरीद सकते हैं और अपना व्यवसाय बढ़ा सकते हैं।

कौशल विकास प्रशिक्षण – कारीगरों को पारंपरिक कला के साथ नई तकनीकों, आधुनिक डिजाइन, गुणवत्ता नियंत्रण, पैकिंग और व्यापार प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जाता है।

विपणन में सहायता – सरकार प्रदर्शनियों, हस्तशिल्प मेलों और व्यापारिक आयोजनों के माध्यम से कारीगरों को अपने उत्पाद बेचने का अवसर प्रदान करती है। इसके अतिरिक्त उन्हें ऑनलाइन बाजारों और ई-वाणिज्य मंचों से भी जोड़ा जाता है।

सामाजिक सुरक्षा और बीमा – कारीगरों के लिए स्वास्थ्य बीमा, दुर्घटना बीमा, पेंशन और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ चलाई जाती हैं।

महिलाओं को विशेष प्रोत्साहन – महिला शिल्पकारों को प्रशिक्षण, रोजगार, ऋण और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ने के अवसर दिए जाते हैं, जिससे वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।

पुरस्कार और सम्मान – उत्कृष्ट शिल्पकारों को पुरस्कार और सम्मान देकर उनके कार्य की पहचान की जाती है। इससे उनका उत्साह बढ़ता है और अन्य कारीगरों को भी बेहतर कार्य करने की प्रेरणा मिलती है।

भौगोलिक पहचान और गुणवत्ता संरक्षण – विशेष क्षेत्रों में बनने वाले पारंपरिक उत्पादों की पहचान और मौलिकता को सुरक्षित रखने के प्रयास किए जाते हैं। इससे नकली उत्पादों पर रोक लगती है और असली कारीगरों को लाभ मिलता है।

इन सभी प्रयासों से हस्तशिल्प कला का संरक्षण होता है, कारीगरों की आय बढ़ती है और भारतीय कला को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलती है।


मिलकर चलें

आपकी कक्षा में कुछ विशेष आवश्यकता वाले साथी भी होंगे जिन्हें अपने दैनिक जीवन में अनेक तरह की समस्याओं से जूझना पड़ता होगा।

प्रश्न 1. ऐसे साथियों को अगर किसी यात्रा पर जाना हो तो उनके समक्ष किस प्रकार की चुनौतियाँ आ सकती हैं?

उत्तर: मेरी कक्षा में अमीना नाम की एक दृष्टिबाधित छात्रा है। यदि वह हमारे साथ किसी यात्रा पर जाती है, तो उसे कई प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। उसके लिए बस या अन्य वाहन में चढ़ना और उतरना, अनजान रास्तों पर चलना, सीढ़ियों का उपयोग करना, भोजन ग्रहण करना और भीड़भाड़ वाले स्थानों में सुरक्षित रहना कठिन हो सकता है।

वह प्राकृतिक दृश्यों को अपनी आँखों से नहीं देख सकती, इसलिए उसे आसपास के स्थानों और घटनाओं की जानकारी शब्दों के माध्यम से देनी होगी। यात्रा के दौरान उसे रास्ते में आने वाली रुकावटों, ऊँचाई, ढलान, गड्ढों और वाहनों से भी सावधान रखना होगा।

उसकी सहायता के लिए एक जिम्मेदार सहायक या उसकी हमउम्र सहेली का साथ होना आवश्यक है। यह व्यक्ति उसे हर समय सही दिशा बताए, सुरक्षित रूप से चलने में मदद करे और यात्रा के अनुभवों का वर्णन भी करता रहे। साथियों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि वह स्वयं को अलग, असहाय या उपेक्षित महसूस न करे। उसे सभी गतिविधियों में बराबरी से शामिल करना चाहिए, ताकि वह भी यात्रा का आनंद ले सके।


प्रश्न 2. उनकी विशिष्ट आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर कुछ ऐसे सुझाव दीजिए जो उनकी यात्रा को सहज बनाने में उपयोगी हों।

उत्तर: दृष्टिबाधित अथवा अन्य विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थियों की यात्रा को सहज और सुरक्षित बनाने के लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं—

  • उनके साथ प्रशिक्षित सहायक, शिक्षक या जिम्मेदार सहपाठी को रखा जाए।

  • वाहन में चढ़ते और उतरते समय उन्हें उचित सहायता दी जाए।

  • यात्रा मार्ग, सीढ़ियों, ढलानों और अन्य रुकावटों की जानकारी पहले से दी जाए।

  • भोजन, पानी, दवाइयों और आवश्यक सामान को आसानी से उपलब्ध कराया जाए।

  • आसपास के प्राकृतिक दृश्यों, स्थानों और घटनाओं का स्पष्ट शब्दों में वर्णन किया जाए।

  • यात्रा कार्यक्रम और सुरक्षा संबंधी निर्देश उन्हें पहले ही समझा दिए जाएँ।

  • उन्हें कविता, कहानी, गीत, भाषण, नाटक अथवा मनोरंजक गतिविधियों में भाग लेने का अवसर दिया जाए।

  • यात्रा में सभी स्थानों को यथासंभव बाधारहित और सुगम बनाया जाए।

  • उनके साथ दया का नहीं, बल्कि सम्मान और समानता का व्यवहार किया जाए।

  • उनकी इच्छा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए ही सहायता प्रदान की जाए।

इन उपायों से विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थी अधिक आत्मविश्वास के साथ यात्रा कर सकेंगे। वे स्वयं को अन्य विद्यार्थियों के समान महसूस करेंगे और यात्रा के प्रत्येक अनुभव का आनंद ले पाएँगे।


प्रश्न 3. अपने द्वारा दिए गए सुझावों पर विद्यालय के विशेष शिक्षा शिक्षक के साथ चर्चा कीजिए और समझिए कि आपके द्वारा सुझाए गए उपाय कितने प्रभावी हैं तथा उनमें और क्या बदलाव किए जा सकते हैं?

उत्तर: जब मैंने अपने सुझावों पर विद्यालय की विशेष शिक्षा शिक्षिका से चर्चा की, तो उन्होंने उन्हें उपयोगी बताया। उन्होंने समझाया कि विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थी की सहायता करते समय उसकी सुरक्षा के साथ-साथ उसकी स्वतंत्रता और आत्मसम्मान का भी ध्यान रखना चाहिए।

विद्यालय ने अमीना के साथ एक महिला सहायिका की विशेष ड्यूटी लगाने का निर्णय लिया। वह यात्रा के दौरान वाहन में चढ़ने-उतरने, चलने, भोजन करने और आवश्यक सामान सँभालने में उसकी सहायता करेगी। अध्यापिका ने मुझे भी अमीना के साथ रहने, उससे बातचीत करने और आसपास के दृश्यों का शब्दों में वर्णन करने के लिए कहा।

विशेष शिक्षा शिक्षिका ने कुछ अतिरिक्त सुझाव भी दिए—

  • यात्रा से पहले मार्ग और स्थान की जानकारी अमीना को दी जाए।

  • उसे अपनी छड़ी और अन्य सहायक उपकरण साथ रखने दिए जाएँ।

  • अनावश्यक रूप से उसका हाथ पकड़ने के बजाय पहले उससे सहायता की अनुमति ली जाए।

  • समूह से अलग होने की स्थिति के लिए एक निश्चित मिलन-स्थान तय किया जाए।

  • आवश्यक संपर्क नंबर और पहचान-पत्र उसके पास रखा जाए।

इन सुझावों से यात्रा अधिक सुरक्षित, व्यवस्थित और समावेशी बन सकती है।


प्रश्न 4. प्राप्त सुझावों के विषय में कक्षा के विशेष आवश्यकता वाले साथियों से भी चर्चा कीजिए और उनकी राय जानने का प्रयास कीजिए।

उत्तर: मैंने यात्रा से संबंधित सुझावों के विषय में अमीना से भी बातचीत की। वह यह जानकर बहुत प्रसन्न हुई कि विद्यालय उसकी सुविधा और सुरक्षा का ध्यान रख रहा है। उसने कहा कि उसे सहायता की आवश्यकता अवश्य है, लेकिन वह नहीं चाहती कि कोई उस पर दया करे या उसे दूसरों से अलग समझे।

अमीना ने बताया कि यदि कोई साथी उसे रास्ते, प्राकृतिक दृश्यों और आसपास होने वाली गतिविधियों के बारे में बताता रहे, तो वह यात्रा का पूरा आनंद ले सकती है। उसने यह भी कहा कि वह गीत गाकर और बातचीत करके सभी का मनोरंजन करेगी।

उसकी राय से हमें यह समझ आया कि विशेष आवश्यकता वाले साथियों से सीधे उनकी जरूरतों के बारे में पूछना सबसे महत्वपूर्ण है। सहायता उनकी इच्छा के अनुसार होनी चाहिए। उनके साथ सहानुभूति, मित्रता और समानता का व्यवहार किया जाना चाहिए, न कि उन्हें बोझ या असहाय समझा जाना चाहिए।


सृजन

प्रकृति की ओर

क्या आपने कभी सूर्योदय और सूर्यास्त के समय का दृश्य देखा है? अगर नहीं तो एक दिन सुबह जल्दी उठकर उगते सूरज की लालिमा को देखिए और अस्त होते सूर्य के साथ शाम का भी आनंद लीजिए। अब इन दोनों दृश्यों की तुलना करते हुए अपने अनुभव का वर्णन कीजिए।

उत्तर: मैंने सूर्यास्त का दृश्य कई बार देखा है। शाम के समय जब सूर्य धीरे-धीरे पश्चिम दिशा में नीचे उतरता है, तब उसका रंग लाल और नारंगी हो जाता है। आकाश भी सुनहरे, लाल और बैंगनी रंगों से सज जाता है। पक्षियों के झुंड अपने घोंसलों की ओर लौटते दिखाई देते हैं। कुछ ही समय में सूर्य क्षितिज के पीछे छिप जाता है और चारों ओर अँधेरा फैलने लगता है। सूर्यास्त का दृश्य मन को शांति देता है, परंतु उसमें दिन समाप्त होने का भाव भी होता है।

एक दिन मुझे सुबह जल्दी उठने का अवसर मिला। मैं छत पर गया तो पूर्व दिशा में हल्की लालिमा दिखाई दे रही थी। हमारे घर के सामने स्थित पीपल के पेड़ की पत्तियों के बीच से सूर्य की किरणें छनकर आ रही थीं। धीरे-धीरे लाल और नारंगी रंग का सूर्य ऊपर उठने लगा। उसकी चमक से आकाश उज्ज्वल हो गया और पेड़ों की पत्तियाँ सुनहरी दिखाई देने लगीं। पक्षियों की मधुर चहचहाहट के साथ चारों ओर नया जीवन जागता हुआ प्रतीत हुआ।

सूर्योदय और सूर्यास्त दोनों ही अत्यंत सुंदर प्राकृतिक दृश्य हैं। सूर्यास्त दिनभर की गतिविधियों के बाद शांति और विश्राम का संदेश देता है, जबकि सूर्योदय नई शुरुआत, आशा, ताजगी और उत्साह का प्रतीक है। सूर्यास्त का सूर्य शांत और मद्धिम दिखाई देता है, परंतु सूर्योदय का सूर्य चमकीला और ऊर्जा से भरा होता है। दोनों दृश्यों को देखकर मन प्रकृति के प्रति आदर और आनंद से भर जाता है।


अनुभव की साझेदारी

विधा से संवाद के अंतर्गत आपने दिए गए बिंदुओं के माध्यम से यात्रा – वृत्तांत के प्रमुख तत्वों के विषय में जाना और समझा। इन तत्वों को ध्यान में रखकर आप भी अपने घूमे हुए किसी प्रिय स्थान के अनुभवों पर एक यात्रा संस्मरण लिखिए।

उत्तर:

रानी-चोरा की रोमांचक यात्रा

एक बार मैं अपने माता-पिता और छोटी बहन के साथ ऋषिकेश से आगे स्थित रानी-चोरा नामक स्थान पर घूमने गया। इस स्थान का नाम सुनकर मुझे कुछ अनोखा लगा। वहाँ तक पहुँचने वाला रास्ता बहुत सँकरा, ऊबड़-खाबड़ और पगडंडी जैसा था। हमारी गाड़ी पहाड़ी रास्तों पर धीरे-धीरे आगे बढ़ रही थी। एक ओर ऊँचे पहाड़ थे और दूसरी ओर गहरी ढलान। रास्ता देखकर मुझे थोड़ी घबराहट हुई, फिर भी मैं उत्साह के साथ यात्रा का आनंद लेता रहा।

कठिन चढ़ाई पार करने के बाद हम अपने ठहरने के स्थान पर पहुँचे। वहाँ लगभग पंद्रह सुंदर टेंट लगे हुए थे। प्रत्येक टेंट के बाहर सेब के पेड़ थे, जिन पर हरे और लाल रंग के सेब लगे थे। आसपास बादल इतने नीचे तैर रहे थे कि ऐसा लग रहा था मानो हम बादलों के ऊपर खड़े हों। चारों ओर फैले ऊँचे पेड़ और पहाड़ अत्यंत सुंदर दिखाई दे रहे थे।

जब पिताजी ने टेंट की जिप खोली, तो हम सभी अंदर गए। टेंट के भीतर साफ बिस्तर, दो कुर्सियाँ और एक मेज रखी हुई थी। पीछे की ओर छोटा-सा स्नानघर भी बना था। यह पहली बार था जब मैंने किसी टेंट को अंदर से देखा था, इसलिए मैं बहुत उत्साहित था।

इसी बीच मेरी छोटी बहन अचानक चीख पड़ी। हमने ऊपर देखा तो टेंट की छत और कोनों में बड़ी-बड़ी मकड़ियाँ चिपकी हुई थीं। उन्हें देखकर मैं भी डर गया। तभी शिविर का संचालक वहाँ आया। उसने बताया कि ये जंगल की मकड़ियाँ हैं और सामान्यतः किसी को नुकसान नहीं पहुँचातीं। फिर भी हमने सावधानी से उन्हें बाहर निकाल दिया।

रात में भोजन करने के बाद जब हम सोने की तैयारी कर रहे थे, तो संचालक ने हमें टेंट की जिप अच्छी तरह बंद करने और तेज रोशनी न करने की सलाह दी। उसने बताया कि जंगल का क्षेत्र होने के कारण कभी-कभी जंगली जानवर रोशनी देखकर पास आ सकते हैं। यह सुनकर हम सभी डर गए। हमने तुरंत लाइट बंद कर दी और बहुत धीमी रोशनी में आवश्यक काम किए।

उस रात हम थोड़े भय के साथ सोए। अगली सुबह सूर्योदय का सुंदर दृश्य देखने और नाश्ता करने के बाद हमने दूसरे स्थान की ओर जाने का निर्णय लिया। रानी-चोरा की प्राकृतिक सुंदरता और टेंट में बिताई रोमांचक रात आज भी मुझे अच्छी तरह याद है। यह यात्रा मेरे जीवन के सबसे अनोखे और यादगार अनुभवों में से एक है।


चर्चा-परिचर्चा

प्रश्न- ‘यात्राएँ हमें समृद्ध करती हैं’ विषय पर कक्षा में एक परिचर्चा आयोजित कीजिए।

उत्तर:

अध्यापक – बच्चो! ऋषिकेश की यात्रा का आपका अनुभव कैसा रहा?

अमन – श्रीमान! यह यात्रा मेरे लिए बहुत विशेष रही। पहाड़ों की ठंडी हवा और गंगा की स्वच्छ धारा देखकर मेरा मन प्रसन्न हो गया।

स्मिता – श्रीमान! बहती हुई गंगा में स्नान करने का अनुभव बहुत आनंददायक था। ऐसा सुख सामान्य स्नानघर या स्विमिंग पूल में नहीं मिल सकता।

स्नेहा – इस यात्रा से मुझे समझ आया कि देश-विदेश से इतने लोग हरिद्वार और ऋषिकेश क्यों आते हैं।

अमन – वहाँ के ढाबों और होटलों में मिलने वाला भोजन भी बहुत स्वादिष्ट और उचित मूल्य का था।

स्मिता – हाँ, भोजन स्वच्छ, शुद्ध और स्वादिष्ट था।

स्नेहा – मुझे लक्ष्मण झूला और राम झूला पार करने में बहुत आनंद आया।

अमन – दोनों झूले गंगा और आसपास के पहाड़ों का सुंदर दृश्य प्रस्तुत करते हैं।

स्मिता – गंगा में तैरती मछलियों को देखकर भी बहुत खुशी हुई। मैंने उन्हें दाना खिलाया।

अमन – वहाँ के बाजारों में कई प्रकार की सुंदर और उपयोगी वस्तुएँ उपलब्ध थीं।

स्मिता – यात्रियों के ठहरने के लिए होटल, आश्रम और धर्मशालाओं की भी अच्छी व्यवस्था थी।

स्नेहा – वहाँ देश के विभिन्न भागों से आए लोगों को देखकर ऐसा लगा जैसे पूरा भारत एक ही स्थान पर एकत्र हो गया हो।

अध्यापक – ठीक कहा। यात्राएँ हमें नए स्थानों, संस्कृतियों, लोगों और जीवन-शैलियों से परिचित कराती हैं। इसीलिए कहा जाता है कि यात्राएँ हमारे अनुभव और ज्ञान को समृद्ध करती हैं।

अमन, स्मिता और स्नेहा – श्रीमान! हम अगली यात्रा पर कब जाएँगे?


“एक लहर मेरे पैरों को भिगो गई तो सहसा मुझे खतरे का एहसास हुआ।” यात्रा के दौरान कई बार ऐसी अप्रत्याशित चुनौतियाँ सामने आ जाती हैं। ऐसी किसी स्थिति का सामना करने के लिए व्यक्ति में किन गुणों को होना आवश्यक है? अपने सहपाठियों के साथ मिलकर इस विषय पर चर्चा कीजिए।

उत्तर: यात्रा के दौरान कई बार अचानक ऐसी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं जिनकी पहले से कल्पना नहीं की गई होती। रास्ता भटक जाना, मौसम खराब होना, स्वास्थ्य बिगड़ना, सामान खो जाना, वाहन में खराबी आना अथवा दुर्घटना होना ऐसी ही परिस्थितियाँ हैं। इनका सामना करने के लिए व्यक्ति को घबराने के बजाय धैर्य और समझदारी से काम लेना चाहिए।

ऐसी परिस्थितियों में निम्नलिखित गुण आवश्यक हैं—

धैर्य – कठिन परिस्थिति में धैर्य बनाए रखने से व्यक्ति शांत रहकर उचित समाधान सोच सकता है। घबराहट समस्या को और गंभीर बना सकती है।

सूझबूझ – व्यक्ति को स्थिति का सही आकलन करके उपलब्ध साधनों का उचित उपयोग करना चाहिए।

सही निर्णय लेने की क्षमता – संकट के समय शीघ्र, सुरक्षित और व्यावहारिक निर्णय लेना बहुत आवश्यक होता है।

सतर्कता – यात्रा के दौरान आसपास के वातावरण, मौसम, रास्तों और सुरक्षा संबंधी निर्देशों के प्रति सजग रहना चाहिए।

साहस – कठिन परिस्थिति का सामना करने के लिए साहस आवश्यक है। साहसी व्यक्ति डर के कारण अपना नियंत्रण नहीं खोता।

सहयोग की भावना – संकट में अकेले कार्य करने के बजाय साथियों, स्थानीय लोगों और संबंधित अधिकारियों की सहायता लेनी चाहिए।

प्राथमिक चिकित्सा का ज्ञान – सामान्य चोट या स्वास्थ्य संबंधी परेशानी की स्थिति में प्राथमिक उपचार की जानकारी उपयोगी सिद्ध होती है।

संचार कौशल – आवश्यकता पड़ने पर बचाव दल, पुलिस, चिकित्सा सेवा या परिवार के सदस्यों से स्पष्ट रूप से संपर्क करना चाहिए।

इस प्रकार धैर्य, साहस, सतर्कता और समझदारी के साथ किसी भी अप्रत्याशित चुनौती का सामना अधिक सुरक्षित ढंग से किया जा सकता है।


यदि आपके पास भी कोई ऐसा अनुभव हो तो उसे अपने सहपाठियों के साथ साझा कीजिए।

उत्तर: मेरे जीवन में भी यात्रा से जुड़ा एक ऐसा अनुभव हुआ है जिसे मैं कभी नहीं भूल सकता। एक बार हम परिवार के आठ सदस्यों के साथ हिमाचल प्रदेश की यात्रा पर गए थे। पहाड़ी रास्ते पर हमारी गाड़ी आगे बढ़ रही थी और हम सभी गीत गाते हुए यात्रा का आनंद ले रहे थे।

अचानक चालक ने घबराते हुए बताया कि गाड़ी के ब्रेक ठीक से काम नहीं कर रहे हैं। यह सुनते ही हम सब डर गए। सड़क के एक ओर ऊँचा पहाड़ था और दूसरी ओर गहरी खाई में व्यास नदी बह रही थी। गाड़ी लगातार तेज गति से आगे बढ़ रही थी। हमारे साथ दो छोटे बच्चे भी थे, जो डर के कारण रोने लगे।

मेरे पिताजी ने सभी को शांत रहने के लिए कहा। उन्होंने चालक को घबराए बिना गाड़ी पर नियंत्रण बनाए रखने की सलाह दी। सामने से आने वाले वाहन हमारी तेज गति देखकर स्थिति समझ गए और उन्होंने अपनी गाड़ियाँ सुरक्षित दूरी पर रोक लीं।

कुछ दूर आगे सड़क का एक भाग अपेक्षाकृत चौड़ा था। पिताजी ने चालक से कहा कि वह गाड़ी को खाई की ओर जाने से बचाते हुए पहाड़ की तरफ मोड़ दे, ताकि गति कम हो सके। चालक ने साहस और सावधानी से ऐसा ही किया। गाड़ी पहाड़ से टकराकर सड़क पर पलट गई और रुक गई।

पिताजी और चालक ने आगे का शीशा तोड़कर एक-एक करके सभी यात्रियों को बाहर निकाला। पीछे रुके लोगों ने पहले ही बचाव दल और चिकित्सा सहायता को सूचना दे दी थी। कुछ समय बाद सहायता पहुँच गई। हम सभी को हल्की चोटें आई थीं, लेकिन सौभाग्य से सबकी जान बच गई।

इस घटना से मैंने सीखा कि संकट की घड़ी में घबराने के बजाय धैर्य, साहस और सूझबूझ से काम लेना चाहिए। उस दिन पिताजी के उचित निर्णय और चालक की समझदारी ने हम सभी का जीवन बचाया। मुझे अपने पिताजी पर बहुत गर्व हुआ।


भाषा से संवाद

व्याकरण की बात

क्रिया – विशेषण की पहचान और रेखांकन

“समुद्र में पानी बढ़ रहा था। तट की चौड़ाई धीरे-धीरे कम होती जा रही थी।”

उपर्युक्त वाक्य में रेखांकित पद ‘धीरे-धीरे कम होना क्रिया की विशेषता बता रहा है। यहाँ कम होने की क्रिया धीमी गति से हो रही है। जिस प्रकार संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताने वाले शब्द ‘विशेषण’ कहलाते हैं, उसी प्रकार क्रिया की विशेषता बताने वाले शब्द ‘क्रिया-विशेषण’ कहलाते हैं। इस वाक्य में ‘धीरे-धीरे’ पद व्याकरणिक दृष्टि से क्रिया-विशेषण है।

नीचे दिए गए वाक्यों को ध्यानपूर्वक पढ़कर उनमें क्रिया-विशेषण पदों की पहचान कीजिए तथा दिए गए उदाहरण के अनुसार लिखिए।

वाक्य

(क) बल खाती लहरें रास्ते की नुकीली चट्टानों से कटती हुई आती थीं।
(ख) यात्रियों की कितनी ही टोलियाँ उस दिशा में जा रही थीं।
(ग) मैं देर तक भारत के स्थल भाग की आखिरी चट्टान को देखता रहा।


नीचे दिए गए वाक्यों को ध्यानपूर्वक पढ़कर उनमें क्रिया-विशेषण पदों की पहचान कीजिए तथा दिए गए उदाहरण के अनुसार लिखिए


उत्तर:

वाक्य: (क) बल खाती लहरें रास्ते की नुकीली चट्टानों से कटती हुई आती थीं।

क्रिया-विशेषण: कटती हुई—रीतिवाचक क्रिया-विशेषण

जिस क्रिया की विशेषता बताई गई है: यह पद ‘आती थीं’ क्रिया के होने के ढंग अथवा रीति की विशेषता बता रहा है।

वाक्य: (ख) यात्रियों की कितनी ही टोलियाँ उस दिशा में जा रही थीं।

क्रिया-विशेषण: उस दिशा में—स्थानवाचक क्रिया-विशेषण

जिस क्रिया की विशेषता बताई गई है: यह पद ‘जा रही थीं’ क्रिया के स्थान अथवा दिशा की जानकारी दे रहा है।

वाक्य: (ग) मैं देर तक भारत के स्थल भाग की आखिरी चट्टान को देखता रहा।

क्रिया-विशेषण: देर तक—कालवाचक क्रिया-विशेषण

जिस क्रिया की विशेषता बताई गई है: यह पद ‘देखता रहा’ क्रिया की समय-अवधि बता रहा है।


आओ नए वाक्य बनाएँ

पाठ से चुनकर कुछ वाक्य नीचे तालिका में दिए गए हैं। इन वाक्यों में रेखांकित शब्दों का अर्थ बताते हुए उनसे नए वाक्य बनाइए।


पाठ से चुनकर कुछ वाक्य नीचे तालिका में दिए गए हैं। इन वाक्यों में रेखांकित शब्दों का अर्थ बताते हुए उनसे नए वाक्य बनाइए


उत्तर:

1. क्षितिज

अर्थ – वह काल्पनिक सीमा जहाँ दूर से देखने पर धरती और आकाश मिलते हुए दिखाई देते हैं।

नया वाक्य – शाम के समय लाल सूर्य धीरे-धीरे क्षितिज के पीछे छिप गया।


2. झुरमुट

अर्थ – पेड़-पौधों, झाड़ियों अथवा वनस्पतियों का घना समूह।

नया वाक्य – चिड़ियों ने पेड़ों के घने झुरमुट में अपने घोंसले बनाए थे।


3. ढलान

अर्थ – ऊँचे स्थान से नीचे की ओर झुकी हुई भूमि।

नया वाक्य – वर्षा के कारण पहाड़ी ढलान पर चलना कठिन हो गया था।


4. श्रृंखला

अर्थ – एक निश्चित क्रम में जुड़ी हुई वस्तुओं, घटनाओं अथवा कड़ियों का समूह।

नया वाक्य – हिमालय पर्वत अनेक ऊँची पर्वत-श्रृंखलाओं से मिलकर बना है।


5. बीहड़

अर्थ – दुर्गम, निर्जन, ऊबड़-खाबड़ और खतरनाक क्षेत्र।

नया वाक्य – बचाव दल को बीहड़ इलाके में पहुँचने के लिए बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।


गतिविधियाँ

प्रश्न 1. कल्पना कीजिए कि आप अपने परिवार के साथ कहीं घूमने गए हैं। वहाँ आपकी भेंट एक ऐसे यात्री से होती है जिसे आपकी सहायता की आवश्यकता है लेकिन आप दोनों एक-दूसरे की भाषा से अपरिचित हैं। ऐसे में उस अनजान यात्री की सहायता आप कैसे करेंगे?

उत्तर: यदि यात्रा के दौरान मुझे कोई ऐसा व्यक्ति मिलता है जिसे सहायता की आवश्यकता है, लेकिन हम दोनों एक-दूसरे की भाषा नहीं समझते, तो मैं सबसे पहले उसके हाव-भाव और संकेतों को समझने का प्रयास करूँगा। मैं हाथों के इशारों, चेहरे के भावों और सामान्य संकेतों के माध्यम से यह जानने की कोशिश करूँगा कि उसे किस प्रकार की सहायता चाहिए।

यदि उसके पास कोई टिकट, पता, मोबाइल फोन या नक्शा होगा, तो मैं उसकी सहायता से स्थान की जानकारी समझूँगा। आवश्यक होने पर मोबाइल के अनुवाद ऐप का प्रयोग भी किया जा सकता है। मैं चित्र, नक्शा या लिखे हुए शब्द दिखाकर उसे सही दिशा बताने की कोशिश करूँगा।

यदि समस्या गंभीर होगी, तो मैं स्थानीय पुलिस, पर्यटन सहायता केंद्र, स्टेशन कर्मचारी या किसी ऐसे व्यक्ति की मदद लूँगा जो उसकी भाषा समझता हो। मैं उस यात्री को अकेला छोड़ने के बजाय तब तक उसके साथ रहूँगा, जब तक उसकी समस्या का उचित समाधान न हो जाए।

इस प्रकार भाषा अलग होने पर भी संकेतों, तकनीक, धैर्य और सहयोग की सहायता से किसी अनजान यात्री की मदद की जा सकती है।


प्रश्न 2. पधारो म्हारे देश
अपने क्षेत्र के महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों की एक सूची बनाइए और उनकी विशेषताओं को ध्यान में रखकर एक विवरणिका (ब्रॉशर) तैयार कीजिए।

उत्तर:

मेरा क्षेत्र—दिल्ली

दिल्ली दर्शन: इतिहास, संस्कृति और आधुनिकता का संगम

दिल्ली भारत की राजधानी होने के साथ-साथ एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और पर्यटन केंद्र भी है। यहाँ प्राचीन स्मारक, धार्मिक स्थल, सुंदर उद्यान, संग्रहालय और आधुनिक इमारतें देखने को मिलती हैं।

1. लालकिला

  • यह मुगलकालीन स्थापत्य कला का शानदार उदाहरण है।

  • इसका निर्माण मुगल सम्राट शाहजहाँ ने करवाया था।

  • स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर भारत के प्रधानमंत्री यहाँ राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं।

  • यह यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है।


2. जामा मस्जिद

  • जामा मस्जिद भारत की सबसे बड़ी और प्रसिद्ध मस्जिदों में से एक है।

  • इसका विशाल प्रांगण और भव्य वास्तुकला पर्यटकों को आकर्षित करती है।

  • इसका निर्माण भी शाहजहाँ के शासनकाल में हुआ था।


3. कुतुब मीनार

  • यह विश्व की सबसे ऊँची ईंट से निर्मित मीनारों में से एक है।

  • इसकी दीवारों पर सुंदर नक्काशी और अभिलेख दिखाई देते हैं।

  • यह भी यूनेस्को का विश्व धरोहर स्थल है।


4. लोटस टेम्पल

  • यह मंदिर कमल के फूल के आकार में बनाया गया है।

  • इसका शांत वातावरण ध्यान और प्रार्थना के लिए उपयुक्त है।

  • सफेद संगमरमर से बनी इसकी सुंदर संरचना पर्यटकों को आकर्षित करती है।


5. इंडिया गेट

  • यह स्मारक देश के लिए बलिदान देने वाले सैनिकों की स्मृति में बनाया गया है।

  • शाम के समय रोशनी से सजा इंडिया गेट अत्यंत सुंदर दिखाई देता है।

  • यह दिल्ली के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है।


6. अक्षरधाम मंदिर

  • यह एक विशाल और भव्य सांस्कृतिक तथा धार्मिक परिसर है।

  • मंदिर में सुंदर नक्काशी, प्रदर्शनी और आकर्षक प्रकाश एवं ध्वनि कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

  • यहाँ भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं की झलक दिखाई देती है।


7. जंतर-मंतर

  • यह एक प्राचीन खगोलीय वेधशाला है।

  • इसका निर्माण महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने करवाया था।

  • यहाँ बने उपकरण विज्ञान, गणित और वास्तुकला के अद्भुत मेल को दर्शाते हैं।


पर्यटकों के लिए सुझाव

  • ऐतिहासिक स्थलों की स्वच्छता बनाए रखें।

  • स्मारकों की दीवारों पर कुछ न लिखें।

  • स्थानीय नियमों और सुरक्षा निर्देशों का पालन करें।

  • गर्मी के मौसम में पानी, टोपी और आवश्यक सामग्री साथ रखें।

  • संग्रहालयों और स्मारकों के समय की जानकारी पहले प्राप्त कर लें।


दिल्ली अपने इतिहास, कला, संस्कृति, भोजन और आधुनिक जीवन के कारण प्रत्येक यात्री के लिए एक आकर्षक पर्यटन स्थल है। छात्र चित्रों और रचनात्मक सजावट के साथ इस जानकारी का आकर्षक ब्रॉशर तैयार कर सकते हैं।


भाषा संगम

“ऊँची-ऊँची लहरों से बचाते हुए मल्लाह नाव को ला रहे थे”


ऊँची-ऊँची लहरों से बचाते हुए मल्लाह नाव को ला रहे थे


‘नाव’ शब्द के लिए संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कुछ भारतीय भाषाओं में प्रयुक्त शब्दों की सूची आगे दी गई है।

नाव (हिंदी); नौ, नौका (संस्कृत); बेड़ी (पंजाबी); किश्ती, नाव (उर्दू); नाव (कश्मीरी); बेड़ी, किश्ती (सिंधी); होड़ी, नाव (मराठी); नाव, होडी (गुजराती); बहड़ी (कोंकणी); नाउ, नौका, डुड्रा (नेपाली); नाओ, नौका (बांग्ला); नाओ दोणि (असमिया); हि (मणिपुरी); नौका, नाआ (ओड़िआ) ; पडव, नाव (तेलुगू); ओडम् (तमिल); तोणि (मलयालम); (कन्नड़)।

इनके अतिरिक्त यदि आप ‘नाव’ शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं। तो उस भाषा में भी लिखिए।
उपर्युक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा में, भी लिखिए।
https://shabd.education.gov.in/lexicon.jsp

उत्तर: अन्य भाषाओं में ‘नाव’ के लिए प्रयुक्त शब्द

  • भोजपुरी – नउका

  • राजस्थानी – नावड़ी

  • मैथिली – नाओ अथवा नओका

  • हिमाचली – कश्ती

  • अवधी – नउका

  • ब्रज – नैया

“ऊँची-ऊँची लहरों से बचाते हुए मल्लाह नाव को ला रहे थे।”

विभिन्न भाषाओं में वाक्य—

भोजपुरी – मल्लाह ऊँच-ऊँच लहर से बचावत नउका ले आवत रहन।

अवधी – मल्लाह ऊँची-ऊँची लहरन से बचावत नउका ले आवत रहे।

राजस्थानी – मल्लाह ऊँची-ऊँची लहरां सूँ बचावतो नावड़ी ने ल्यावतो रो।

पंजाबी – ਮਲਾਹ ਉੱਚੀਆਂ-ਉੱਚੀਆਂ ਲਹਿਰਾਂ ਤੋਂ ਬਚਾਉਂਦੇ ਹੋਏ ਕਿਸ਼ਤੀ ਲੈ ਕੇ ਆ ਰਹੇ ਸਨ।

गुजराती – નાવિક ઊંચાં-ઊંચાં મોજાંથી બચાવીને નાવ લઈને આવી રહ્યા હતા।

मराठी – नावाडी उंच-उंच लाटांपासून वाचवत नाव घेऊन येत होते।

संस्कृत – नाविकाः उच्चेभ्यः तरङ्गेभ्यः नौकां रक्षन्तः आनयन्ति स्म।

कश्मीरी – मल्लाह ऊँची-ऊँची लहरन पेत्थ बचावित नाव आनन आसन।

उर्दू – ملاح اونچی اونچی لہروں سے بچاتے ہوئے کشتی لا رہے تھے।

अपनी मातृभाषा में वाक्य लिखते समय विद्यार्थी अपने परिवार अथवा शिक्षक की सहायता ले सकते हैं और सही उच्चारण तथा वर्तनी का ध्यान रख सकते हैं।


झरोखे से

आपने ‘आखिरी चट्टान तक’ रचना पढ़ी जो दक्षिण भारत की यात्रा पर आधारित है। आइए, अब पढ़ते हैं हिंदी के प्रसिद्ध रचनाकार निर्मल वर्मा का कुंभ मेले पर आधारित यात्रा-वृत्तांत का एक अंश-

उत्तर:

प्रयाग : 1976

सुबह होने से पहले अचानक सीटी की आवाज सुनाई देती है। गहरी नींद में वह आवाज किसी छेद की तरह प्रवेश करती है। कुछ क्षणों तक लेखक को समझ नहीं आता कि वह कहाँ है और कौन-सा समय है। आँखें खुलने के बाद चारों ओर घना अँधेरा दिखाई देता है। धीरे-धीरे उसे याद आता है कि वह अपने स्लीपिंग बैग में लेटा हुआ है, जो उसकी अनेक यात्राओं का साथी रहा है। वह जाग चुका है, परंतु उसका शरीर अब भी स्लीपिंग बैग की गरमाहट में आराम करना चाहता है।

कुछ देर बाद उसकी आँखें अँधेरे में आसपास रखी वस्तुओं को पहचानने लगती हैं। उसे किताब, तिपाई, लालटेन, फूस का अधखुला दरवाजा और हवा से हिलती छत दिखाई देती है। बाहर धीमी आवाजों का एक निरंतर शोर सुनाई देता है। ऐसा लगता है जैसे हजारों लोग रेत पर अपने कदम रखते हुए संगम की ओर बढ़ रहे हों।

लेखक जल्दी से अपना स्लीपिंग बैग समेटता है और हाथों से रेत तथा फूस को हटाते हुए दरवाजा खोलता है। बाहर का दृश्य देखकर वह कुछ देर के लिए ठहर जाता है। पूर्णिमा का गोल चाँद इलाहाबाद के किले के ऊपर दिखाई दे रहा है। पिछली रात उसने उसी चाँद की चमकती परछाईं गंगा के पानी में देखी थी। अब वह रातभर की यात्रा से थका हुआ, किले के माथे पर लगी सफेद और फीकी बिंदी जैसा लग रहा है।

तभी आश्रम का चौकीदार लेखक से पूछता है कि क्या वह जाग गया है। वह चौकीदार लगभग उन्नीस-बीस वर्ष का युवक है और संभवतः बचपन से ही आश्रम में रहता है। वह लेखक को हमेशा आश्चर्य से देखता है, क्योंकि उसे समझ नहीं आता कि लेखक किस प्रकार का यात्री है। वह न तो सामान्य तीर्थयात्री जैसा लगता है और न ही कल्पवासी जैसा। अपने डफल बैग के साथ मेले में घूमता हुआ वह उसे किसी स्वतंत्र यात्री अथवा घुमक्कड़ जैसा दिखाई देता है।

चौकीदार लेखक से पूछता है कि क्या वह भी संगम जाएगा। लेखक उत्तर देता है कि वह संगम जाने के लिए ही वहाँ आया है। इसके बाद वह सीटी की आवाज के विषय में पूछता है। चौकीदार बताता है कि पुलिस के कर्मचारी सीटी बजाकर यात्रियों को सही रास्ता दिखाते हैं, क्योंकि अँधेरे में कई लोग रास्ता भटक जाते हैं।

बाहर ठंड से काँपती आवाजें और भजन की पंक्तियाँ सुनाई देती हैं। किसी वृद्ध स्नानार्थी का काँपता स्वर ठंडी हवा में दूर तक फैल जाता है। लेखक पानी के पंप को खोजता हुआ आश्रम के चारों ओर घूमता है। अधिकांश लोग सो रहे हैं। खाली झोपड़ियों के दरवाजे हवा से खुलते और बंद होते रहते हैं। सभी कुटियों के बीच सच्चे महाराज की यज्ञशाला अलग दिखाई देती है। पीले फूलों से सजा उसका मंडप और एक के ऊपर बनी छतें चाँदनी में किसी जापानी पैगोड़ा की तरह चमक रही हैं।

यह यात्रा-वृत्तांत कुंभ मेले की सुबह, तीर्थयात्रियों की गतिविधियों, ठंडे वातावरण और प्रयाग के आध्यात्मिक परिवेश का अत्यंत सजीव चित्र प्रस्तुत करता है। विद्यार्थी पुस्तकालय अथवा इंटरनेट की सहायता से निर्मल वर्मा का पूरा यात्रा-वृत्तांत खोजकर पढ़ सकते हैं।


खोजबीन

इस यात्रा वृत्तांत में उल्लिखित ‘आखिरी चट्टान’ को ‘विवेकानंद चट्टान’ के नाम से भी जाना जाता है। युवाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत के रूप में विवेकानंद के जन्मदिवस 12 जनवरी को भारत में ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ तथा ‘राष्ट्रीय युवा सप्ताह’ के रूप में मनाया जाता है। राष्ट्रीय युवा सप्ताह के एक हिस्से के रूप में भारत सरकार द्वारा प्रत्येक वर्ष ‘राष्ट्रीय युवा महोत्सव’ का आयोजन किया जाता है। विवेकानंद के जीवन, लेखन और सामाजिक कार्यों के विषय में ‘पुस्तकालय और इंटरनेट से खोजकर पढ़िए और कक्षा में चर्चा कीजिए। कुछ लिंक नीचे दिए गए हैं।

उत्तर: स्वामी विवेकानंद युवाओं के लिए आदर्श, मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत माने जाते हैं। उनका जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में हुआ था। उनके बचपन का नाम नरेंद्रनाथ दत्त था। वे बचपन से ही बुद्धिमान, जिज्ञासु, साहसी और आध्यात्मिक विचारों वाले थे।

स्वामी रामकृष्ण परमहंस उनके गुरु थे। उनसे प्रेरणा प्राप्त करके विवेकानंद ने भारतीय दर्शन, वेदांत और मानव सेवा के विचारों को अपनाया। उनका मानना था कि प्रत्येक मनुष्य में दिव्य शक्ति होती है और आत्मविश्वास, परिश्रम तथा सही शिक्षा के माध्यम से व्यक्ति अपने जीवन को श्रेष्ठ बना सकता है।

स्वामी विवेकानंद ने 1893 में अमेरिका के शिकागो नगर में आयोजित विश्व धर्म सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व किया। अपने प्रभावशाली संबोधन के माध्यम से उन्होंने भारतीय संस्कृति, धार्मिक सहिष्णुता और विश्व-बंधुत्व का संदेश दिया। उनके विचारों ने भारत के साथ-साथ विश्व के अनेक लोगों को प्रभावित किया।

उन्होंने रामकृष्ण मिशन की स्थापना की। यह संस्था शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, आपदा सहायता, ग्रामीण विकास और समाज-सेवा के क्षेत्र में कार्य करती है। स्वामी विवेकानंद का मानना था कि जरूरतमंद लोगों की सेवा करना ही ईश्वर की सच्ची सेवा है।

उन्होंने युवाओं को साहसी, अनुशासित, आत्मनिर्भर और राष्ट्र के प्रति समर्पित बनने की प्रेरणा दी। उनके विचार शिक्षा को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं रखते, बल्कि चरित्र निर्माण, आत्मविश्वास और मानवता के विकास पर बल देते हैं।

स्वामी विवेकानंद की जयंती 12 जनवरी को भारत में राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाई जाती है। इस अवसर पर विद्यालयों, महाविद्यालयों और विभिन्न संस्थानों में भाषण, निबंध, सांस्कृतिक कार्यक्रम, युवा सम्मेलन और समाज-सेवा से जुड़ी गतिविधियाँ आयोजित की जाती हैं।

उपयोगी स्रोत—

स्वामी विवेकानंद युवाओं के लिए सच्चे आदर्श और मार्गदर्शक
https://haryanarajbhavan.gov.in/hi/publication/

स्वामी विवेकानंद – आध्यात्मिक वैज्ञानिक, प्रेस सूचना ब्यूरो, भारत सरकार
https://www.pib.gov.in

विद्यार्थी दिए गए स्रोतों, पुस्तकालय की पुस्तकों और अन्य विश्वसनीय शैक्षिक सामग्री की सहायता से स्वामी विवेकानंद के जीवन, रचनाओं, विचारों और सामाजिक कार्यों के विषय में अधिक जानकारी एकत्रित कर सकते हैं। प्राप्त जानकारी के आधार पर कक्षा में उनके व्यक्तित्व, शिक्षा संबंधी विचारों और युवाओं के लिए दिए गए संदेशों पर चर्चा की जा सकती है।


About NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 5 आखिरी चट्टान तक

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 5 आखिरी चट्टान तक विद्यार्थियों को मोहन राकेश द्वारा लिखित यात्रा-वृत्तांत को सरल और विस्तारपूर्वक समझने में सहायता करते हैं। इस पाठ में लेखक ने कन्याकुमारी की यात्रा, समुद्र की विशालता, सूर्यास्त के मनमोहक दृश्य, स्थानीय लोगों के जीवन और प्रकृति से जुड़े अपने अनुभवों का सजीव वर्णन किया है।


Vedantu के विषय विशेषज्ञों द्वारा तैयार किए गए ये solutions रचना से संवाद, विधा से संवाद, विषयों से संवाद, हस्तशिल्प कौशल, भाषा से संवाद, सृजन, गतिविधियाँ और खोजबीन से जुड़े सभी प्रश्नों के स्पष्ट उत्तर प्रदान करते हैं। विद्यार्थी इन answers की सहायता से कठिन प्रश्नों को समझ सकते हैं, बेहतर उत्तर-लेखन सीख सकते हैं और परीक्षा के लिए chapter का प्रभावी revision कर सकते हैं।


आखिरी चट्टान तक पाठ के मुख्य विषय

  • प्रकृति का सौंदर्य – पाठ में समुद्र, सूर्यास्त, रेत, टीलों और आकाश के बदलते रंगों का सुंदर वर्णन किया गया है।

  • मानसिक दृढ़ता – थकान और कठिनाई के बावजूद लेखक ऊँचे टीले तक पहुँचने का प्रयास जारी रखता है।

  • यात्रा और अनुभव – यात्रा लेखक को नए स्थानों, लोगों, संस्कृतियों और परिस्थितियों से परिचित कराती है।

  • प्रकृति की शक्ति – समुद्र की बढ़ती लहरें लेखक को प्रकृति की शक्ति और संभावित खतरे का अनुभव कराती हैं।

  • स्थानीय जनजीवन – कन्याकुमारी के स्थानीय लोगों के रोजगार, हस्तशिल्प और आर्थिक परिस्थितियों का उल्लेख मिलता है।

  • आत्मानुभूति – लेखक केवल स्थानों का वर्णन नहीं करता, बल्कि अपने आश्चर्य, संतोष, भय और रोमांच को भी व्यक्त करता है।


CBSE Class 9 Hindi Chapter 5 Aakhri Chataan Tak Other Study Materials

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Important Links for Chapter 5 Class 9 Hindi

1

Class 9 Aakhri Chataan Tak Important Questions

2

Class 9 Aakhri Chataan Tak Revision Notes



Chapter-Specific NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga

Given below are the chapter-wise NCERT Solutions for Class 9 Hindi. Go through these chapter-wise solutions to be thoroughly familiar with the concepts.


S.No

NCERT Solutions Class 9 Chapter-wise Hindi PDF

1

Chapter 1 - Do Bailon Ki Katha Solutions

2

Chapter 2 - Kya Likhun? Solutions

3

Chapter 3 - Samvaadheen Solutions

4

Chapter 4 -  Aisi Bhi Baatein Hoti Hein Solutions

5

Chapter 6 - Reedh Ki Haddi Solutions

6

Chapter 7 - Main Aur Mera Desh Solutions

7

Chapter 8 - Pad Solutions

8

Chapter 9 - Ram-Lakshman-Parshuram-Sanvaad Solutions

9

Chapter 10 - Bharati Jay Vijaykare! Solutions

10

Chapter 11 - Jhansi Ki Rani Solutions

11

Chapter 12 - Ghar Ki Yaad Solutions



Additional Study Materials for Class 9 Hindi

FAQs on NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 5 Aakhri Chataan Tak (आखिरी चट्टान तक) 2026-27

1. Where can I download NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 5 PDF?

Students can download the FREE PDF of NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 5 आखिरी चट्टान तक from Vedantu. The PDF contains chapter-wise, detailed and easy-to-understand answers for the 2026-27 academic session.

2. Are Class 9 Hindi Ganga Chapter 5 Solutions available for free?

Yes, Vedantu provides FREE NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 5. Students can read the complete solutions online and download the PDF for offline study and revision.

3. Who is the author of Class 9 Hindi Ganga Chapter 5 आखिरी चट्टान तक?

‘आखिरी चट्टान तक’ के लेखक मोहन राकेश हैं। वे हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध नाटककार, कहानीकार और यात्रा-वृत्तांत लेखक थे।

4. What is the main theme of आखिरी चट्टान तक from Hindi Class 9?

The chapter highlights the beauty and power of nature, the importance of determination, the excitement of travel and the experiences gained by visiting new places. It also presents the social and economic life of the local people of Kanyakumari.

5. ‘आखिरी चट्टान’ को विवेकानंद चट्टान क्यों कहा जाता है?

मान्यता है कि स्वामी विवेकानंद ने कन्याकुमारी के समुद्र में स्थित इस चट्टान पर ध्यान किया था। उनकी स्मृति में वहाँ विवेकानंद रॉक मेमोरियल बनाया गया, इसलिए इसे विवेकानंद चट्टान भी कहा जाता है।

6. What is the meaning of ‘प्रयत्न की सार्थकता’ in the chapter 5 from NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga?

‘प्रयत्न की सार्थकता’ का अर्थ है लेखक के प्रयास का सफल होना। अनेक टीलों को पार करने के बाद उसे ऐसा स्थान मिला, जहाँ से वह समुद्र और सूर्यास्त का पूरा दृश्य देख सका।

7. How can students prepare Class 9 Hindi Chapter 5 for exams?

Students should first read the chapter carefully, understand its main theme and revise the important incidents. They should practise textbook questions, learn the meanings of difficult words and write answers in clear and simple Hindi.

8. क्या इन NCERT Solutions Class 9 Hindi Ganga Chapter 5 से long-answer questions की तैयारी की जा सकती है?

हाँ, इन solutions में विस्तृत उत्तर, उदाहरण, मुख्य बिंदु और आवश्यक व्याख्या दी गई है। विद्यार्थी इनकी सहायता से लंबे उत्तरों को सही क्रम और स्पष्ट भाषा में लिखने का अभ्यास कर सकते हैं।

9. Can students use these answers directly in the CBSE Class 9 Hindi examination?

Students can use these answers as a reference for exam preparation. They should understand the meaning and then write the answers in their own simple language while including all important points.